कौन थीं इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर? किडनैप कर पेड़ से बांधा, फिर लगा दी आग, मौत के बाद अब दिल दहला देने वाले खुलासे
Published: Sunday, August 30, 2026, 7:30 [IST]
Manjeet Kaur Death: सोशल मीडिया पर मेकअप और म्यूजिक वीडियो से अपनी पहचान बनाने वालीं इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर अब इस दुनिया में नहीं हैं। मोहाली के खरड़ में रहने वाली इन्फ्लुएंसर और मेकअप आर्टिस्ट मनजीत कौर की 26 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ पीजीआई में इलाज के दौरान मौत हो गई। मनजीत कौर 28 साल की थीं। वह करीब दो महीने से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थीं। परिवार का आरोप है कि उन्हें पहले अगवा किया गया, फिर बुरी तरह पीटा गया और मोरिंडा के जंगल इलाके में एक पेड़ से बांधकर आग लगा दी गई।
इस केस ने सिर्फ दो आरोपियों पर नहीं, बल्कि पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार का दावा है कि मनजीत कौर के होश में आने के बाद भी पुलिस ने उनका बयान दर्ज नहीं किया। अब उनकी मौत के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने अपहरण और हत्या का केस दर्ज किया है।
कौन थीं मनजीत कौर? इंस्टाग्राम पर थे 1.46 लाख फॉलोअर्स (Who Was Influencer Manjeet Kaur)
मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली मनजीत कौर खरड़ में किराए का मकान लेकर रहती थीं। वह एक पेशेवर मेकअप आर्टिस्ट थीं और इंस्टाग्राम व यूट्यूब पर मेकअप और गानों से जुड़े वीडियो अपलोड करती थीं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 1.46 लाख फॉलोअर्स थे।
मनजीत तलाकशुदा थीं और अपने पीछे 7 साल के मासूम बेटे को छोड़ गई हैं। खरड़ सदर थाने के एसएचओ गुरप्रीत सिंह के मुताबिक, उनके कुछ जान-पहचान के लोगों के साथ पुरानी रंजिश या विवाद की बात सामने आ रही है।
मनजीत कौर के साथ 3 जुलाई की रात क्या हुआ?
परिवार की शिकायत के मुताबिक, 3 जुलाई की देर रात मनजीत कौर को चंडीगढ़ के सेक्टर-34 में एक शराब के ठेके के पास बुलाया गया था। शिकायत में शुभी और पिंदा नाम के दो लोगों पर उन्हें वहां से जबरन ले जाने का आरोप लगाया गया है।
परिवार का कहना है कि दोनों आरोपी मनजीत को एक कार में बैठाकर पंजाब के मोरिंडा ले गए। वहां उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद कथित तौर पर उन्हें एक पेड़ से बांधा गया और आग लगा दी गई। आरोप है कि मौके पर पहुंचे मनजीत के एक दोस्त ने कंबल की मदद से आग बुझाई। इसके बाद उन्हें मोरिंडा के अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें मोहाली के मैक्स अस्पताल भेजा गया। बाद में उन्हें चंडीगढ़ के PGIMER रेफर कर दिया गया।

दो महीने तक अस्पताल में चली जिंदगी की लड़ाई
मनजीत कौर को 9 जुलाई को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। उनके शरीर पर गंभीर जलने के निशान थे। वह कई हफ्तों तक बेहोश रहीं। 5 अगस्त को उन्हें होश आया। इसी दौरान उन्होंने कथित घटना के बारे में अपने परिवार को जानकारी दी। परिवार का आरोप है कि वह पुलिस के सामने भी अपना बयान दर्ज कराना चाहती थीं। यहीं से पुलिस की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल खड़ा होता है।
मनजीत की मां का दावा है कि PGI चौकी को उनकी बेटी के होश में आने और बयान देने की स्थिति में होने की जानकारी दी गई थी। चौकी ने खरड़ सदर थाना पुलिस को भी सूचना दी। लेकिन आरोप है कि जांच अधिकारी अस्पताल नहीं पहुंचे। परिवार का यह भी कहना है कि PGI चौकी में इस बारे में DDR दर्ज की गई थी।

