Katra Assembly Caste Equations में ठाकुर/क्षत्रिय, यादव, मुस्लिम, अनुसूचित जाति, कश्यप, कुर्मी और दूसरे पिछड़े समुदाय 2027 की चुनावी लड़ाई की प्रमुख सामाजिक धुरियां हैं। शाहजहांपुर जिले की विधानसभा संख्या 131 कटरा में 2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार 2,94,311 मतदाता हैं। इनमें 1,66,795 पुरुष, 1,27,507 महिला और 9 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। मौजूदा विधायक भाजपा के डॉ. वीर विक्रम सिंह ‘प्रिंस’ हैं, जिन्होंने 2022 में सपा के राजेश यादव को सिर्फ 357 वोट से हराया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा कटरा विधानसभा खंड से आगे रही, लेकिन बढ़त केवल 6,384 वोट रही।

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।

उत्तर प्रदेश एसआईआर (SIR) की अंतिम सूची 2026 के तहत राज्य के सभी 75 जिलों में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुल मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

शाहजहांपुर जिले के कटरा विधानसभा के 2007  से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।

कटरा सामान्य यानी अनारक्षित विधानसभा सीट है और शाहजहांपुर अनुसूचित जाति आरक्षित लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। वर्तमान स्वरूप वाली कटरा विधानसभा 2008 के परिसीमन के बाद बनी और यहां पहला चुनाव 2012 में हुआ। विधानसभा का बड़ा हिस्सा ग्रामीण है—2011 आधारित जनसांख्यिकीय प्रोफाइल में करीब 90.14 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और 9.86 प्रतिशत शहरी बताई गई है।

कटरा विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभाकटरा
विधानसभा संख्या131
जिलाशाहजहांपुर
लोकसभा क्षेत्रशाहजहांपुर (SC)
आरक्षण स्थितिसामान्य
वर्तमान विधायकडॉ. वीर विक्रम सिंह ‘प्रिंस’
पार्टीभाजपा
2026 कुल मतदाता2,94,311
पुरुष मतदाता1,66,795
महिला मतदाता1,27,507
थर्ड जेंडर9
SIR से पहले मतदाता3,52,581
SIR नेट कमी58,270
SIR कमी16.53%
2022 विजेतावीर विक्रम सिंह, BJP
2022 उपविजेताराजेश यादव, SP
2022 जीत का अंतर357 वोट
2024 लोकसभा खंड में BJP वोट86,225
2024 लोकसभा खंड में SP वोट79,841
2024 BJP बढ़त6,384 वोट
अनुसूचित जाति सामाजिक हिस्साकरीब 17.83%
ग्रामीण आबादीकरीब 90.14%
शहरी आबादीकरीब 9.86%
प्रमुख सामाजिक समूहठाकुर, यादव, मुस्लिम, SC, कश्यप, कुर्मी, ब्राह्मण व अन्य OBC

2026 की अंतिम मतदाता सूची में कटरा के कुल 2,94,311 मतदाता शाहजहांपुर जिले के 19,00,961 मतदाताओं का हिस्सा हैं। कटरा में SIR से पहले 3,52,581 मतदाता थे। अंतिम प्रकाशन के बाद संख्या 58,270 घटकर 2,94,311 रह गई। यह करीब 16.53 प्रतिशत की नेट कमी है।

Katra Assembly Caste Equations की राजनीतिक पहचान लंबे समय से ठाकुर और यादव नेतृत्व के बीच प्रतिस्पर्धा से जुड़ी रही है। पुराने चुनावी विश्लेषण में भी इस सीट पर दोनों समुदायों के राजनीतिक प्रभाव को प्रमुख माना गया है। मुस्लिम मतदाता, अनुसूचित जातियां और कश्यप-कुर्मी समेत दूसरे OBC समूह इस मुख्य प्रतिस्पर्धा के बीच निर्णायक संतुलन तैयार करते हैं।

अनुसूचित जाति की आबादी का हिस्सा करीब 17.83 प्रतिशत है। वहीं एक पुराने चुनावी आकलन में करीब एक लाख पिछड़ा वर्ग, 60 हजार मुस्लिम, 50 हजार सवर्ण और करीब 40 हजार दलित मतदाताओं का मोटा अनुमान दिया गया था। यह पुराने मतदाता आधार पर तैयार चुनावी अनुमान था, इसलिए इसे 2026 की वर्तमान जाति-वार वोटर संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

निर्वाचन आयोग विधानसभा मतदाता सूची को जाति के आधार पर प्रकाशित नहीं करता। इसलिए 2027 के लिए किसी भी जाति की निश्चित मतदाता संख्या बताने के बजाय सामाजिक प्रभाव, पुराने चुनाव परिणाम और 2026 की नई वोटर लिस्ट को साथ रखकर देखना ज्यादा तथ्यात्मक होगा।

कटरा विधानसभा का संकेतात्मक जातीय-सामाजिक समीकरण

जाति/समुदायसंकेतात्मक स्थिति2027 में चुनावी महत्व
ठाकुर/क्षत्रियलंबे समय से प्रभावशाली सामाजिक-राजनीतिक समूहBJP समेत सभी दलों के टिकट और रणनीति में अहम
यादवबड़ा और संगठित OBC समूहSP की प्रमुख सामाजिक ताकत
मुस्लिमपुराने अनुमान में करीब 60 हजारSP समेत विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण
अनुसूचित जातिकरीब 17.83% सामाजिक हिस्साBJP-SP-BSP तीनों की नजर
कश्यपमहत्वपूर्ण गैर-यादव OBCBSP के पुराने प्रदर्शन से राजनीतिक महत्व स्पष्ट
कुर्मीकई इलाकों में प्रभावBJP-SP के बीच स्विंग वोट
ब्राह्मणमहत्वपूर्ण सवर्ण समूहव्यापक सवर्ण गठजोड़ में भूमिका
राठौर/तेली/पाल/गुर्जर/अन्य OBCगांववार प्रभावकरीबी चुनाव में निर्णायक
2026 कुल मतदाता2,94,311

जाति-वार संख्या संकेतात्मक है। वर्तमान 2026 मतदाता सूची का आधिकारिक कुल 2,94,311 है।

ठाकुर वोट कटरा की राजनीति की सबसे मजबूत धुरियों में

कटरा की राजनीति में ठाकुर/क्षत्रिय नेतृत्व लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। वर्तमान भाजपा विधायक डॉ. वीर विक्रम सिंह ‘प्रिंस’ 2017 और 2022 में लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं। 2017 में उन्हें 76,509 वोट मिले और उन्होंने सपा के राजेश यादव को 16,730 वोट से हराया। 2022 में उन्हें 77,800 वोट मिले, लेकिन जीत का अंतर सिकुड़कर सिर्फ 357 वोट रह गया।

इस राजनीतिक इतिहास का अर्थ यह नहीं है कि पूरे ठाकुर समाज का वोट किसी एक प्रत्याशी या पार्टी को जाता है। 2022 में कांग्रेस उम्मीदवार मुन्ना सिंह को 17,504 वोट मिले थे। इतने करीबी BJP-SP मुकाबले में तीसरे प्रत्याशी को मिले हजारों वोटों ने सामाजिक समीकरण को और जटिल बनाया।

2027 में भाजपा के लिए ठाकुर आधार को संगठित रखना जरूरी होगा। यदि किसी दूसरे दल से प्रभावशाली क्षत्रिय उम्मीदवार मैदान में आता है या वोट में महत्वपूर्ण विभाजन होता है तो 2022 के सिर्फ 357 वोट के अंतर वाली सीट पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

यादव वोट SP की सबसे मजबूत सामाजिक ताकत

कटरा में यादव राजनीति का सबसे प्रमुख चेहरा सपा के राजेश यादव रहे हैं। मौजूदा कटरा विधानसभा का पहला चुनाव 2012 में उन्होंने जीता था। उस चुनाव में उन्हें 51,025 वोट मिले और बसपा के राजीव कश्यप को 50,150 वोट। जीत सिर्फ 875 वोट की रही।

2017 में राजेश यादव फिर सपा प्रत्याशी रहे और 59,779 वोट मिले। भाजपा उनसे 16,730 मत आगे रही। 2022 में सपा का वोट बढ़कर 77,443 पहुंच गया और राजेश यादव सिर्फ 357 वोट से पीछे रह गए।

यह तीन चुनावों का ट्रेंड बताता है कि यादव आधार के साथ सपा ने मुस्लिम और दूसरे सामाजिक समूहों में समर्थन जोड़कर सीट को भाजपा के खिलाफ लगभग बराबरी तक पहुंचा दिया है।

2027 में भी SP के लिए यादव वोट का अधिकतम एकीकरण शुरुआती जरूरत होगी, लेकिन अकेले यादव आधार पर्याप्त नहीं होगा। मुस्लिम, अनुसूचित जाति, कश्यप-कुर्मी और दूसरे गैर-यादव OBC में अतिरिक्त समर्थन ही सीट जीतने का रास्ता खोल सकता है।

मुस्लिम मतदाता 2027 में फिर निर्णायक

कटरा को पुराने राजनीतिक विश्लेषण में ठाकुर और मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों में भी रखा गया है। पुराने सीटवार अनुमान में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 60 हजार बताई गई थी। 2026 की नई मतदाता सूची के बाद यह संख्या वर्तमान आधिकारिक आंकड़ा नहीं मानी जा सकती, लेकिन समुदाय की राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

