उत्तराखंड कांग्रेस सोशल मीडिया विभाग में नई नियुक्तियां हुई हैं। अभिनव थापर को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि दो सह-अध्यक्ष और चार समन्वयक भी नियुक्त किए गए हैं।

देहरादून और दिल्ली के सियासी गलियारों में संगठनात्मक बदलाव की सुगबुगाहट के बीच कांग्रेस आलाकमान ने उत्तराखंड के लिए बड़ा फैसला लिया है। नई दिल्ली स्थित 24 अकबर रोड मुख्यालय से जारी आधिकारिक आदेश के तहत उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Uttarakhand Pradesh Congress Committee) के सोशल मीडिया विभाग का पुनर्गठन करते हुए नई टीम की घोषणा कर दी गई है।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद के.सी. वेणुगोपाल द्वारा हस्ताक्षरित इस सूची के मुताबिक, युवा चेहरे अभिनव थापर को इस महत्वपूर्ण विभाग का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

बदलाव तुरंत प्रभावी हो गया है।

पहाड़ी राज्य में भारतीय जनता पार्टी के मजबूत डिजिटल तंत्र का मुकाबला करने के मकसद से कांग्रेस ने अपनी पूरी सोशल मीडिया इकाई में क्षेत्रीय और सांगठनिक संतुलन साधने का प्रयास किया है, ताकि आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच युवाओं और सोशल मीडिया यूजर्स तक पार्टी की बात धारदार तरीके से पहुंचाई जा सके।

सह-अध्यक्ष और समन्वयकों को मिली अहम जिम्मेदारी

जारी की गई आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष के सहयोग के लिए दो सह-अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। इसमें भारत शर्मा और हर्षित सिंह बिष्ट को सह-अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसके अलावा मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों के समीकरणों को ध्यान में रखते हुए चार समन्वयकों (Coordinators) के नाम पर भी मुहर लगाई गई है। इनमें मधुसूदन सुंदरियाल, रोहित भट्ट, दिनेश चंद्र टम्टा और सुश्री जसवीर कौर शामिल हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विभिन्न जिलों से आने वाले इन कार्यकर्ताओं के समन्वय से राज्यभर में पार्टी का डिजिटल नेटवर्क ब्लॉक स्तर तक सक्रिय हो सकेगा।

डिजिटल रणनीति को धार देने की तैयारी

उत्तराखंड की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सोशल मीडिया नैरेटिव तय करने का एक प्रमुख जरिया बन चुका है। ऐसे दौर में विपक्षी दल के रूप में कांग्रेस पर जनहित के मुद्दों – जैसे बेरोजगारी, पलायन, कानून-व्यवस्था और अंकिता भंडारी प्रकरण—को लगातार डिजिटल मंचों पर उठाने का दबाव रहता है। अभिनव थापर लंबे समय से स्थानीय मुद्दों पर मुखर रहे हैं और आरटीआई के जरिए कई अहम जानकारियां सार्वजनिक करने के लिए जाने जाते हैं।

लेकिन असली चुनौती सिर्फ पद संभालने की नहीं, बल्कि बिखरे हुए डिजिटल कैडर को एक सूत्र में पिरोने की होगी।

नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य के सुदूर पर्वतीय गांवों तक इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को पार्टी की विचारधारा से जोड़ने की रहेगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नई टीम किस रणनीति के साथ जमीन पर असर दिखा पाती है।