चीनी पर सरकार लेने वाली है यह फैसला, त्योहारी सीजन में बढ़ेगी मिठास!

Aug 18, 2026 05:35 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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मुख्य बातें

  • बता दें कि देश आमतौर पर घरेलू खपत के लिए चीनी का आयात नहीं करता है
  • पिछली बार बड़ी मात्रा में आयात 2017-18 में किया गया था
त्योहारी सीजन में चीनी की रहेगी डिमांड

त्योहारी सीजन में बढ़ती है चीनी की डिमांड

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और आगामी त्योहारी सीजन से पहले घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार अहम फैसला ले सकती है। इसके तहत, चीनी पर लगाए गए 100 फीसदी आयात शुल्क को कम करने या पूरी तरह हटाने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक खबर में सरकारी सूत्र ने कहा, "चूंकि चीनी की कीमतों में पूरी तरह से गैर-जरूरी बढ़ोतरी हुई है इसलिए हमें इसे नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने होंगे। हम कई तरह के उपायों और तरीकों पर विचार कर रहे हैं।" सूत्र के मुताबिक जिन उपायों पर चर्चा हो रही है, उनमें चीनी के स्टॉक की मात्रा कम करना, सीमित आयात की अनुमति देना, आयात शुल्क में कटौती करना और मिलों द्वारा घरेलू बिक्री के लिए मासिक चीनी आवंटन में बदलाव करना शामिल है। हालांकि, अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

चीन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी

पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र के प्रमुख व्यापारिक केंद्र कोल्हापुर में चीनी की थोक कीमतें अगस्त की शुरुआत से लगभग 20% बढ़कर 100 किलोग्राम के लिए रिकॉर्ड 5,350 रुपये ($56) तक पहुंच गई हैं। यह बढ़ोतरी तब हुई है जब अगले सीजन की नई चीनी बाजार में आने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है। हालांकि, घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार पहले ही व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट लागू कर चुकी है। इसका मकसद जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाना है।

सस्ती होगी चीनी?

अगर सरकार 100 फीसदी आयात शुल्क में कटौती या इसे खत्म करने का फैसला करती है, तो विदेशी चीनी का आयात बढ़ सकता है। इससे घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है। हालांकि, इसका अंतिम असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों, आयात की मात्रा और घरेलू उत्पादन पर निर्भर करेगा।

त्योहारी सीजन में बढ़ती है डिमांड

भारत में चीनी की खपत आमतौर पर अगस्त के आखिर से जनवरी तक सबसे ज्यादा होती है। दरअसल, त्योहारों के मौसम में पारंपरिक मिठाइयों, प्रोसेस्ड फूड और ड्रिंक्स की मांग बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए सरकार समय रहते बाजार में पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करना चाहती है। हालांकि, खाद्य और वाणिज्य मंत्रालय की ओर से इस संभावित फैसले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

क्यों बढ़ी है चिंता?

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी बाजार में सप्लाई पर दबाव है और इस बात की चिंता बढ़ रही है कि अल नीनो मौसम की घटना का असर फसल पर पड़ेगा। हाल ही में, इसी तरह की अटकलों की वजह से न्यूयॉर्क फ्यूचर्स लगभग एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। भारत में भी ऐसी ही चिंताएं देखी जा रही हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मॉनसून की बारिश सामान्य स्तर से 13% कम हुई है। विभाग ने यह भी कहा कि गन्ने की फसल बारिश पर निर्भर करती है। जून 2026 के अंत (सालाना बारिश के मौसम की शुरुआत) के आस-पास बारिश में कमी 40% से अधिक थी, जिसकी वजह से कुछ फसलों की बुआई में देरी हुई है।