छतरपुर के महाराजपुर नगर पालिका क्षेत्र के हरपई पुरवा गांव में बारिश का मौसम ग्रामीणों के लिए हर साल नई मुश्किल लेकर आता है। करीब 250 से 300 की आबादी वाले इस गांव को कुम्हेड़ नदी पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में महाराजपुर से संपर्क टूट जाता

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गांव के लोगों के लिए महाराजपुर सिर्फ बाजार और रोजमर्रा की जरूरतों का केंद्र नहीं है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए भी उन्हें वहीं जाना पड़ता है। सामान्य दिनों में यह आवाजाही आसान रहती है, लेकिन बारिश शुरू होते ही कुम्हेड़ नदी रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।

बच्चों को कंधे पर बैठाकर नदी पार कराते हैं ग्रामीण

इन दिनों कुम्हेड़ नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। सामने आई तस्वीरों में ग्रामीण अपने बच्चों को कंधों पर बैठाकर नदी पार कराते दिखाई दे रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए हर दिन नदी पार करना मजबूरी बन गया है।

अभिभावक सुबह बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए नदी पार करते हैं और छुट्टी के बाद उन्हें वापस लेकर आते हैं। पानी का बहाव बढ़ने पर यह रास्ता और ज्यादा जोखिम भरा हो जाता है। बच्चों के साथ बुजुर्गों और महिलाओं को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।

ग्रामीण बच्चों को कंधे पर बैठाकर कुम्हेड़ नदी पार कराते हैं।

ग्रामीण बच्चों को कंधे पर बैठाकर कुम्हेड़ नदी पार कराते हैं।

मरीजों और गर्भवती महिलाओं की परेशानी ज्यादा

हरपई पुरवा में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने के कारण किसी बीमार व्यक्ति को इलाज के लिए महाराजपुर ले जाना पड़ता है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के मामले में परेशानी और बढ़ जाती है। नदी का पानी कम होने का इंतजार करना हर बार संभव नहीं होता। ऐसे में परिवार के सदस्यों को जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है।

बारिश आते ही गांव का संपर्क टूट जाता है

कुम्हेड़ नदी पर पुल नहीं होने की समस्या वर्षों पुरानी है। बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही हरपई पुरवा का सीधा संपर्क महाराजपुर से प्रभावित हो जाता है। गांव के लोगों के लिए यह स्थिति हर साल दोहराती है।

सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए भी पानी उतरने का इंतजार करना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और जरूरत पड़ने पर मरीजों को समय पर इलाज मिलना भी मुश्किल हो जाता है।

चुनाव के समय मिलता है पुल का भरोसा

ग्रामीणों का कहना है कि कुम्हेड़ नदी पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि गांव में पहुंचकर पुल बनवाने का भरोसा देते रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद रहती है कि अब उनकी वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होगा, लेकिन चुनाव के बाद स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।

इसी पीड़ा को ग्रामीण एक वाक्य में बयां करते हैं—"नेता चुनाव जीत जाते हैं, लेकिन हरपई पुरवा हार जाता है।" यह बात गांव की मौजूदा स्थिति और वर्षों से चली आ रही उपेक्षा को सामने रखती है।

हर साल लौट आती है वही तस्वीर

हरपई पुरवा के लिए बारिश का मौसम सिर्फ पानी और हरियाली नहीं लाता, बल्कि आवागमन का संकट भी साथ लेकर आता है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही बच्चों को कंधों पर बैठाकर नदी पार कराने और मरीजों को जोखिम के बीच महाराजपुर ले जाने की तस्वीरें सामने आने लगती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कुम्हेड़ नदी पर पुल उनकी वर्षों पुरानी जरूरत है। अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी पुल निर्माण और सुरक्षित आवागमन की सुविधा चाहिए, ताकि हर बारिश में गांव का संपर्क मुख्यधारा से न टूटे।