सपा के लिए यादव-मुस्लिम सामाजिक गठजोड़ चुनावी आधार की महत्वपूर्ण धुरी रहा है। 2022 में मुख्य मुकाबला BJP-SP में केंद्रित होने और सपा के 77 हजार से अधिक वोट तक पहुंचने में व्यापक विपक्षी ध्रुवीकरण की भूमिका दिखाई देती है।

फिर भी मुस्लिम मतदाताओं को एक समान राजनीतिक समूह मानना उचित नहीं होगा। उम्मीदवार, स्थानीय संबंध, BSP या कांग्रेस की ताकत और बूथवार सामाजिक संरचना उनके मतदान को प्रभावित कर सकती है।

2027 में मुस्लिम वोट का अधिकतम एकजुट होना सपा के लिए लाभकारी हो सकता है, जबकि इस वोट में बड़ा बंटवारा भाजपा के लिए राहत का कारण बन सकता है।

अनुसूचित जाति करीब 17.83 प्रतिशत, तीसरी बड़ी चुनावी शक्ति

कटरा विधानसभा की जनसांख्यिकीय प्रोफाइल में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 17.83 प्रतिशत है। लगभग हर छह में एक व्यक्ति के आसपास का यह सामाजिक आधार किसी भी पार्टी के लिए नजरअंदाज करने योग्य नहीं है।

2012 और 2017 के चुनावों में बसपा का मजबूत प्रदर्शन बताता है कि SC आधार के साथ दूसरे समुदायों को जोड़कर तीसरा राजनीतिक विकल्प यहां गंभीर चुनौती बन सकता है।

2012 में BSP को 50,150 और 2017 में 47,471 वोट मिले थे। 2022 में पार्टी का वोट घटकर 15,236 रह गया।

इन सभी वोटों को दलित वोट कहना सही नहीं होगा, क्योंकि प्रत्याशी की जातीय पृष्ठभूमि और दूसरे समुदायों का समर्थन भी इनमें शामिल रहा होगा। फिर भी BSP के कमजोर होने के बाद अनुसूचित जाति मतों का BJP और SP के बीच बंटवारा सीट के सबसे अहम सवालों में शामिल हो गया है।

कश्यप वोट ने BSP को दो चुनावों में मुकाबले के केंद्र में रखा

कटरा में कश्यप समुदाय का चुनावी महत्व 2012 और 2017 के परिणामों से भी समझा जा सकता है। 2012 में बसपा के राजीव कश्यप 50,150 वोट लेकर सिर्फ 875 वोट से चुनाव हारे। 2017 में भी BSP प्रत्याशी को 47,471 वोट मिले।

यह कहना सही नहीं होगा कि उम्मीदवार को मिले सभी वोट कश्यप समुदाय के ही थे। इसके बावजूद इतने बड़े वोट आधार ने प्रभावशाली कश्यप नेतृत्व और गैर-यादव OBC राजनीति की क्षमता को जरूर दिखाया।

2022 में बसपा के राजेश कश्यप को 15,236 वोट मिले। यह संख्या BJP की जीत के सिर्फ 357 वोट के अंतर से करीब 43 गुना थी।

इसलिए 2027 में BSP का कश्यप या किसी अन्य प्रभावशाली OBC चेहरे पर दांव मुख्य BJP-SP मुकाबले को सीधे प्रभावित कर सकता है।

कुर्मी, ब्राह्मण और दूसरे OBC छोटे नहीं, करीबी सीट पर बेहद अहम

कटरा में कुर्मी मतदाता कई इलाकों में महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ ब्राह्मण, पाल, राठौर, तेली, गुर्जर, वैश्य और अन्य OBC-सवर्ण समूहों की गांववार मौजूदगी चुनाव का संतुलन बदल सकती है। उपलब्ध सामाजिक प्रोफाइल भी कुर्मी और ब्राह्मण समुदाय की उल्लेखनीय मौजूदगी की ओर संकेत करता है।

जब विधानसभा चुनाव का अंतर केवल 357 वोट हो, तब 5 या 10 हजार मतदाताओं वाले सामाजिक समूह में भी कुछ प्रतिशत का बदलाव निर्णायक हो सकता है।

भाजपा की रणनीति इन गैर-यादव OBC और सवर्ण समूहों को ठाकुर आधार के साथ जोड़ने की होगी। सपा इनके बीच सेंध लगाकर यादव-मुस्लिम गठजोड़ का विस्तार करना चाहेगी।

कटरा वोटर लिस्ट 2026: कुल 2,94,311 मतदाता

10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार कटरा विधानसभा में 2,94,311 मतदाता हैं। इनमें 1,66,795 पुरुष, 1,27,507 महिला और 9 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

कटरा विधानसभा वोटर लिस्ट 2026

मतदाता वर्गसंख्या
पुरुष1,66,795
महिला1,27,507
थर्ड जेंडर9
कुल मतदाता2,94,311

कटरा में पुरुष और महिला मतदाताओं के बीच 39,288 का अंतर है। फिर भी 1.27 लाख से अधिक महिला मतदाता अपने आप में किसी भी जातिगत ब्लॉक से बड़ा चुनावी वर्ग हैं।

महिला मतदाताओं के लिए राशन, आवास, स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, सड़क, बिजली और घरेलू अर्थव्यवस्था जैसे विषय जातीय पहचान के समानांतर मतदान व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

2026 SIR में कटरा के 58,270 मतदाता घटे

SIR से पहले कटरा विधानसभा में कुल 3,52,581 मतदाता थे। 2026 की अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 2,94,311 रह गई। इस तरह कुल 58,270 की नेट कमी, यानी करीब 16.53 प्रतिशत, दर्ज हुई।

विवरणमतदाता
SIR से पहले3,52,581
2026 अंतिम सूची2,94,311
नेट कमी58,270
कमी प्रतिशत16.53%

इस बदलाव को किसी जाति, धर्म या पार्टी के मतदाताओं से जोड़ने का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

इसका वास्तविक चुनावी असर बूथ स्तर पर पड़ेगा। 2022 में जिस गांव या बूथ को किसी पार्टी ने अपना मजबूत केंद्र माना था, उसकी मतदाता संख्या 2026 में बदल चुकी हो सकती है।

2012 से 2026 तक कैसे बदला मतदाता आधार?

वर्तमान कटरा विधानसभा का पहला चुनाव 2012 में हुआ था और उस समय करीब 2,92,322 मतदाता दर्ज थे। 2024 के मतदाता आधार में यह संख्या बढ़कर करीब 3.55 लाख तक पहुंच गई थी। 2026 की अंतिम सूची में संख्या फिर घटकर 2,94,311 रह गई।

वर्षकुल मतदाता
20122,92,322
2024 लोकसभाकरीब 3,55,337
SIR से पहले3,52,581
2026 अंतिम सूची2,94,311

2012 और 2026 की कुल संख्या लगभग समान दिखती है, लेकिन इसका मतलब वही मतदाता या वही सामाजिक संरचना होना नहीं है। चौदह वर्षों में नई पीढ़ी के मतदाता जुड़े, मृत्यु और स्थानांतरण हुए तथा निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता आधार की आंतरिक संरचना बदली है।

2022 में BJP सिर्फ 357 वोट से बचा पाई कटरा सीट

2022 का कटरा विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश की सबसे करीबी चुनावी लड़ाइयों में शामिल रहा। भाजपा के वीर विक्रम सिंह को 77,800 वोट, जबकि सपा के राजेश यादव को 77,443 वोट मिले। भाजपा सिर्फ 357 वोट से जीत सकी। दोनों प्रमुख प्रत्याशियों के वोट शेयर में अंतर महज करीब 0.18 प्रतिशत अंक था।

कटरा विधानसभा चुनाव 2022

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट शेयर
वीर विक्रम सिंहBJP77,80039.90%
राजेश यादवSP77,44339.72%
मुन्ना सिंहकांग्रेस17,5048.98%
राजेश कश्यपBSP15,2367.81%
राजवीरअन्य2,8431.46%
BJP की जीत357 वोट

2022 में BJP और SP को मिलाकर 79.62 प्रतिशत वोट मिले। दोनों में से कोई भी 40 प्रतिशत के पार साफ तौर पर नहीं पहुंच सका। कांग्रेस और BSP के संयुक्त वोट 32 हजार से अधिक थे, जबकि जीत का अंतर सिर्फ 357 था।

इसलिए कटरा में तीसरे और चौथे दल को मिलने वाला वोट मामूली नहीं है। उनका उम्मीदवार मुख्य मुकाबले के सामाजिक गठजोड़ को सीधे प्रभावित कर सकता है।

2017 में BJP ने 16,730 वोट से जीती थी सीट

2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा के वीर विक्रम सिंह ‘प्रिंस’ को 76,509 वोट मिले। समाजवादी पार्टी के राजेश यादव को 59,779 और बसपा को 47,471 वोट मिले। भाजपा ने 16,730 वोट से सीट जीती।

कटरा विधानसभा चुनाव 2017

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट शेयर
वीर विक्रम सिंह ‘प्रिंस’BJP76,509करीब 39.65%
राजेश यादवSP59,779करीब 30.98%
राजीव कश्यपBSP47,471करीब 24.60%
BJP की जीत16,730 वोट

2017 में बसपा का 47 हजार से अधिक वोट चुनाव को त्रिकोणीय बनाए हुए था। पांच साल बाद BSP का वोट 15 हजार के आसपास रह गया, जबकि सपा 77 हजार से ऊपर पहुंच गई।

यह बदलाव 2022 में BJP की 16,730 वाली बढ़त को सिर्फ 357 वोट तक लाने वाले प्रमुख चुनावी परिवर्तनों में से एक था, हालांकि इसे केवल BSP से SP की सीधी वोट ट्रांसफर प्रक्रिया नहीं माना जा सकता।

2012 में SP सिर्फ 875 वोट से जीती थी पहला कटरा चुनाव

वर्तमान कटरा विधानसभा का पहला चुनाव 2012 में हुआ। सपा के राजेश यादव को 51,025 वोट, बसपा के राजीव कश्यप को 50,150 वोट, कांग्रेस के वीरेंद्र प्रताप सिंह मुन्ना को 31,400 वोट और भाजपा को 16,662 वोट मिले। सपा की जीत का अंतर सिर्फ 875 वोट था।

कटरा विधानसभा चुनाव 2012

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट शेयर
राजेश यादवSP51,025करीब 27.52%
राजीव कश्यपBSP50,150करीब 27.05%
वीरेंद्र प्रताप सिंह मुन्नाकांग्रेस31,400करीब 16.94%
सुधीर सिंहBJP16,662करीब 8.99%
भानु प्रताप सिंहअन्य12,637करीब 6.82%
SP की जीत875 वोट

2012 में BJP सिर्फ चौथे स्थान पर थी। पांच वर्ष में उसका वोट 16,662 से बढ़कर 76,509 हो गया और पार्टी ने सीट जीत ली।

यह तेजी से हुआ राजनीतिक बदलाव बताता है कि कटरा में किसी दल का सामाजिक आधार स्थायी नहीं है।

2007 का कटरा चुनाव वर्तमान सीट से सीधे तुलनीय क्यों नहीं?

वर्तमान कटरा विधानसभा 2008 के परिसीमन के बाद गठित हुई और यहां पहला चुनाव 2012 में हुआ। इससे पहले क्षेत्र पुराने तिलहर और अन्य विधानसभा क्षेत्रों के अलग-अलग हिस्सों में शामिल था। इसलिए 2007 के किसी पुराने परिणाम को मौजूदा कटरा विधानसभा के 2012, 2017 और 2022 परिणामों के साथ सीधे जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

यही कारण है कि मौजूदा कटरा सीट के चुनावी इतिहास की सही तुलनात्मक शुरुआत 2012 से होती है।

कटरा विधानसभा चुनाव 2012-2022 का तुलनात्मक इतिहास

वर्षविजेतापार्टीवोटउपविजेताजीत का अंतर
2012राजेश यादवSP51,025राजीव कश्यप, BSP875
2017वीर विक्रम सिंहBJP76,509राजेश यादव, SP16,730
2022वीर विक्रम सिंहBJP77,800राजेश यादव, SP357

मौजूदा सीट के तीन चुनावों में सपा ने एक और भाजपा ने दो चुनाव जीते हैं। भाजपा ने 2017 के बाद 2022 में लगातार दूसरी जीत दर्ज की, लेकिन उसका मार्जिन 16,730 से घटकर सिर्फ 357 रह गया।

दूसरी ओर राजेश यादव तीनों विधानसभा चुनावों में मुख्य राजनीतिक चेहरे रहे—2012 में विजेता और 2017 तथा 2022 में उपविजेता। इससे BJP और SP दोनों के मजबूत स्थानीय नेतृत्व की तस्वीर बनती है।

2024 लोकसभा चुनाव में भी BJP आगे, लेकिन बढ़त सिर्फ 6,384 वोट

2024 के लोकसभा चुनाव में कटरा विधानसभा खंड से भाजपा को 86,225 वोट, जबकि समाजवादी पार्टी को 79,841 वोट मिले। भाजपा ने 6,384 वोट की बढ़त बनाई।

कटरा विधानसभा खंड: लोकसभा चुनाव 2024

पार्टीवोटवोट शेयर
BJP86,22546.57%
SP79,84143.12%
BJP की बढ़त6,384करीब 3.45 अंक

पूरे शाहजहांपुर संसदीय क्षेत्र में भी भाजपा जीती। कटरा विधानसभा खंड ने भाजपा को बढ़त दी, लेकिन इस सीट पर अंतर पूरे संसदीय क्षेत्र की तुलना में काफी सीमित रहा।

