'मैं फिर से पैसे कमाऊंगा', कर्ज चुकाने के बाद फिर बिजनेस में लौटेंगे सुभाष चंद्रा, आखिर किस विवाद में फंसे?
Published: Saturday, August 29, 2026, 17:13 [IST]
एस्सेल ग्रुप (Essel Group) के चेयरमैन सुभाष चंद्र एक बार फिर नई शुरुआत करने की तैयारी में हैं। कभी हजारों करोड़ रुपये के कारोबारी साम्राज्य के लिए पहचाने जाने वाले सुभाष चंद्रा अब अपने करियर को नए सिरे से शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वह दोबारा कमाएंगे। इतना ही नहीं, वह स्विट्जरलैंड में एक दोस्त के साथ काम करने की संभावना भी तलाश रहे हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनकी पर्सनल इनसॉल्वेंसी (Personal Insolvency Proceedings) और करीब 22,006 करोड़ रुपये के एडमिटेड क्लेम को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। NCLT ने हाल में एक रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी है, जिसके तहत सुभाष चंद्र को करीब 6.5 करोड़ रुपये का पेमेंट करना है। यही रकम और कुल क्लेम के बीच का बड़ा अंतर इस मामले की सबसे बड़ी चर्चा बना हुआ है।
Subhash Chandra Debt Crisis: 2019 में कैसे बिगड़ा पूरा खेल?
सुभाष चंद्रा के मुताबिक एस्सेल ग्रुप का संकट 24 जनवरी 2019 के आसपास खुलकर सामने आया। इसकी बड़ी वजह एसेट-लायबिलिटी मिसमैच थी। आसान भाषा में समझें तो ग्रुप की देनदारियां और उसके पास मौजूद या समय पर मिलने वाली रकम के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया था।
सुभाष चंद्रा ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि उस वक्त वे पब्लिक तौर पर अपनी गलतियां मानी थीं और फाइनेंशियल सिस्टम का पैसा लौटाने का वादा किया था। उनका दावा है कि संकट के समय ग्रुप पर करीब 45,000 करोड़ रुपये की देनदारी थी। इसमें से करीब 43,000 करोड़ रुपये चुकाए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा, "हमने परिवार की संपत्तियां बेचं। अपनी चीजें बेचं। यहां तक कि घर भी बेच दिया। हमारे पास जो कुछ था, वह लगाया, लेकिन लोगों का पैसा चुकाया।" चंद्रा के मुताबिक, करीब 2,000 करोड़ रुपये अभी उन कंपनियों से जुड़े हैं जहां एसेट-लायबिलिटी मिसमैच के चलते रीपेमेंट अटका हुआ है।
क्या सुभाष चंद्रा ने खुद इतना कर्ज लिया था?
यह इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा है। मीडिया रिपोर्टों में करीब 22,000 करोड़ रुपये के दावे को अक्सर सुभाष चंद्र की निजी देनदारी के रूप में पेश किया गया है। चंद्र इससे असहमत हैं।
उनका कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर बैंकों से 22,000 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं लिया था। यह रकम उन मामलों से जुड़े दावे हैं, जो उन्होंने ग्रुप-लिंक्ड कंपनियों के लोन के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर दी गई गारंटी से पैदा हुए थे। यानी कर्ज लेने वाली कंपनियां थीं, लेकिन कुछ कर्ज के लिए चंद्र ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी। यही वजह है कि दिवालिया कार्यवाही में उनकी निजी जिम्मेदारी का सवाल सामने आया।
22 हजार करोड़ के दावे पर सिर्फ 6.5 करोड़?
NCLT ने हाल में सुभाष चंद्रा के लिए रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी। इसके तहत करीब 22,006 करोड़ रुपये के एडमिटेड क्लेम के मुकाबले करीब 6.5 करोड़ रुपये का पेमेंट प्रस्तावित है। इतने अंतर इस मामले में सबसे बड़ा विवाद बन गया है। करीब 22 हजार करोड़ रुपये के एडमिटेड क्लेम के सामने 6.5 करोड़ रुपये की रकम करीब 0.03 फीसदी बैठती है।
लेंडर्स के एक वर्ग ने इस रिकवरी पर सवाल उठाए हैं। HDFC बैंक की तरफ से NCLT के आदेश को अपीलेट ट्रिब्यूनल में चुनौती देने की संभावना बताई गई है। हालांकि चंद्रा का कहना है कि इस रकम को उनके पर्सनल तौर पर लिए गए लोन के रूप में देखना सही नहीं है। उनके अनुसार, अंडरलाइंग लोन उन कंपनियों ने लिए थे, जिनके लिए उन्होंने पर्सनल गारंटी दी थी।
सुभाष चंद्रा ने 3,900 करोड़ का क्या हिसाब दिया?
सुभाष चंद्र ने यह भी दावा किया कि रेजोल्यूशन प्लान का विरोध कर रहे लेंडर्स के क्लेम करीब 3,900 करोड़ रुपये के हैं। उनके हिसाब से, इनमें से करीब 620 करोड़ रुपये पहले ही सेटल किए जा चुके हैं। इसके अलावा बॉरोइंग एंटिटीज ने लेंडर्स को करीब 1,100 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा है। चंद्र चाहते हैं कि पूरे मामले की तस्वीर सिर्फ NCLT में पर्सनल इन्सॉल्वेंसी क्लेम दर्ज देखकर न बनाई जाए। वह पूरे एस्सेल ग्रुप के बॉरोइंग और रीपेमेंट हिस्ट्री को एक साथ देखने की बात कर रहे हैं।
इंडिपेंडेंट ऑडिट की मांग क्यों कर रहे हैं सुभाष चंद्रा?
विवाद खत्म करने के लिए चंद्रा ने इंडिपेंडेंट ऑडिट की मांग की है। उन्होंने बैंकिंग सिस्टम, फाइनेंस मिनिस्ट्री और सीनियर बैंक अधिकारियों से अपील की कि किसी इंडिपेंडेंट ऑडिटर से ग्रुप के लोन और रीपेमेंट की पूरी जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा, "जब संकट शुरू हुआ था, तब कितना लोन था और आज तक कितना पैसा चुकाया गया, अगर इसकी इंडिपेंडेंट कर्जदार हो जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।" चंद्रा का कहना है कि ऐसी जांच से यह साफ हो जाएगा कि 2019 में कुल उधार कितनी थी और उसके बाद किस तरह रीपेमेंट हुआ।
Rs 45,000 करोड़ की पर्सनल वेल्थ: 'यह आंकड़ा एक मिथ है'
सुभाष चंद्रा ने उस रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाया जिसमें उनकी निजी संपत्ति को करीब 45,000 करोड़ रुपये बताया गया था। उनका कहना है कि यह आंकड़ा एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के मार्केट वैल्यू या मार्केट कैपिटलाइजेशन से जुड़ा था। इसे उनकी पर्सनल वेल्थ बताना सही नहीं है।
उनके ऑफिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, 2024 में उनकी कुल संपत्ति करीब 31.79 करोड़ रुपये थी। इसमें करीब 25 करोड़ रुपये की रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी भी शामिल थी। वहीं जब वह 2016 में राज्यसभा सदस्य बने थे, तब उनकी घोषित संपत्ति करीब 39.08 करोड़ रुपये बताई गई थी।
सुभाष चंद्रा ने सवाल किया कि अगर 2016 में निजी संपत्ति करीब 39 करोड़ रुपये थी, तो एक साल में यह 45,000 करोड़ रुपये कैसे हो गई? उन्होंने 45,000 करोड़ रुपये वाली निजी संपत्ति की रिपोर्ट को "एक मिथक" बताया और कहा कि कंपनी की वैल्यू और उनकी निजी संपत्ति के बीच फर्क समझना जरूरी है।
'मैं फिर कमाऊंगा': अब स्विट्जरलैंड में काम करने का प्लान
कारोबारी साम्राज्य के बड़े हिस्से के बिखरने के बावजूद सुभाष चंद्रा का कहना है कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, "मैं फिर कमाऊंगा। मैं पायनियर हूं। मुझे बिजनेस खड़ा करना आता है और मैं दोबारा शुरुआत करूंगा।"
चंद्रा ने बताया कि वह स्विट्जरलैंड में इन्वेस्टमेंट से जुड़े काम करने वाले एक दोस्त के साथ काम करने पर सोच रहे हैं। इसके अलावा वह परिवार से करीब 2 से 4 करोड़ रुपये उधार लेकर स्टार्टअप और दूसरे वेंचर में पैसा लगाने की योजना भी देख रहे हैं।
उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, "मैंने सिर्फ 17 रुपये से शुरुआत की थी।" चंद्रा का दावा है कि उनके बिजनेस से करीब 8,000 परिवारों को रोजगार मिला और कई दशकों में उन्होंने फाइनेंशियल सिस्टम को ब्याज के तौर पर बड़ी रकम चुकाई।
पर्सनल इन्सॉल्वेंसी केस: मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं
सुभाष चंद्रा के खिलाफ पर्सनल इन्सॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स 2022 से चल रही हैं। NCLT का अप्रूव्ड रेजोल्यूशन प्लान उनकी पर्सनल गारंटी से जुड़ी लायबिलिटी को एड्रेस करता है। लेकिन इससे उन कंपनियों की मूल देनदारियां अपने आप खत्म नहीं हो जातीं, जिन्होंने लेंडर्स से लोन लिया था।
यानी 6.5 करोड़ रुपये का रेजोल्यूशन प्लान और करीब 22,006 करोड़ रुपये के एडमिटेड क्लेम इस मामले की पूरी कहानी नहीं हैं। कॉर्पोरेट बॉरोअर्स की अपनी लायबिलिटीज और उनके रीपेमेंट अरेंजमेंट्स अलग-अलग इशू हैं।
चंद्रा ने अपने वीडियो मैसेज के फाइनल में लोगों से सोशल मीडिया और WhatsApp पर उनके बारे में चल रही खबरों को बिना जांचे आगे नहीं बढ़ाने की अपील की। उनका मैसेज साफ था। वह अपने पास्ट की वेलफेयर को एक्सेप्ट करते हैं, लेकिन खुद को खत्म हुआ वेलफेयर नहीं मानते। अब उनकी नजर एक बार फिर कमाई और नए बिजनेस की शुरुआत पर है।