झारखंड में छात्रों के आगे झुकी सरकार? तीन बड़ी परीक्षाएं रद्द होने के आसार
Aug 09, 2026 06:02 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
झारखंड सरकार छात्र आंदोलन के बाद जेपीएससी 2023, 2025 और 14वीं प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने पर विचार कर रही है। इस मामले के मद्देनजर ईडी जांच का भी प्रस्ताव है।

छात्रों का विरोध
रांची की सड़कों पर पिछले सोलह दिनों से गूंज रहा नारा अब सरकार की नींदे उड़ाने लगा है। झारखंड में परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर सड़क पर उतरे छात्रों का धैर्य सरकार की बेचैनी बढ़ा रहा है। बताया जा रहा है कि हेमंत सोरेन सरकार आज छात्रों के साथ हुई बातचीत के बाद तीन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला ले सकती है। ये तीन परीक्षाएं झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी की 2023 और 2025 की परीक्षा और साथ ही 14वीं प्रारंभिक परीक्षा हो सकती है।
यह घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है जब रांची में आंदोलन रविवार को अपने सोलहवें दिन में दाखिल हो चुका है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। एक अन्य आंदोलनकारी छात्र राहुल क्रांति भी अनशन पर हैं और फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में रखे गए हैं। कुल मिलाकर छह प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं, जिससे प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
बीते दो दिनों की बातचीत रही बेनतीजा
गौरतलब है कि इससे पहले पिछले दो दिनों की बातचीत बेनतीजा रही थी, जिसके बाद आज दोबारा सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बैठक बुलाई गई। इस बैठक में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए यह संकेत दिया कि परीक्षा गड़बड़ियों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी से कराने पर भी विचार किया जा सकता है। यानी अब मामला सिर्फ राज्य स्तर की जांच तक सीमित नहीं रह जाएगा, बल्कि केंद्रीय एजेंसी भी इसमें शामिल हो सकती है।
बारीकी से होगी जांच
एनडीटीवी की रिपोर्ट की मानें तो लखनऊ स्थित निजी परीक्षा एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी टीडीपीएल द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं की भी बारीकी से जांच की जाएगी। इसके अलावा जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी में सुधार लाने के मकसद से सरकार आईआईएम और एक्सआईएसएस जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की मदद लेने की योजना बना रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों की गुंजाइश ही न बचे। पिछले कुछ दिनों में राज्य सरकार ने अलग-अलग छात्र संगठनों के साथ कई दौर की बातचीत की है, जिसमें कांग्रेस के छात्र विंग एनएसयूआई, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी छात्र संघ शामिल रहे हैं। इसी कड़ी में आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पत्रकारों से बातचीत में एक भावुक और तीखा बयान भी दिया।
सोरेन ने कहा, "आज जब यह सरकार मजबूती से खड़ी हो रही है, तो कई लोग हैं जो इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। वे चेहरे छुपाकर, रूप बदलकर, या पर्दे के पीछे से भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। हर समस्या का हल बातचीत में है, डंडे और गोली में नहीं।" उन्होंने आगे कहा कि डंडे और गोलियां सीमाओं के लिए, दुश्मनों से निपटने के लिए होती हैं, अपने ही लोगों पर बल प्रयोग से कुछ हासिल नहीं होता। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनकी भावनाएं और चिंताएं सरकार की भी चिंता हैं, और इस संवैधानिक पद पर बैठकर वे पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय सुनिश्चित करेंगे। माना जा रहा है कि यह टिप्पणी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की तरफ इशारा थी।
बढ़ता जा रहा है जांच का दायरा
इस बीच जांच का दायरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। जेपीएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के सिलसिले में अब तक उन्नीस लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि आयोग की पूर्व अध्यक्ष एल खियांगते से 28 जुलाई के बाद से चार बार पूछताछ की जा चुकी है। ऐसे में साफ है कि झारखंड का यह छात्र आंदोलन अब सिर्फ एक परीक्षा रद्द कराने की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र में बड़े बदलाव की मांग बनकर उभर आया है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwari
शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव
