भारत-रूस के बीच चलेगी सीधी ट्रेन? मॉस्को के प्लान से मची हलचल, जानें क्या होगा पूरा रूट

Time Published: Sunday, August 9, 2026, 22:11 [IST]

India Russia Direct Train: भारत और रूस के बीच अब समुद्री रास्ते के बजाय जमीन के रास्ते सीधा रेल संपर्क बनाने की चर्चा तेज हो गई है। मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और बोस्फोरस व होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम के बीच रूस ने हिंद महासागर तक रेल कनेक्टिविटी तलाशने का प्रस्ताव रखा है। रूस के उप-प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने इसके संकेत दिए हैं।

प्रस्तावित रूट तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत तक पहुंचने की बात कही गई है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो भारत-रूस व्यापार के लिए एक नया जमीनी विकल्प तैयार हो सकता है।

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रूस ने क्यों उठाया सीधी रेल कनेक्टिविटी का मुद्दा?

रूस के उप-प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने रूसी समाचार एजेंसी TASS को दिए इंटरव्यू में हिंद महासागर तक रेल लिंक की संभावनाएं तलाशने की बात कही है। उनका कहना है कि बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों को देखते हुए वैकल्पिक रास्तों की जरूरत है। ऐसे में रूस मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के जरिए भारत तक पहुंचने वाले नए रेल कॉरिडोर को एक विकल्प के तौर पर देख रहा है।

क्या होगा प्रस्तावित रेल रूट?

प्रस्तावित योजना के मुताबिक रूस से निकलने वाली मालगाड़ियां मध्य एशिया के रास्ते दक्षिण एशिया तक पहुंच सकती हैं। इसके लिए रूस-तुर्कमेनिस्तान-ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान होते हुए भारत तक रेल संपर्क बनाने का विकल्प सामने रखा गया है। रूस का कहना है कि भारत और हिंद महासागर तक पहुंच उपलब्ध कराने वाला कोई भी व्यावहारिक विकल्प उसके लिए महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, इस रूट को लेकर अभी कई तकनीकी और रणनीतिक चुनौतियां मौजूद हैं।

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समुद्री रास्तों के खतरे ने बढ़ाई चिंता

रूस के इस प्रस्ताव के पीछे समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा एक बड़ी वजह मानी जा रही है। बोस्फोरस और होर्मुज जैसे जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम हैं। मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ने के कारण इन रास्तों से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में रूस अपने व्यापार के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक जमीनी रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहा है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रस्ताव?

अगर रूस से भारत तक सीधा रेल मालवाहक नेटवर्क तैयार होता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए एक नया विकल्प खुल सकता है। इससे समुद्री मार्ग के अलावा जमीन के रास्ते भी सामान की आवाजाही संभव होगी। भारत के लिए रूस के साथ व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिहाज से यह प्रस्ताव अहम हो सकता है। साथ ही, मध्य एशिया के देशों के साथ भारत की कनेक्टिविटी को भी इससे नई दिशा मिल सकती है।

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क्या भारत-रूस के बीच सच में चलेगी ट्रेन?

फिलहाल इसे भारत-रूस के बीच शुरू होने वाली सीधी यात्री ट्रेन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। रूस की ओर से सामने आया प्रस्ताव मुख्य रूप से माल परिवहन और हिंद महासागर तक रेल संपर्क की संभावनाओं से जुड़ा है। इसके अलावा प्रस्तावित रूट में अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे देशों से होकर गुजरने की चुनौती भी है। इसलिए इसे जमीन पर उतारने के लिए कई देशों की सहमति और बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी।