भारत का मजबूत आर्थिक आधार और रुपए की स्थिरता एफपीआई निवेश को वापस लाने में कर रही मदद : एक्सपर्ट्स

भारत का मजबूत आर्थिक आधार और रुपए की स्थिरता एफपीआई निवेश को वापस लाने में कर रही मदद : एक्सपर्ट्स

भारत का मजबूत आर्थिक आधार और रुपए की स्थिरता एफपीआई निवेश को वापस लाने में कर रही मदद : एक्सपर्ट्स

author-image

IANS

12 Jul 2026

11:50 IST

New Update

India’s improving macros, rupee stability contribute significantly to pivot in FPI flows

(source : IANS) ( Photo Credit : IANS)

नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। सरकार की ओर से डेट निवेश के टैक्स नियमों में किए गए बदलाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही रुपए की स्थिरता भी विदेशी प्रवाह को वापस लाने में मदद कर रही है। यह जानकारी एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई।

एक्सपर्ट्स ने आगे कहा कि इन्हीं कारणों के चलते जुलाई की शुरुआत में विदेशी निवेशक खरीदार बन गए थे। एक से लेकर 10 जुलाई तक एफपीआई ने 5,155 करोड़ रुपए का निवेश किया।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, इसके अलावा, प्राइमरी मार्केट और अन्य कैटेगरी के जरिए 10,001 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है, जिससे इस दौरान कुल निवेश 15,156 करोड़ रुपए हो गया है। यह एक सकारात्मक खबर है।

भारत में एफपीआई निवेश में एक अहम ट्रेंड डेट की हिस्सेदारी का लगातार बढ़ना है।

जुलाई में अब तक, एफपीआई ने जनरल लिमिट के जरिए 3,228 करोड़ रुपए और फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) के जरिए 6,619 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत के बेहतर होते मैक्रो-इकोनॉमिक हालात और रुपए में स्थिरता ने एफपीआई निवेश के इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है।

चिप ट्रेड में कमजोरी और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में एफपीआई का बिकवाली करने से भी भारत में निवेश बढ़ा है। बाजार पर नजर रखने वालों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक हालात और खराब नहीं होते, तब तक यह ट्रेंड जारी रहने की संभावना है।

पिछले हफ्ते, पश्चिम एशिया में फिर से बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण बाजार में चार हफ्ते से चली आ रही बढ़त का सिलसिला टूट गया और बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

इस हफ्ते बाजार के मूड पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे ज्यादा असर रहा।

हाल ही में अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की खबरों के बाद ईरान और अमेरिका के बीच फिर से तनाव बढ़ गया।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा ने कहा, इस नए टकराव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें कुछ समय के लिए 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चली गईं, लेकिन हफ़्ते के अंत तक ये 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं, जिससे आयातित महंगाई और बाहरी सेक्टर के जोखिमों को लेकर कुछ चिंताएं कम हुईं।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा और बाजार में खास शेयरों में हलचल ज्यादा दिखी। बेहतर सेंटीमेंट और चुनिंदा शेयरों की खरीदारी के दम पर रियल्टी सेक्टर का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, इसके बाद आईटी और मेटल सेक्टर का नंबर रहा।

आने वाले हफ्ते में बाजार एक अहम मोड़ पर है, जहां आर्थिक आंकड़े, कंपनियों की कमाई और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार के मूड को तय करेंगे।

–आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.