बेटी के भविष्य के लिए बचत: पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि में कौन सा विकल्प बेहतर? जानें पूरा गणित

बेटी के भविष्य के लिए पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि दोनों सरकारी बचत योजनाएं हैं, लेकिन ब्याज, अवधि और पैसे निकालने के नियम अलग हैं। SSY में 8.2% ब्याज मिलता है, जबकि पीपीएफ का ब्याज 7.1% है। वहीं PPF में SSY के मुकाबले ज्यादा लचीलापन मिलता है।

PPF vs Sukanya samriddhi

PPF vs Sukanya samriddhi

  • Published: 30 Aug 2026, 01:24 PM IST
  • Last Updated: 30 Aug 2026, 01:24 PM IST

बेटी की पढ़ाई, शादी या भविष्य की दूसरी जरूरतों के लिए समय रहते बचत शुरू करना हर माता-पिता की प्राथमिकता होती है। ऐसे में सही निवेश विकल्प चुनना आसान नहीं होता। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) दोनों ही सरकार समर्थित बचत योजनाएं हैं, लेकिन इनके नियम, ब्याज दर, निवेश अवधि और पैसे निकालने की सुविधा अलग-अलग है।

फिलहाल सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2% और PPF पर 7.1% ब्याज मिल रहा। यानी ब्याज के मामले में SSY आगे है, लेकिन इसमें पैसे निकालने की सुविधा काफी सीमित है। पीपीएफ में ब्याज थोड़ा कम है, लेकिन जरूरत पड़ने पर पैसा निकालने और खाते को आगे जारी रखने के ज्यादा विकल्प मिलते हैं।

सुकन्या समृद्धि योजना: बेटी के लिए खास और ज्यादा ब्याज वाली योजना
सुकन्या समृद्धि योजना खास तौर पर 10 साल से कम उम्र की बच्ची के लिए खोली जा सकती। खाते की मैच्योरिटी खाता खोलने की तारीख से 21 साल बाद होती है। हालांकि, इसमें पैसा जमा करने की जरूरत सिर्फ शुरुआती 15 साल तक होती है।

SSY उन माता-पिता के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है, जो अपनी बेटी के लिए अलग से लंबी अवधि का फंड बनाना चाहते हैं और उन्हें बीच में इस पैसे की जरूरत पड़ने की संभावना कम है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका 8.2% ब्याज है। हालांकि, ज्यादा ब्याज के साथ पैसे तक पहुंच के नियम भी सख्त हैं।

18 साल के बाद निकाला जा सकता है 50% पैसा
सुकन्या समृद्धि योजना में सामान्य जरूरत के लिए कभी भी पैसा निकालने की सुविधा नहीं है। बच्ची के 18 साल की उम्र पूरी करने के बाद खाते में मौजूद राशि का अधिकतम 50% निकाला जा सकता है। यह सुविधा मुख्य रूप से उच्च शिक्षा के खर्च के लिए दी जाती है।

निकासी की सीमा पिछले वित्त वर्ष के अंत में खाते में मौजूद राशि के आधार पर तय होती है। पूरी रकम एक साथ निकालना जरूरी नहीं है। जरूरत के हिसाब से निर्धारित नियमों के तहत किस्तों में भी राशि निकाली जा सकती है।

कुछ विशेष परिस्थितियों में खाता 21 साल पूरे होने से पहले बंद भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, बच्ची की 18 साल की उम्र के बाद शादी होने पर लागू शर्तों के अनुसार खाता बंद किया जा सकता है। खाताधारक की मृत्यु या गंभीर आर्थिक परिस्थितियों जैसे मामलों में भी निर्धारित नियमों के तहत समय से पहले बंद करने की अनुमति मिल सकती है।

PPF में कम ब्याज, लेकिन ज्यादा लचीलापन
पीपीएफ की शुरुआती अवधि 15 साल है। इसके बाद खाते को 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाया जा सकता है। यही नहीं, तय अवधि पूरी होने के बाद इसमें आंशिक निकासी और लोन जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।

पीपीएफ में समय से पहले खाता बंद करने की सुविधा भी है, लेकिन इसके लिए खाता खोलने वाले वित्त वर्ष के अंत से 5 साल पूरे होना जरूरी है और निर्धारित कारण होना चाहिए। इनमें खाताधारक, उसके पति/पत्नी, बच्चों या आश्रित माता-पिता की गंभीर बीमारी का इलाज, खाताधारक या उसके बच्चों की उच्च शिक्षा और खाताधारक की आवासीय स्थिति में बदलाव जैसे कारण शामिल हैं।

यानी PPF उन माता-पिता के लिए उपयोगी हो सकता है, जो बेटी के भविष्य के लिए बचत तो करना चाहते हैं, लेकिन पूरी रकम को सिर्फ बेटी से जुड़ी जरूरतों के लिए लॉक नहीं करना चाहते।

तो किसे चुनना बेहतर?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दोनों योजनाएं सरकारी समर्थन वाली हैं, लेकिन इनकी पात्रता, अवधि, ब्याज और निकासी के नियम अलग हैं। इसलिए चुनाव बच्चे की उम्र, निवेश की अवधि और पैसे के उद्देश्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

अगर लक्ष्य बेटी के नाम पर लंबी अवधि का एक समर्पित फंड तैयार करना है और बीच में पैसे की जरूरत नहीं होगी, तो SSY अपने ज्यादा ब्याज और विशेष संरचना के कारण बेहतर विकल्प हो सकती है।

वहीं, अगर लचीलापन ज्यादा महत्वपूर्ण है, तो पीपीएफ बेहतर साबित हो सकता है। यह बेटी की पढ़ाई के साथ परिवार के दूसरे दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

ऐसा भी जरूरी नहीं कि दोनों में से सिर्फ एक ही योजना चुनी जाए। आर्थिक क्षमता होने पर SSY में बेटी के लिए अलग फंड और PPF में परिवार के व्यापक दीर्घकालिक लक्ष्य के लिए निवेश किया जा सकता है। इस तरह दोनों योजनाओं की अलग-अलग खूबियों का फायदा उठाया जा सकता है।

(प्रियंका कुमारी)