ब्लू क्रैब क्या है? इटली में मचाई ऐसी तबाही, उतारनी पड़ी ‘ऑक्टोपस सेना’

Time Published: Saturday, August 29, 2026, 21:05 [IST]

Blue Crab Italy: इटली के समुद्र में इन दिनों एक छोटे से जीव ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. ब्लू क्रैब यानी नीले केकड़ों की आबादी इतनी तेजी से बढ़ रही है कि मछुआरों से लेकर सीफूड कारोबार तक प्रभावित हो रहा है. ये केकड़े मछली पकड़ने वाले जाल फाड़ने के साथ क्लैम, मसल्स और दूसरी शेलफिश को बड़े पैमाने पर खा रहे हैं.

हालात से निपटने के लिए इटली की सरकार और वैज्ञानिकों ने अब अनोखी रणनीति अपनाई है. केमिकल या मशीनों के बजाय समुद्र में ऑक्टोपस की एक बड़ी 'आर्मी' तैयार की जा रही है, ताकि ये प्राकृतिक शिकारी बनकर ब्लू क्रैब की संख्या को नियंत्रित कर सकें.

Blue Crab Italy

इटली में क्यों बढ़ रहे ब्लू क्रैब?

ब्लू क्रैब मूल रूप से अटलांटिक महासागर की प्रजाति है. माना जाता है कि कई दशक पहले ये जहाजों के पानी के जरिए इटली के समुद्री इलाकों तक पहुंचे. यहां का समुद्री वातावरण इनके लिए अनुकूल साबित हुआ और इनकी संख्या लगातार बढ़ती गई. सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इनका कोई खास प्राकृतिक शिकारी नहीं है. करीब दो पाउंड तक वजन वाले ये केकड़े अपने मजबूत पंजों से मछली पकड़ने वाले जाल फाड़ देते हैं और समुद्र में मौजूद शेलफिश को तेजी से खत्म कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें: फिर विवादों में फंसे समय रैना, इस बार उड़ाया बिहार का मजाक! क्या बंद होगा शो?

200 मिलियन यूरो का हो चुका नुकसान

ब्लू क्रैब की बढ़ती संख्या का सबसे ज्यादा असर इटली के मछुआरों और एक्वाकल्चर कारोबार पर पड़ा है. मछुआरों और किसानों के संगठन कोल्डिरेटी के मुताबिक, अब तक करीब 200 मिलियन यूरो का नुकसान हो चुका है. कुछ इलाकों में क्लैम का उत्पादन करीब 70 फीसदी तक घट गया है. एमिलिया-रोमाग्ना के कृषि और मत्स्य विभाग से जुड़े एलेसियो ममी ने इसे इटली के समुद्री इलाकों के सामने आए सबसे गंभीर संकटों में से एक बताया है.

ब्लू क्रैब से लड़ने उतरे 1.30 लाख ऑक्टोपस

समस्या का समाधान खोजने के लिए बोलोग्ना यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 'ऑक्टो-ब्लू' प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत एड्रियाटिक तट के रिकसिओन और सेसेनाटिको में करीब 1.30 लाख छोटे ऑक्टोपस समुद्र में छोड़े गए हैं. ये दोनों इलाके ब्लू क्रैब से बुरी तरह प्रभावित हैं. इन ऑक्टोपस को लैब में तैयार किया गया है. पानी के अंदर इनके लिए कृत्रिम ठिकाने भी बनाए गए हैं, ताकि शुरुआती दौर में इन्हें सुरक्षित जगह मिल सके.

एक ऑक्टोपस रोज खा सकता है 4 ब्लू क्रैब

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि बड़े होने के बाद ऑक्टोपस ब्लू क्रैब की आबादी को नियंत्रित करने में मदद करेंगे. ऑक्टोपस प्राकृतिक रूप से क्रस्टेशियंस यानी केकड़े जैसी प्रजातियों का शिकार करते हैं. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि एक बड़ा ऑक्टोपस एक दिन में चार तक ब्लू क्रैब खा सकता है. हालांकि इस योजना के सामने बड़ी चुनौती भी है. बेबी ऑक्टोपस की मृत्यु दर करीब 99 फीसदी तक हो सकती है. फिर भी बचे हुए ऑक्टोपस आगे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

खाने के लिए भी लोगों को कर रही प्रोत्साहित

ब्लू क्रैब का फैलाव अब समुद्र से निकलकर इटली की सबसे लंबी नदी पो तक पहुंच गया है. इन्हें नदी के मुहाने से करीब 100 मील दूर गुस्टाला के पास पकड़ा गया है. वैज्ञानिकों के लिए यह चिंता का विषय है. इनकी आबादी रोकने के लिए इटली अब लोगों को इन्हें खाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है. सुपरमार्केट में इनकी बिक्री शुरू हो चुकी है और रेस्टोरेंट में इनसे सलाद और पास्ता जैसे व्यंजन बनाए जा रहे हैं. हालांकि सिर्फ खाने से समस्या अभी खत्म होती नहीं दिख रही है.

ये भी पढ़ें: Nepal Flood के बीच शर्मनाक वारदात! नदी में बहकर आए बैंक सेफ से निकाले 92 लाख, 29 गिरफ्तार, शवों से भी हुई चोरी