बेटे अबान को आखिरी बार देखने जनाजे में पहुंची थी मां शाइस्ता? आया नया अपडेट, पुलिस ने क्या कहा पूरे मामले पर?
Published: Sunday, August 9, 2026, 16:25 [IST]
प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद को 8 अगस्त की शाम कसारी-मसारी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। अबान के जनाजे में उसके बड़े भाई उमर और अली जेल से पैरोल पर पहुंचे। छोटे भाई अहजम भी वहां मौजूद रहे। करीब चार साल बाद तीनों भाई एक साथ दिखे। भावुक माहौल के बीच सबसे ज्यादा चर्चा एक चेहरे को लेकर रही। सवाल उठा कि क्या अबान की मां और अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन भी बेटे को आखिरी बार देखने कब्रिस्तान पहुंची थीं?
कब्रिस्तान की दूसरी तरफ गिरी हुई दीवार के पास कई महिलाएं बुर्का पहनकर खड़ी दिखाई दीं। इसके बाद दावा होने लगा कि इनमें शाइस्ता परवीन भी थीं और वह कब्रिस्तान के भीतर गए बिना दूर से अपने छोटे बेटे अबान को अंतिम विदाई दे रही थीं। लेकिन पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है। DCP मनीष शांडिल्य ने साफ कहा कि आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और किसी महिला की पहचान आधिकारिक तौर पर शाइस्ता परवीन के रूप में नहीं की गई है।
शाइस्ता वहां थीं या नहीं? पुलिस ने क्या कहा
अबान के जनाजे के दौरान शाइस्ता की मौजूदगी को लेकर सोशल मीडिया और मौके पर चर्चा जरूर हुई लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। दावा यह था कि शाइस्ता पुलिस के घेरे के बीच कब्रिस्तान में दाखिल नहीं हुईं। वह कथित तौर पर दूर से ही बेटे को आखिरी बार देख रही थीं।
लेकिन यहां सबसे अहम बात यही है कि पुलिस ने किसी महिला की पहचान शाइस्ता के तौर पर नहीं की है। DCP मनीष शांडिल्य के मुताबिक मौके पर काफी लोग थे। इसलिए सिर्फ किसी महिला के दिखाई देने के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि वह शाइस्ता ही थीं। यानी अभी तक कहानी में दावा है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं।

तीनों भाई मिले तो भर आईं आंखें
अबान के जनाजे का सबसे भावुक पल तब आया जब उमर, अली और अहजम चार साल बाद एक साथ सामने आए। अबान की मौत का गम तो था ही लेकिन जब तीनों अपने पिता अतीक अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्र के पास पहुंचे तो माहौल और भारी हो गया।
अप्रैल 2023 में अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले असद भी झांसी में एनकाउंटर में मारा गया था। उस वक्त उमर और अली जेल में थे। अब अबान की कब्र भी उसी जगह बनी, जहां अतीक और असद दफन हैं।
तीनों भाइयों ने कब्रों पर सिर रखा और काफी देर तक रोते रहे। वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। अबान को दफनाने के दौरान अली ने मिट्टी दी तो वह भावुक हो गया। उमर ने उसे गले लगा लिया। परिवार का एक बच्चा रोने लगा तो तीनों भाइयों ने उसे गोद में लेकर शांत कराया।
उमर-अली ने खुद उठाया अबान का जनाजा
अबान का जनाजा शाम को कसारी-मसारी कब्रिस्तान पहुंचा। मस्जिद के पास नमाज अदा की गई। इसके बाद उमर, अली और अहजम ने जनाजे को कंधा दिया। घटनाक्रम के मुताबिक उमर और अली के पहुंचने के बाद भीड़ तेजी से बढ़ गई। पुलिस ने लोगों को पीछे हटाया।