2022 विधानसभा में BJP सिर्फ 357 वोट आगे थी और 2024 लोकसभा चुनाव में बढ़त 6,384 रही। दोनों चुनाव अलग प्रकृति के हैं, लेकिन दोनों परिणाम कटरा को BJP-SP की अत्यधिक प्रतिस्पर्धी सीट बनाए रखते हैं।

2019 से 2024 में BJP की लोकसभा बढ़त 31 हजार से ज्यादा घटी

2019 लोकसभा चुनाव में कटरा विधानसभा खंड से भाजपा को 1,02,985 वोट, जबकि प्रमुख विपक्षी प्रत्याशी को 65,109 वोट मिले थे। भाजपा की बढ़त 37,876 वोट थी।

2024 में BJP की बढ़त सिर्फ 6,384 रह गई। यानी दोनों लोकसभा चुनावों के विधानसभा-खंड मार्जिन की तुलना में करीब 31,492 वोट की कमी आई।

लोकसभा चुनावBJP की कटरा खंड बढ़त
201937,876
20246,384
अंतर-31,492

2019 और 2024 में विपक्षी गठबंधन, उम्मीदवार और राजनीतिक परिस्थितियां अलग थीं, इसलिए इसे सीधा विधानसभा स्विंग नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी भाजपा की बढ़त में आया इतना बड़ा अंतर 2027 से पहले विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।

BSP का वोट 47 हजार से घटकर 15 हजार, लेकिन भूमिका अब भी बड़ी

कटरा में BSP के प्रदर्शन का ट्रेंड बेहद महत्वपूर्ण है।

चुनावBSP वोट
201250,150
201747,471
202215,236

2017 से 2022 के बीच बसपा के वोट में 32,235 की गिरावट हुई।

इसके बावजूद 2022 में BSP के 15,236 वोट भाजपा की जीत के 357 वोट के अंतर से कई गुना ज्यादा थे।

यदि 2027 में बसपा अपने पुराने 40-50 हजार वाले स्तर की ओर लौटती है तो मुकाबला फिर त्रिकोणीय हो सकता है। यदि वह 2022 की तरह कमजोर रहती है तो BJP-SP के बीच ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है।

बसपा किस सामाजिक पृष्ठभूमि का उम्मीदवार उतारती है, यह भी अहम होगा। कश्यप/OBC उम्मीदवार BJP-SP दोनों के गैर-यादव OBC गणित को प्रभावित कर सकता है, जबकि मुस्लिम या प्रभावशाली दलित उम्मीदवार विपक्षी वोटों की दिशा बदल सकता है।

कांग्रेस का वोट भी 2022 के परिणाम में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

2022 में कांग्रेस के मुन्ना सिंह को 17,504 वोट मिले थे। यह संख्या BJP की जीत के अंतर से करीब 49 गुना थी।

2012 में भी कांग्रेस उम्मीदवार ने 31,400 वोट हासिल किए थे। इससे पता चलता है कि कटरा में मजबूत स्थानीय उम्मीदवार किसी कमजोर संगठन वाले दल के टिकट पर भी चुनावी गणित प्रभावित कर सकता है।

2027 में तीसरे या चौथे प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ इसलिए खास तौर पर महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि BJP-SP के बीच पिछले विधानसभा चुनाव में अंतर सिर्फ 357 था।

90 प्रतिशत ग्रामीण कटरा में जाति के साथ किसान भी बड़ा फैक्टर

कटरा विधानसभा की लगभग 90.14 प्रतिशत आबादी ग्रामीण है। सिर्फ करीब 9.86 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है। इसलिए यहां जातीय समीकरण के साथ कृषि और गांव से जुड़े मुद्दे राजनीतिक व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

खेती-किसानी, सिंचाई, बिजली, खाद-बीज, फसल का भाव, ग्रामीण सड़क, आवारा पशु, स्वास्थ्य सुविधा, स्कूल-कॉलेज और स्थानीय रोजगार जैसे विषय अलग-अलग जातियों के मतदाताओं को समान रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

कटरा, खुदागंज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क तथा जिला मुख्यालय से कनेक्टिविटी भी स्थानीय विकास के राजनीतिक मूल्यांकन का हिस्सा रहेगी।

महिला मतदाता 1.27 लाख, जातीय समीकरण से अलग बड़ा वर्ग

2026 की अंतिम सूची में कटरा में 1,27,507 महिला मतदाता हैं। यह संख्या विधानसभा के किसी एक संकेतात्मक जातीय समूह से कहीं बड़ी है।

महिला मतदाता ठाकुर, यादव, मुस्लिम, दलित, कश्यप या किसी दूसरे समुदाय का हिस्सा होने के साथ एक स्वतंत्र चुनावी श्रेणी भी बनाती हैं।

