सोनम वांगचुक ने तैयार की नई मांगों की लिस्ट, गृह मंत्रालय के अधिकारियों को सौंपी
Sonam Wangchuk: जंतर मंतर आंदोलन सफल होने के कुछ ही दिनों बाद सोनम वांगचुक फिर सक्रिय हो गए हैं. वांगचुक ने लद्दाख के अन्य प्रतिनिधियों के साथ गृहमंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की. इस दौरान ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांगें रखीं.
Sonam Wangchuk: जंतर मंतर आंदोलन सफल होने के कुछ ही दिनों बाद सोनम वांगचुक फिर सक्रिय हो गए हैं. वांगचुक ने लद्दाख के अन्य प्रतिनिधियों के साथ गृहमंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की. इस दौरान ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांगें रखीं.
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Sonam Wangchuk
Sonam Wangchuk: जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन के सफल होने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता वापस अपने घर लद्दाख लौट गए थे. कुछ ही दिनों बाद सोनम वापस फिर सक्रिय हो गए हैं. वांगचुक ने लद्दाख के अन्य प्रतिनिधियों के साथ गृहमंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की. इस दौरान अधिकारियों के सामने ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांगें रखीं.
लद्दाख में लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर केंद्र के साथ बातचीत में शामिल हुए हैं. दरअसल, लेह में गृह मंत्रालय के अधिकारियों, लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई. इसमें वांगचुक भी मौजूद रहे. बैठक के दौरान प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार को अपनी मांगों की एक सूची सौंपी. इसमें उन मुद्दों को शामिल किया गया है, जिन्हें संगठन बेहद अहम और किसी भी स्थिति में समझौता न करने वाला यानी ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मानते हैं. बैठक में लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान, कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के सह-अध्यक्ष सज्जाद करगिली, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे.
निर्वाचित विधानसभा बनाने और वित्तीय अधिकार की हुई मांग
लद्दाख के प्रतिनिधियों ने सिर्फ निर्वाचित विधानसभा बनाने की मांग नहीं की है, बल्कि उसे वित्तीय मामलों में भी पर्याप्त अधिकार देने की बात कही है. उनका कहना है कि विधानसभा को टैक्स वसूली, बजट तैयार करने, सरकारी खर्च और कर्ज लेने जैसे मामलों में प्रभावी अधिकार मिलने चाहिए.
प्रतिनिधियों की मांग है कि इन वित्तीय अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा भी दी जाए, ताकि भविष्य में इनमें आसानी से बदलाव न किया जा सके. इसके अलावा लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा वाले कंसोलिडेटेड फंड और कंटीजेंसी फंड बनाने की मांग भी रखी गई है. लद्दाख के संगठनों का तर्क है कि निर्वाचित सरकार और विधानसभा के पास पर्याप्त वित्तीय अधिकार होने से क्षेत्र के विकास और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर बेहतर नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकेगा.
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लगातार चर्चा में हैं सोनम
सोनम वांगचुक पिछले कुछ समय से आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में रहे हैं. जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हुए छात्र आंदोलन में भी वह प्रमुख रूप से सक्रिय रहे थे. उस दौरान उन्होंने लंबे समय तक भूख हड़ताल की थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करते हुए कुछ मांगें स्वीकार की थीं.
मई में भी हो चुकी है बैठक
गृह मंत्रालय और लद्दाख के संगठनों के बीच इससे पहले 22 मई को नई दिल्ली में औपचारिक बातचीत हुई थी. ऐसे में ताजा बैठक को लद्दाख के लंबित मुद्दों पर आगे की बातचीत के तौर पर देखा जा रहा है.
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