मौत के बाद क्यों दर्ज हुई FIR?
खरड़ सदर थाना प्रभारी गुरप्रीत सिंह के मुताबिक, जब मनजीत को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तब अस्पताल की तरफ से पुलिस को उनके गंभीर रूप से झुलसने की जानकारी दी गई थी। पुलिस अस्पताल पहुंची और परिवार से बात की। परिवार ने बताया कि मनजीत सेक्टर-34 में एक परिचित महिला से मिलने गई थीं। वहां दो लोगों ने उनके साथ मारपीट की और फिर उन्हें मोरिंडा ले जाया गया।
गुरप्रीत सिंह के मुताबिक, परिवार के बयान के आधार पर खरड़ पुलिस ने DDR दर्ज की थी और पूरी जानकारी चंडीगढ़ के सेक्टर-34 थाना पुलिस को भेजी गई थी।
इसके बावजूद 3 जुलाई की घटना के बाद 26 अगस्त तक हत्या के प्रयास की FIR दर्ज नहीं हुई। मनजीत की मौत के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने उनकी मां कांता देवी की शिकायत पर मामला दर्ज किया। यही इस केस का सबसे बड़ा सवाल है कि अगर पुलिस को घटना की जानकारी पहले से थी, तो कार्रवाई इतनी देर से क्यों हुई।

चंडीगढ़ पुलिस ने किन धाराओं में केस दर्ज किया?
चंडीगढ़ पुलिस की DSP साउथ गुरजीत कौर के मुताबिक, मनजीत की मां की शिकायत पर सेक्टर-34 थाने में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामला BNS की धारा 140(1), 103(1) और 3(5) के तहत दर्ज हुआ है। इनमें अपहरण, हत्या और एक से ज्यादा लोगों की साझा आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
सेक्टर-34 SHO शादी लाल ने बताया कि FIR पीड़िता की मां की शिकायत पर दर्ज की गई। पुलिस दोनों आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। पुलिस सेक्टर-34 और आसपास के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। जिस वाहन से मनजीत को ले जाने का आरोप है, उसकी पहचान करने की कोशिश भी चल रही है। टोल प्लाजा के कैमरों की रिकॉर्डिंग भी जांच में शामिल की जाएगी।
अस्पतालों और पुलिस की भूमिका भी जांच के घेरे में
चंडीगढ़ की SSP कंवरदीप कौर ने कहा है कि मां की शिकायत मिलते ही अपहरण और हत्या का केस दर्ज किया गया। पुलिस अब CCTV और दूसरे सबूतों की जांच कर रही है। जांच का एक हिस्सा यह भी है कि मोरिंडा अस्पताल, मैक्स अस्पताल और PGIMER ने पुलिस को घटना की सूचना कब और किस तरह दी थी। अगर सूचना पहले दी गई थी, तो उसके बाद पुलिस ने क्या कदम उठाए, इसकी भी जांच होगी।
इसलिए फिलहाल इस केस में दो अलग सवाल हैं। पहला, मनजीत पर हमला किसने और क्यों किया। दूसरा, घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस की तरफ से समय पर क्या कार्रवाई हुई। पुलिस ने अभी हमले के पीछे की वजह साफ नहीं की है। परिवार ने जिन दो लोगों पर आरोप लगाया है, उनकी गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही तस्वीर ज्यादा साफ हो सकेगी।
जिस लाइव का इंतजार था, वह कभी नहीं आया
मनजीत की हालत को लेकर 28 जुलाई को उनके दोस्त और पंजाब के इन्फ्लुएंसर गिल मोहाली के साथ एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर की गई थी। पोस्ट में उनकी हालत बेहतर होने की बात कही गई थी। इसमें लोगों से जल्दबाजी में किसी नतीजे पर नहीं पहुंचने की अपील की गई थी। पोस्ट में कहा गया था कि मनजीत ठीक होने के बाद खुद लाइव आकर बताएंगी कि उनके साथ क्या हुआ था।
बात कुछ इस तरह कही गई थी, "मनजीत अब करीब 50 फीसदी ठीक हो चुकी हैं। 10 से 15 दिन में वह खुद लाइव आएंगी और बताएंगी कि कौन था, क्या हुआ और पूरी घटना कैसे हुई। तब तक घर बैठकर किसी को जज मत कीजिए। अगर किसी के बारे में अच्छा नहीं बोल सकते, तो बुरा भी मत बोलिए। उनका परिवार डरा हुआ है और मनजीत खुद भी उस घटना के बाद बहुत डरी हुई हैं।" लेकिन वह लाइव कभी नहीं आया। 26 अगस्त को मनजीत कौर की मौत हो गई।
अब इस केस में पुलिस के सामने सबसे बड़ा काम सिर्फ आरोपियों तक पहुंचना नहीं है। जांच को यह भी साफ करना होगा कि 3 जुलाई की रात वास्तव में क्या हुआ, मनजीत को किसने और किस मकसद से वहां बुलाया, उन्हें मोरिंडा कौन लेकर गया और अस्पताल पहुंचने के बाद पुलिस ने क्या-क्या कार्रवाई की। फिलहाल चंडीगढ़ पुलिस की जांच जारी है और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।