UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के अवसर पर पूरे राज्य में पनीर, घी और खोया जैसे एनालॉग डेयरी उत्पादों पर पूरी तरह से रोक लगा दी. इससे पहले, अधिकारियों ने राज्य में होटलों और रेस्तरां में गलत लेबल लगाकर बेचे जाने वाले उत्पादों के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) के जरिए पाबंदियां लगाने और कार्रवाई करने का प्रस्ताव दिया था. FSSAI की गलत ब्रांडिंग से जुड़ी गाइडलाइंस के तहत उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी एनालॉग उत्पादों (जैसे वनस्पति फैट से बने पनीर, मक्खन और घी) पर इसी तरह की रोक लगाई गई है.

क्या है दूध से जुड़े उत्पादों पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट का नियम?

बता दें कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 साफ तौर पर कहता है कि दूध और दूध से बने उत्पादों को उनके असली रूप में ही बनाया और बेचा जाना चाहिए. इसके अलावा, आदेश में यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में दूध और दूध से बने उत्पादों की जांच में पता चला कि उनके सैंपल में कई तरह की चीजें मिलाकर मिलावट की गई थी.

कई जिलों में, दूध और दूध से बने उत्पादों में रिफाइंड तेल और फैट, सोयाबीन और उससे बनी चीजें, टैल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, कई तरह के न्यूट्रलाइजर और दूसरी चीजें मिलाकर मिलावट की गई थी. जिसके चलते दूध और दूध से बने उत्पाद ऐसी मिलावट के साथ बनाए जा रहे हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक है. इसलिए, इन चीजों पर रोक लगाना फूड सेफ्टी कमिश्नर की एक बड़ी जिम्मेदारी है.

#UttarPradesh : #UPFDA conducted raids at multiple dairy establishments in Ghaziabad. 868 kg paneer & 170 kg of khoya were destroyed on the spot.
The nationwide campaign of FSSAI against food adulteration continues with strict enforcement & vigilance by state FDAs.#FSSAIActionpic.twitter.com/C09l2Gondb

— FSSAI (@fssaiindia) August 14, 2026

आदेश में क्या कहा गया था?

अगर किसी डेयरी या डेयरी प्रोडक्ट बनाने या प्रोसेस करने वाली यूनिट में, या उससे जुड़ी किसी जगह पर, या संबंधित फर्म या मालिक के अधिकार वाली किसी जगह पर कोई अन्य फैट और हानिकारक केमिकल या मिलावट वाली चीजें मिलती हैं, तो उस यूनिट में मौजूद सभी दूध के प्रोडक्ट्स को जब्त करके नष्ट कर दिया जाएगा.
जन-स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' की धारा 34 के तहत इमरजेंसी रोक का आदेश जारी करके ऐसी यूनिट में निर्माण कार्य तुरंत रोक दिया जाएगा.

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

अगर जन-स्वास्थ्य के लिए हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल सुनियोजित तरीके से होता पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की जाएगी. इसके साथ ही नियम तोड़ने वाली संबंधित ब्रांड की बिक्री पर पूरे राज्य में रोक लगा दी जाएगी. 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फूड बिजनेस की लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन) रेगुलेशंस, 2011' के रेगुलेशन 2.1.8(4) के तहत ऐसी यूनिट का फूड लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा. अगर राज्य के बाहर बने दूध और दूध के प्रोडक्ट्स में हानिकारक केमिकल्स और बाहरी फैट की पुष्टि होती है, तो संबंधित ब्रांड की बिक्री पर पूरे राज्य में रोक लगा दी जाएगी.

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इन राज्यों में भी लग चुका है एनालॉग पनीर पर बैन

बता दें कि उत्तर प्रदेश से पहले मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड की सरकार भी एनालॉग पनीर, घी, खोया, क्रीम और छेना पर रोक लगा चुकी है. एनालॉग उत्पादों में असली दूध के बजाय वनस्पति तेल और हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल होता है. इनमें प्रोटीन बिल्कुल भी नहीं होता. इनके सेवन से मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है जो इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.

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