राशन, आवास, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, घरेलू आय और महंगाई जैसे मुद्दे महिला वोट में जातीय सीमाओं से अलग बदलाव ला सकते हैं।

2027 में भाजपा अपनी लाभार्थी राजनीति के जरिए महिला समर्थन को बनाए रखने की कोशिश करेगी, जबकि सपा और दूसरे विपक्षी दल घरेलू अर्थव्यवस्था और स्थानीय सुविधाओं को चुनावी मुद्दा बना सकते हैं।

BJP का 2027 का संभावित सामाजिक फॉर्मूला

कटरा में भाजपा का संभावित सामाजिक फॉर्मूला इस तरह देखा जा सकता है—

ठाकुर/क्षत्रिय + गैर-यादव OBC + SC का हिस्सा + ब्राह्मण-सवर्ण + महिला लाभार्थी वोट + यादव-मुस्लिम में सीमित सेंध

भाजपा के पक्ष में सबसे बड़ा तथ्य लगातार दो विधानसभा जीत हैं। मौजूदा विधायक ने 2017 और 2022 दोनों चुनाव जीते हैं और 2024 लोकसभा चुनाव में भी कटरा खंड से BJP आगे रही।

लेकिन पार्टी के लिए चुनौती बहुत साफ है—2017 की 16,730 वोट की जीत 2022 में सिर्फ 357 वोट रह गई।

2019 के लोकसभा चुनाव की 37,876 वोट वाली बढ़त भी 2024 में सिर्फ 6,384 रह गई।

इसलिए भाजपा के लिए सीट को सुरक्षित मानना जोखिमपूर्ण होगा। उसे ठाकुर आधार के साथ कश्यप, कुर्मी, अन्य OBC, अनुसूचित जाति और महिला वोट में अपनी पकड़ बनाए रखनी होगी।

SP के लिए यादव-मुस्लिम के साथ दलित और गैर-यादव OBC जरूरी

समाजवादी पार्टी का संभावित 2027 सामाजिक फॉर्मूला हो सकता है—

यादव + मुस्लिम + SC का हिस्सा + कश्यप-कुर्मी/दूसरे OBC में सेंध + सवर्णों का सीमित हिस्सा

SP इस सीट की पहली विजेता पार्टी है। 2012 में राजेश यादव जीते और 2022 में पार्टी केवल 357 वोट से पीछे रह गई।

यादव और मुस्लिम मतदाता पार्टी को मजबूत शुरुआती आधार देते हैं, लेकिन 2022 का परिणाम यह भी बताता है कि सिर्फ पारंपरिक गठजोड़ पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।

सपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण इलाका अनुसूचित जाति और गैर-यादव OBC मतदाता होंगे। BSP के कमजोर होने पर यदि पार्टी कश्यप, कुर्मी और दलित मतों में ज्यादा हिस्सा जोड़ती है तो 357 वोट का पुराना अंतर पलटना संभव है।

2026 की नई वोटर लिस्ट सबसे बड़ा नया चुनावी डेटा

2027 के लिए कटरा में तीन आंकड़े खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं—

चुनावी डेटासंख्या
2022 BJP जीत357
2024 BJP लोकसभा बढ़त6,384
2026 SIR नेट कमी58,270

मतदाता सूची में हुई नेट कमी 2022 के जीत के अंतर से 160 गुना से भी ज्यादा है।

इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि 58 हजार कम हुए मतदाता किसी एक दल या सामाजिक समूह के थे।

लेकिन बूथ प्रबंधन की दृष्टि से यह बदलाव बहुत बड़ा है। पुराने मतदाता आंकड़ों के आधार पर तैयार जाति-वार राजनीतिक नक्शा अब पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना जा सकता।

2027 में सबसे मजबूत संगठन वही होगा जो 2,94,311 मतदाताओं वाली अंतिम सूची के आधार पर बूथ-दर-बूथ अपना नया चुनावी आकलन तैयार करेगा।

2027 में किन सामाजिक समूहों पर सबसे ज्यादा नजर?