कई जगह बैरिकेडिंग टूट गई और पुलिस को भीड़ संभालने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। कुछ लोग पीछे की तरफ से कब्रिस्तान में दाखिल होने की कोशिश करते भी दिखे। पूरे इलाके में करीब 800 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

भाई ने ही पढ़ाई जनाजे की नमाज
अबान के जनाजे की नमाज को लेकर भी एक खास बात सामने आई। कब्रिस्तान में कई मौलाना और मौलवी मौजूद थे। मस्जिद के पेश इमाम भी वहां थे। इसके बावजूद बड़े भाई उमर ने खुद इमामत करते हुए जनाजे की नमाज पढ़ाई। बताया गया कि जेल जाने के बाद उमर ने दाढ़ी रख ली है। वह धार्मिक किताबें पढ़ता है और कुरआन की तिलावत करता है। इसी वजह से उसने खुद भाई की नमाज पढ़ाने की इच्छा जताई।
चार साल बाद मिले, वैन से ही एक-दूसरे को देखते रहे
उमर शनिवार (08 अगस्त) शाम पुलिस की सुरक्षा में लखनऊ जेल से प्रयागराज पहुंचा। इसके बाद झांसी जेल से अली को भी लाया गया। दोनों की गाड़ियां कुछ देर तक एक-दूसरे के पीछे खड़ी रहीं। दोनों भाई वैन के अंदर से एक-दूसरे को देखते रहे।
जब अली को बाहर निकाला गया तो उसके हाथ में हथकड़ी थी। दोनों आमने-सामने आए तो गले लगकर रो पड़े। अली ने काला कुर्ता, सिर पर बड़ा रुमाल और कंधे पर सफेद अंगोछा रखा था। उमर सफेद पगड़ी में दिखाई दिया। यह अंदाज उनके पिता अतीक की याद भी दिला रहा था। अहजम भी रोते हुए कब्रिस्तान पहुंचा। दो युवकों ने उसे सहारा देकर अंदर पहुंचाया। वह अली की वैन के पास गया और दोनों भाइयों ने एक-दूसरे का हाथ छूने की कोशिश की।
बुआ से घंटेभर हुई बात, मां और चाची का भी जिक्र
अबान को दफनाने के बाद तीनों भाई करीब एक घंटे तक अपनी बुआ परवीन कुरैशी और भाई अहजम के साथ रहे। बुआ व्हीलचेयर पर थीं। उमर और अली ने उन्हें गले लगाया। वह भी दोनों से लिपटकर रोने लगीं।
बुआ ने भावुक होकर कहा, "अल्लाह ने ये कैसा दिन दिखा दिया, आखिर हमें ऐसे दिन क्यों देखने पड़ रहे हैं?" इस पर अली ने उन्हें संभालते हुए कहा, "आप परेशान मत होइए, इंशाअल्लाह सब ठीक होगा।"
बातचीत में मां शाइस्ता परवीन, चाची जैनब और जेल में बंद दूसरे रिश्तेदारों का भी जिक्र हुआ। उमर ने अहजम को समझाया कि बार-बार जेल आने की जरूरत नहीं है। उसे घर और परिवार को संभालने पर ध्यान देने को कहा।
अबान के जनाजे में शाइस्ता की मौजूदगी का सच क्या है?
पूरे घटनाक्रम में शाइस्ता परवीन की मौजूदगी सबसे बड़ा सवाल बनी हुई है। कब्रिस्तान के दूसरी तरफ महिलाओं के खड़े होने की तस्वीरों और मौके पर हुई चर्चाओं ने इस दावे को हवा दी। लेकिन अभी तक पुलिस ने शाइस्ता की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
इसलिए फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि अबान के जनाजे के दौरान शाइस्ता को लेकर दावा जरूर हुआ, लेकिन पुलिस के मुताबिक वहां मौजूद किसी महिला की पहचान शाइस्ता के रूप में नहीं हुई। दूसरी तरफ अबान के भाइयों का मिलना, परिवार का भावुक होना और कड़ी सुरक्षा में पूरा अंतिम संस्कार होना इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा हिस्सा रहा।