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हिमालय की चोटियों तक पहुंचने वाले ड्रोन खरीदेगी भारतीय सेना

हिमालय की चोटियों तक पहुंचने वाले ड्रोन खरीदेगी भारतीय सेना

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भारतीय सेना हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात अपने सैनिकों तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन खरीद रही है। भारत सरकार के रक्षा... 07.08.2026, Sputnik भारत

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अधिसूचना में तीन श्रेणियों के ड्रोन के बारे में रक्षा उद्योग से जानकारी मांगी गई है। पहली श्रेणी 6000 फीट की ऊंचाई तक सामान पहुंचाने में सक्षम ड्रोन की है, दूसरी 6000 से 12000 फीट तक और तीसरी श्रेणी 12000 फीट से 20000 फीट तक ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम होंगे।ये ड्रोन सबसे अग्रिम चौकी पर तैनात सैनिकों तक शांति या युद्धकाल में खराब मौसम में भी काम करने में सक्षम होंगे। इनमें रंगीन कैमरे के अतिरिक्त रात में लैंड करने के लिए थर्मल सेंसर भी होंगे और ये ड्रोन 5000 फीट से लेकर 19000 फीट की ऊंचाई से उड़ान भरने में सक्षम होंगे।ये शून्य से 30 डिग्री नीचे से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम कर सकेंगे और एक तरफ से 10 से लेकर 20 किमी तक उड़ान भर सकेंगे। ड्रोन अपनी दिशा निर्देश के लिए सेना के नक्शों और नेविगेशन प्रणालियों के साथ सामंजस्य बिठा सकेंगे।दो या तीन सैनिकों का चालक दल इन्हें बिना रनवे के उड़ा सकेगा और वापस लैंड करा सकेगा। इनके पास शत्रु के इलेक्ट्रॉनिक प्रहार से बचने के साथ-साथ एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग की भी क्षमता होगी।भारतीय सेना उत्तरी सीमा पर हिमालय की ऊंची पहाड़ियों पर पूरे वर्ष तैनात रहती है और सियाचिन ग्लेशियर में सबसे ऊंची भारतीय चौकी 21500 फीट तक है। यहां तैनात सैनिकों तक रसद, गोलाबारूद और जीवन रक्षक दवाएं पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है।ज्यादातर चौकियां वर्ष के कई महीनों तक सड़क मार्ग से पूरी तरह कट जाती हैं। ऐसे में सैनिकों की पीठ पर या खच्चरों के द्वारा ही आवश्यक आपूर्ति की जाती है। खराब मौसम में हेलीकॉप्टर काम नहीं कर पाते और कई बार हफ्तों तक चौकियों पर कोई आपूर्ति नहीं की जा सकती है।ऐसे में इतनी ऊंचाई तक उड़ान भरने और आपूर्ति करने में सक्षम ड्रोन सैनिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होंगे।

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भारतीय सेना हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात अपने सैनिकों तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन खरीद रही है। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार 2715 ड्रोन खरीदे जाएंगे जो 6000 फीट से लेकर 20000 फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भर सकें।

अधिसूचना में तीन श्रेणियों के ड्रोन के बारे में रक्षा उद्योग से जानकारी मांगी गई है। पहली श्रेणी 6000 फीट की ऊंचाई तक सामान पहुंचाने में सक्षम ड्रोन की है, दूसरी 6000 से 12000 फीट तक और तीसरी श्रेणी 12000 फीट से 20000 फीट तक ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम होंगे।

ये ड्रोन सबसे अग्रिम चौकी पर तैनात सैनिकों तक शांति या युद्धकाल में खराब मौसम में भी काम करने में सक्षम होंगे। इनमें रंगीन कैमरे के अतिरिक्त रात में लैंड करने के लिए थर्मल सेंसर भी होंगे और ये ड्रोन 5000 फीट से लेकर 19000 फीट की ऊंचाई से उड़ान भरने में सक्षम होंगे।

ये शून्य से 30 डिग्री नीचे से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम कर सकेंगे और एक तरफ से 10 से लेकर 20 किमी तक उड़ान भर सकेंगे। ड्रोन अपनी दिशा निर्देश के लिए सेना के नक्शों और नेविगेशन प्रणालियों के साथ सामंजस्य बिठा सकेंगे।

दो या तीन सैनिकों का चालक दल इन्हें बिना रनवे के उड़ा सकेगा और वापस लैंड करा सकेगा। इनके पास शत्रु के इलेक्ट्रॉनिक प्रहार से बचने के साथ-साथ एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग की भी क्षमता होगी।

भारतीय सेना उत्तरी सीमा पर हिमालय की ऊंची पहाड़ियों पर पूरे वर्ष तैनात रहती है और सियाचिन ग्लेशियर में सबसे ऊंची भारतीय चौकी 21500 फीट तक है। यहां तैनात सैनिकों तक रसद, गोलाबारूद और जीवन रक्षक दवाएं पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है।

ज्यादातर चौकियां वर्ष के कई महीनों तक सड़क मार्ग से पूरी तरह कट जाती हैं। ऐसे में सैनिकों की पीठ पर या खच्चरों के द्वारा ही आवश्यक आपूर्ति की जाती है। खराब मौसम में हेलीकॉप्टर काम नहीं कर पाते और कई बार हफ्तों तक चौकियों पर कोई आपूर्ति नहीं की जा सकती है।

ऐसे में इतनी ऊंचाई तक उड़ान भरने और आपूर्ति करने में सक्षम ड्रोन सैनिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होंगे।

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