उमर अब्दुल्ला ने विकास और राज्य के दर्जे की बहाली पर दिया जोर
August 15, 2026

Omar’s insistence on restoration of statehood : श्रीनगर। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और भव्य परेड की सलामी ली। अपने संबोधन में उन्होंने शहीदों को नमन करते हुए जम्मू-कश्मीर में विकास, समृद्धि और रोजगार के नए अवसर पैदा करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटियां बहाल करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए लोकतंत्र और संघवाद को मजबूत करने पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का संकल्प एक मजबूत जम्मू-कश्मीर का निर्माण करना और विकास, समृद्धि एवं प्रगति के क्षेत्र में इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाना है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे और संवैधानिक गारंटियों की बहाली के लिए भी प्रयास जारी रहेंगे। बख्शी स्टेडियम में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों का प्रतिनिधित्व करती रहेगी, उनकी सेवा करती रहेगी और क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार उन लोगों के सपनों को पूरा करने का प्रयास करेगी, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के भविष्य और देश की आजादी के लिए बलिदान दिया। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी आकांक्षाओं को हकीकत में बदलने के लिए काम करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक गारंटियों को बहाल करने, राज्य का दर्जा वापस हासिल करने और विकास एवं प्रगति के नए दौर की शुरुआत के लिए प्रतिबद्ध है।
युवा, रोजगार और संघवाद पर उमर का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि हर गांव का हर युवा उम्मीद की किरण देख सके और उसे महसूस हो कि जम्मू-कश्मीर अनिश्चितता से निकलकर बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास, समृद्धि और रोजगार के अवसर केवल बातों से हासिल नहीं किए जा सकते, बल्कि वास्तविक परीक्षा इन वादों को धरातल पर उतारने में है। आजादी के 80 वर्षों पर विचार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर केवल उत्सव का नहीं, बल्कि उन लोगों को याद करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और आत्ममंथन करने का भी है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने लोकतंत्र और संघवाद को देश की दो सबसे बड़ी ताकत बताते हुए दोनों को संरक्षित, मजबूत और गहरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत राज्यों का संघ है और संघवाद को मजबूत करने के लिए राज्यों को मजबूत करना तथा उनके संवैधानिक अधिकारों और जिम्मेदारियों का सम्मान करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब राज्यों की शक्तियां कमजोर होती हैं या केंद्रीय एजेंसियां राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करती हैं, तो संघवाद कमजोर होता है। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य का उदाहरण देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राष्ट्रीय संस्थानों के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं उचित हैं, लेकिन राज्य संस्थानों को अपनी परीक्षाएं और दाखिला प्रक्रिया संचालित करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने केंद्र स्तर पर भर्ती और दाखिला प्रक्रियाओं में लोगों का विश्वास बहाल करने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी व्यवस्था में विश्वास खोने में कुछ ही क्षण लगते हैं, लेकिन उसे दोबारा कायम करने में वर्षों का लगातार प्रयास करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में दाखिले, भर्ती या किसी भी अन्य प्रक्रिया को पारदर्शी, योग्यता आधारित और निष्पक्ष होना चाहिए, ताकि वास्तव में योग्य उम्मीदवारों को नौकरी या सीट का उनका उचित अवसर मिल सके।
मुख्यमंत्री ने देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी और 1947 में कबायली हमलावरों और घुसपैठियों के खिलाफ लड़ने वाले जम्मू-कश्मीर के लोगों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के क्षेत्र में पहुंचने से पहले ही जम्मू-कश्मीर के लोगों ने हमलावरों का मुकाबला किया था। दिवंगत शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर का सबसे बड़ा नेता और ‘बाबा-ए-कौम’ बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र की रक्षा में जम्मू-कश्मीर के लोगों के योगदान को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर याद करते समय भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने नियंत्रण रेखा के पार की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां की मौजूदा परिस्थितियों को देखकर उनका विश्वास और मजबूत होता है कि 80 वर्ष पहले जम्मू-कश्मीर के नेताओं द्वारा लिया गया फैसला सही था।