इस्लामाबाद (उत्तम हिन्दू न्यूज): पिछले तीन सालों से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को देश की सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी और फौरी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए इमरान खान को अगली सुनवाई तक के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों को इमरान के इलाज और मुकम्मल मेडिकल जांच को सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने उनके इलाज के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन करने और उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अस्पताल ले जाने का भी आदेश दिया है, ताकि बाहर कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
नब्ज और दिल की हालत बिगड़ी, कोर्ट ने मांगा पूरा मेडिकल रिकॉर्ड
इमरान खान से मुलाकातों और उनके इलाज से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जस्टिस शाहिद वहीद ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि अदालत में इमरान खान का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड पेश करने के बजाय सिर्फ मेडिकल रिपोर्ट का सारांश (समरी) ही क्यों दिया गया? जस्टिस वहीद ने मेडिकल रिपोर्ट पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि रिपोर्ट से साफ जाहिर हो रहा है कि इमरान खान की नब्ज और दिल की हालत ठीक नहीं है और ऐसा प्रतीत होता है कि उनके शरीर के जरूरी अंगों पर इसका बुरा असर पड़ना शुरू हो गया है। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले इमरान खान का पूरा और विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड कोर्ट में हर हाल में जमा किया जाए।
बहनों से मुलाकात पर पाबंदी पर सवाल, जेल प्रशासन से मांगा 3 साल का हिसाब
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जेल में इमरान खान और उनकी बहनों के बीच मुलाकातों पर लगी पाबंदियों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। जजों ने स्पष्ट किया कि परिवार के सदस्यों से मिलना किसी भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और जेल प्रशासन से पूछा कि इस्लामाबाद हाई कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है? हालांकि, इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल ने कोर्ट में दावा किया कि इमरान खान पिछले तीन सालों में अपनी बहनों से 48 बार मिल चुके हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को आदेश दिया कि वह पिछले तीन सालों में इमरान खान से हुई तमाम मुलाकातों और उनके बच्चों के साथ हुई बातचीत का पूरा रिकॉर्ड अदालत में पेश करे। कोर्ट ने अब इमरान खान को हफ्ते में एक बार अपने परिवार से मिलने की इजाजत दे दी है।
इलाज का नहीं होगा राजनीतिकरण, प्राइवेट अस्पताल का खर्च उठाएगी PTI
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर खास जोर दिया कि इमरान खान की सेहत और उनके इलाज को किसी भी कीमत पर राजनीतिक मुद्दा न बनाया जाए। अदालत ने पीटीआई (PTI) और इमरान के परिवार को सख्त निर्देश दिए कि वे एक हलफनामा (एफिडेविट) सौंपें जिसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि इमरान से मुलाकात के बाद मीडिया में कोई भी बयान या बातचीत नहीं की जाएगी। वहीं, पीटीआई महासचिव सलमान अकरम राजा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि मेडिकल रिपोर्ट का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए बिल्कुल नहीं किया जाएगा। अदालत के पूछने पर इमरान खान की बहन उज्मा खान के वकील ने बताया कि शिफा इंटरनेशनल (प्राइवेट) अस्पताल में होने वाले इलाज का सारा खर्च वे खुद उठाएंगे।
डॉ. फैसल सुल्तान और बहन उज्मा खान रहेंगी साथ, 16 सितंबर को अगली सुनवाई
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी सुनिश्चित किया कि अस्पताल में इलाज के दौरान इमरान खान के भरोसेमंद डॉक्टर फैसल सुल्तान और उनकी बहन उज्मा खान (जो खुद एक डॉक्टर हैं) उनके साथ ही मौजूद रहेंगे। अदालत ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई होने तक इमरान खान शिफा अस्पताल में ही रहेंगे। गर्मी की छुट्टियों के कारण अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को तय की गई है। इस दौरान अदालत ने अदियाला जेल के वरिष्ठ अधिकारियों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का भी निर्देश दिया है। साथ ही, अदालत ने इमरान खान पर दर्ज मुकदमों (जिनमें वे विचाराधीन हैं या सजायाफ्ता हैं) की पूरी जानकारी भी तलब की है।
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