मोबाइल कैमरा देखते ही अब नहीं उलझेगी दिल्ली पुलिस! प्रदर्शनकारियों को लेकर जवानों के लिए नई गाइडलाइन

Time Updated: Sunday, August 23, 2026, 21:31 [IST]

Delhi Police Protest Guidelines: प्रदर्शनकारियों से नोकझोंक, कैमरे के सामने तीखी प्रतिक्रिया और छोटी सी बात का वीडियो बनकर सोशल मीडिया पर वायरल होना अब पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

इसी को देखते हुए एक केंद्रीय एजेंसी की ओर से दिल्ली पुलिस के जवानों के लिए नई गाइडलाइन जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें पुलिसकर्मियों से प्रदर्शन के दौरान शांत रहने, उकसावे में नहीं आने और प्रदर्शनकारियों से गैरजरूरी बातचीत से बचने को कहा गया है।

Delhi Police Protest Guidelines

इन निर्देशों की चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब पिछले महीने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठे थे।

इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नई गाइडलाइन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ड्यूटी के दौरान जवानों का व्यवहार पेशेवर रहे और किसी घटना का वीडियो अलग संदर्भ में सोशल मीडिया पर फैलकर विवाद का कारण न बने।

मानकर चलिए, हर वक्त कैमरा ऑन है

नई गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों को यह ध्यान रखने को कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान उनका हर कदम मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड हो सकता है। इसके बाद वही वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर फैल सकता है और सार्वजनिक जांच के दायरे में आ सकता है।

यानी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को सिर्फ मौके की स्थिति नहीं देखनी है। उसे यह भी ध्यान रखना है कि उसका व्यवहार कैमरे के सामने कैसा दिख रहा है। खासकर भीड़ और तनाव वाले माहौल में यह सलाह काफी अहम मानी जा रही है।

पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों के साथ बेवजह बातचीत नहीं करने की सलाह दी गई है। अगर कोई सवाल पूछता है, ताना मारता है, भावनात्मक अपील करता है या बहस में खींचने की कोशिश करता है तो जवानों को प्रतिक्रिया देने से बचना है। अगर बातचीत करना जरूरी हो जाए तो जवाब भी छोटा और सीधा रखने को कहा गया है। मसलन, प्रदर्शनकारी से सहयोग करने की अपील की जाए और इसके बाद चुप रहा जाए।

गाने, नारे या मजाक पर भी रिएक्शन नहीं

गाइडलाइन में उन स्थितियों का भी जिक्र है, जिनमें प्रदर्शनकारी जानबूझकर पुलिस की प्रतिक्रिया रिकॉर्ड करने की कोशिश कर सकते हैं। जवानों को मजाक, गाने, डांस, पोस्टर, मॉक सलामी या दूसरे उकसाने वाले व्यवहार पर प्रतिक्रिया नहीं देने को कहा गया है।

पुलिसकर्मियों को मोबाइल फोन को धक्का देने, फोन छीनने या फेंकने, गुस्से में चिल्लाने और अनावश्यक शारीरिक टकराव से भी बचने की सलाह दी गई है। हालांकि, ड्यूटी निभाने के लिए जरूरी कार्रवाई को इससे अलग रखा गया है।

बॉडी लैंग्वेज से लेकर भाषा तक पर जोर

नई सलाह सिर्फ बोलने तक सीमित नहीं है। जवानों को प्रोफेशनल बॉडी लैंग्वेज और सम्मानजनक भाषा बनाए रखने को कहा गया है। प्रदर्शनकारी जानबूझकर उकसाने की कोशिश करें, तब भी पुलिस को संयम नहीं खोना है।
महिला प्रदर्शनकारियों को लेकर भी खास निर्देश दिए गए हैं। पुलिसकर्मियों को उनसे फूल, खाना या किसी भी तरह की दूसरी चीज स्वीकार नहीं करने को कहा गया है।

ये निर्देश सिर्फ दिल्ली के सामान्य पुलिस बल तक सीमित नहीं बताए गए हैं। जिला पुलिस, रेलवे और मेट्रो यूनिट्स में तैनात कर्मियों को भी सार्वजनिक जगहों पर अपने व्यवहार को लेकर खास सावधानी बरतने को कहा गया है।

पूरी गाइडलाइन का फोकस एक ही बात पर है, प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ने से रोकना। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना कि किसी जवान की भावनात्मक या आक्रामक प्रतिक्रिया कैमरे में कैद होकर पूरे बल की छवि पर असर न डाले। फिलहाल ये निर्देश पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आए हैं। ऐसे में इनके औपचारिक दस्तावेज और लागू करने की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने पर तस्वीर और साफ होगी।