नेपाल बाढ़ के बाद बिना पहचान के ही दफनाए जा रहे शव, बाद में कैसे होगी पहचान?

Aug 30, 2026 01:31 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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Nepal Floods: नेपाल में आई बाढ़ के बाद हालात खराब हो रहे हैं। अभी तक 734 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। शवों की संख्या बढ़ने से उनके रखरखाव में परेशानी आ रही है। अब नेपाल सरकार ने अज्ञात शवों के डीएनए सैंपल लेकर उन्हें दफनाना शुरू कर दिया है।

Nepal Flood

नेपाल में बाढ़

Nepal Flash Floods: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर से आई बाढ़ (flash flood) का दंश झेल रहे नेपाल के सामने एक नई चुनौती आ गई है। मृतकों की संख्या 734 के पार पहुंच गई है। ऐसे में आसपास के मुर्दा घर भी पूरी तरह से भर चुके हैं। इन शवों को रखने के लिए जगह कम पड़ रही है। अब इस मामले में नेपाल सरकार ने फैसला किया है कि वह इन अज्ञात शवों को सम्मान के साथ दफना देगी। लेकिन इसके पहले इनके डीएनए संग्रहित किए जाएंगे। ताकि बाद में इनकी पहचान की जा सके। गौरतलब है कि सरकार की तरफ से यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब लगातार मलबे के नीचे शव मिल रहे हैं। ऐसे में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।

नेपाल के स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार शवों को लंबे समय तक संभाल कर नहीं रख सकती। चितवन के अधिकारियों ने बताया कि शवों को सुरक्षित रखना मुश्किल होता जा रहा है। क्योंकि अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। संक्रमण फैलने के खतरे को देखते हुए शनिवार से ही अधिकारियों ने इन्हें दफनाने का फैसला लिया है। एक अधिकारी ने कहा, "जैसे-जैसे शवों की संख्या बढ़ रही है। हमारे पास जगह कम हो रही है। हमने एक घर का इस्तेमाल कूलिंग सेंटर के तौर पर किया है। लेकिन वह काफी नहीं है। इसलिए अब दफनाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।"

शवों को दफनाने से पहले लिए जाएंगे DNA सैंपल

अधिकारियों ने बताया कि इन अज्ञात शवों को दफनाने से पहले उनके डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं। ताकि बाद में उनकी पहचान की जा सके। शवों को पहचान और रेफरेंस नंबर भी दिए जा रहे हैं और उनका पूरा रिकॉर्ड रखा जा रहा है, ताकि भविष्य में DNA मैच होने पर रिश्तेदार शवों को ढूंढ सकें और उन्हें वापस ले सकें। अभी तक 100 शवों के डीएनए सैंपल लिए जा चुके हैं। उन्हें दफनाने की तैयारी की जा रही है।

दफनाने में होगी अलग तकनीक

नेपाली अधिकारियों के मुताबिक शवों को दफनाने के लिए 1.5 मीटर गहरे गड्ढे खोदे जा रहे हैं। ताकि बाद में शव की आसानी से पहचान की जा सके। उन्होंने कहा कि हर शव के बीच में 40 सेंटीमीटर की जगह छोड़ रहे हैं। ताकि किसी खास शव को दूसरों को छेड़े बिना निकाला जा सके। हर शव को एक ऐसे बैग में रखा जा रहा है जिस पर उसका पहचान नंबर लिखा है। हर दफनाने की जगह पर एक कंक्रीट का चबूतरा और साइनबोर्ड भी लगाया जा रहा है, जिस पर संबंधित पहचान नंबर लिखा होगा। इसके अलावा, अधिकारी दफनाने की प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो भी रिकॉर्ड करने की योजना बना रहे हैं, और जगहों को जियो टैग किया जाएगा ताकि उन्हें सही-सही ढूंढा जा सके।

पूरे नेपाल से लिए जाएंगे डीएनए टेस्ट सैंपल

गुमशुदा परिवार के सदस्यों की तलाश कर रहे रिश्तेदार नेपाल भर के अस्पतालों में DNA सैंपल दे सकेंगे। टेस्टिंग पूरी होने के बाद, स्वास्थ्य विभाग उन सैंपल की तुलना बरामद शवों से मिले DNA से करेगा। अगर कोई मैच मिलता है, तो पुलिस संबंधित शव नंबर का इस्तेमाल करके आधिकारिक रिकॉर्ड देखेगी और शव को दफ़नाने की सही जगह का पता लगाएगी।

बता दें, नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने भी भारत के लोगों की पहचान के लिए परिजनों से डीएनए सैंपलों की मांग की है। ताकि समय रहते लोगों को उनके परिजनों के शव लौटाए जा सकें।