सबसे पहला सवाल ठाकुर/क्षत्रिय वोट का है। मौजूदा विधायक इसी सामाजिक राजनीति के प्रमुख चेहरों में हैं और भाजपा पिछले दो चुनाव जीत चुकी है।

दूसरा, यादव मतदाता। मौजूदा कटरा सीट के तीनों चुनावों में सपा की राजनीति के केंद्र में राजेश यादव रहे हैं और 2022 में पार्टी सिर्फ 357 वोट से हारी।

तीसरा, मुस्लिम मतदाता। पुराने चुनावी अनुमान उन्हें बड़ा सामाजिक ब्लॉक बताते हैं और उनका सपा के यादव आधार के साथ जुड़ना मुकाबले को करीबी बना सकता है।

चौथा, अनुसूचित जाति मतदाता। करीब 17.83 प्रतिशत सामाजिक हिस्सेदारी BJP, SP और BSP तीनों के लिए महत्वपूर्ण है।

पांचवां, कश्यप मतदाता। 2012 और 2017 में मजबूत कश्यप नेतृत्व के साथ BSP का प्रदर्शन इस समुदाय और व्यापक गैर-यादव OBC राजनीति का महत्व दिखाता है।

छठा, कुर्मी और दूसरे OBC समूह। 357 वोट वाली सीट पर छोटे सामाजिक स्विंग का भी परिणाम पर बड़ा असर पड़ सकता है।

सातवां, BSP और कांग्रेस के उम्मीदवार। 2022 में दोनों दलों को मिलाकर 32 हजार से अधिक वोट मिले थे। मुख्य मुकाबले की दिशा उनके प्रत्याशियों की सामाजिक पृष्ठभूमि से प्रभावित हो सकती है।

कटरा विधानसभा चुनाव 2027 का जातीय गणित क्या संकेत देता है?

कटरा के मौजूदा चुनावी इतिहास और नई मतदाता सूची को एक साथ रखें तो राजनीतिक तस्वीर बेहद प्रतिस्पर्धी है।

चुनावी संकेतस्थिति
2007 विधानसभावर्तमान कटरा सीट अस्तित्व में नहीं थी
2012 विधानसभाSP +875
2017 विधानसभाBJP +16,730
2022 विधानसभाBJP +357
2019 लोकसभा खंडBJP +37,876
2024 लोकसभा खंडBJP +6,384
2012 मतदाता2,92,322
SIR पूर्व मतदाता3,52,581
2026 मतदाता2,94,311
SIR नेट कमी58,270

मौजूदा विधानसभा इतिहास में भाजपा और सपा दोनों के पास मजबूत राजनीतिक आधार है। सपा ने 2012 में पहला चुनाव जीता, जबकि भाजपा ने 2017 और 2022 में लगातार दो जीत हासिल कीं।

लेकिन Katra Assembly Caste Equations में भाजपा की लगातार दो जीत सीट को सुरक्षित नहीं बनाती। 2022 में उसकी जीत सिर्फ 357 वोट की थी। 2024 लोकसभा चुनाव में भी पार्टी आगे रही, लेकिन 2019 के मुकाबले उसकी विधानसभा-खंड बढ़त काफी कम हो गई।

भाजपा के लिए सबसे मजबूत रास्ता ठाकुर मतदाताओं के साथ गैर-यादव OBC, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण और महिला लाभार्थी वोट का व्यापक गठजोड़ बनाए रखने का है।

सपा के लिए यादव और मुस्लिम आधार सबसे मजबूत शुरुआती धुरी है। लेकिन 2027 में सीट जीतने के लिए उसे अनुसूचित जाति, कश्यप, कुर्मी और दूसरे गैर-यादव OBC समुदायों में अतिरिक्त समर्थन हासिल करना होगा।

बसपा की भूमिका भी यहां सामान्य तीसरी पार्टी जैसी नहीं है। पार्टी 2012 में सिर्फ 875 वोट से पीछे थी और 2017 में भी 47 हजार से अधिक वोट ले चुकी है। यदि वह मजबूत सामाजिक उम्मीदवार के साथ वापस आती है तो BJP-SP की सीधी लड़ाई फिर त्रिकोणीय हो सकती है।

सबसे बड़ा नया फैक्टर 2026 की 2,94,311 मतदाताओं वाली अंतिम सूची है। 58,270 की नेट कमी के बाद 2022 के पुराने जाति-वार आंकड़ों या बूथ अनुमानों को सीधे 2027 में इस्तेमाल करना सही नहीं होगा।

करीब 90 प्रतिशत ग्रामीण सामाजिक संरचना के कारण किसान, सिंचाई, खाद-बीज, बिजली, ग्रामीण सड़क, आवारा पशु, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्थानीय रोजगार और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे जातीय गणित के समानांतर चुनाव को प्रभावित करेंगे।

यानी कटरा विधानसभा चुनाव 2027 को केवल ठाकुर बनाम यादव या BJP बनाम SP की सीधी लड़ाई के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। असली फैसला ठाकुर मतों की दिशा, यादव वोट की एकजुटता, मुस्लिम समर्थन, अनुसूचित जाति वोट का बंटवारा, कश्यप-कुर्मी और दूसरे OBC समुदायों का रुख, BSP और कांग्रेस उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि, महिला मतदाताओं की प्राथमिकता और 2026 की नई मतदाता सूची के बूथवार बदलाव मिलकर करेंगे।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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