भारत क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के लिए छोटे जेट इंजनों की एक नई श्रृंखला विकसित कर रहा है, जिसमें DRDO ने 350kg क्लास के इंजन का सफल विकास किया है। ...और पढ़ें

भारत मिसाइलों और ड्रेन के लिए बना रहा इंजन की नई सीरीज।  (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

भारत मिसाइलों और ड्रेन के लिए बना रहा इंजन की नई सीरीज। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. DRDO ने 350kg क्लास का टर्बो जेट इंजन सफलतापूर्वक विकसित किया।

  2. भारत क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के लिए छोटे जेट इंजन बना रहा।

  3. डी-प्रोपल्स ने 5 kN रोटेटिंग डिटोनेशन इंजन का प्रदर्शन किया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत एक तरफ फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए जेट इंजन बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ छोटे जेट इंजन की एक सीरीज भी विकसित कर रहा है, जो क्रूज मिसाइलों और ड्रोन दोनों को पावर दे सकते हैं।

हाल ही में, DRDO के गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट ने 350kg क्लास के एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन के विकास की सफल घोषणा की है।

इस तरह के छोटे पावरप्लांट का इस्तेमाल क्रूज मिसाइलों और ड्रोन जैसे प्लेटफॉर्मों पर किया जाता है और अज जेट-पावर्ड लॉइटरिंग म्यूनिशन में भी इनका इस्तेमाल हो रहा है। इस क्लास के जेट इंजन लंबे समय से क्रूज मिसाइलों में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। मशहूर अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल में 400kg या 4 किलो-न्यूटन क्लास के जेट इंजन का इस्तेमाल होता है।

भारत की लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) में भी इसी तरह के छोटे जेट इंजन का इस्तेमाल होता है, जो 450kg क्लास का स्मॉल टर्बोफैन इंजन (STFE) है।

क्रूज मिसाइलों से लेकर जेट-पावर्ड लॉइटरिंग म्यूनिशन तक

क्रूज मिसाइलों के अलावा, जेट-पावर्ड लॉइटरिंग म्यूनिशन में भी इस तरह के पावरप्लांट का इस्तेमाल होता है। सेना ने हाल ही में 106 'अग्निवेग' जेट-पावर्ड लॉइटरिंग म्यूनिशन का ऑर्डर दिया है। इन्हें दुश्मन के इलाके में गहराई तक मौजूद टारगेट को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है और इनका सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) 5 मीटर से भी कम है।

Engines  PC D-Propulse

चूंकि यह लॉइटरिंग म्यूनिशन जेट-पावर्ड है, इसलिए यह ईरान और रूस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे शाहेद या गेरान सीरीज के ड्रोन की तुलना में कहीं ज़्यादा तेजी से उड़ सकता है और इसलिए इसे ज्यादा असरदार तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे भारत को दुश्मन के इलाके में गहराई तक मौजूद टारगेट पर हमला करने की क्षमता मिलती है।

अगला बड़ा कदम: भारत का 5 kN रोटेटिंग डिटोनेशन इंजन

निजी कंपनी D-Propulse द्वारा हाल ही में 5 kN थ्रस्ट क्लास के रोटेटिंग डिटोनेशन इंजन के सफल प्रदर्शन के साथ, भारत का प्रोपल्शन रिसर्च इकोसिस्टम अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है।

एक सर्टिफाइड टेस्ट फैसिलिटी में हासिल की गई यह कामयाबी, उन छोटे स्तर के प्रयोगों से एक बड़ा बदलाव है जो अब तक ग्लोबल RDE रिसर्च में हावी रहे हैं। कई दशकों से, दुनिया भर की लैब्स हवा से ऑक्सीजन लेने वाले उन छोटे सिस्टम से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं जो 1–2 kN रेंज में थ्रस्ट पैदा करते हैं और अक्सर ऐसा बहुत कम समय के लिए ही कर पाते हैं।

ज्यादा थ्रस्ट लेवल पर इंटीग्रेटेड एयरोस्पाइक नोजल के साथ एक स्थिर, मोड-लॉक्ड सुपरसोनिक डेटोनेशन वेव को बनाए रखने की क्षमता इंजीनियरिंग में एक बड़ी तरक्की है। यह भारत को उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल करता है जिन्होंने यह क्षमता दिखाई है।