विजय थलपति का किसानों और टीचरों को बड़ा तोहफा, सभी केस वापस; विपक्ष ने बवाल काट दिया

Sep 02, 2026 02:59 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई

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तमिलनाडु के CM विजय ने मई 2021 से अप्रैल 2026 के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों पर दर्ज केस वापस लेने का ऐलान किया। फैसले के बाद विधानसभा में विपक्ष ने सवाल उठाए और सरकार की मंशा पर चर्चा हुई।

किसानों और शिक्षकों को बड़ी राहत, CM विजय ने पुराने केस वापस लेने का किया ऐलान

किसानों और शिक्षकों को बड़ी राहत, CM विजय ने पुराने केस वापस लेने का किया ऐलान

तमिलनाडु की विजय थलपति सरकार ने पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में नियम 110 के तहत इसकी घोषणा की। सरकार के मुताबिक, मई 2021 से अप्रैल 2026 के बीच आजीविका, अधिकार और कल्याण से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे।

हालांकि, सरकार के इस फैसले के साथ ही विधानसभा में सियासी टकराव भी शुरू हो गया। विपक्ष ने फैसले की मंशा पर सवाल उठाए और मांग की कि नई सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रदर्शन करने वालों पर दर्ज मामलों में भी इसी तरह राहत दी जाए।

किन किसानों और शिक्षकों को मिलेगा फायदा?

सरकार के फैसले के दायरे में ऐसे किसान भी आएंगे, जिन्होंने तिरुवन्नामलाई में SIPCOT औद्योगिक क्षेत्र परियोजना का विरोध किया था। इनमें कुछ प्रदर्शनकारियों पर गुंडा एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी।

इसके अलावा प्रस्तावित परंदूर एयरपोर्ट के खिलाफ लंबे समय तक चले किसानों के आंदोलन में शामिल लोगों को भी राहत मिलेगी। किसान इस परियोजना के कारण कृषि भूमि, जलाशयों और आजीविका के नुकसान की आशंका को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों पर दर्ज मामलों को भी वापस लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री विजय थलपति ने फैसले को मानवीय और लोकतांत्रिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के दायरे में विरोध करने के अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, मामलों को वापस लेने से लोकतांत्रिक अधिकार मजबूत होंगे और सरकार तथा आम लोगों के बीच भरोसा बढ़ेगा।

विधानसभा में क्यों हुआ विवाद?

सरकार के फैसले का सहयोगी दलों और विपक्ष के कई सदस्यों ने स्वागत किया। हालांकि, DMK के व्हिप ईवी वेलु ने आरोप लगाया कि इस घोषणा के पीछे कोई ‘छिपा हुआ मकसद’ है। पूर्व मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने सवाल किया कि क्या सरकार पिछले 100 दिनों में फसल ऋण को लेकर प्रदर्शन करने वाले किसानों पर दर्ज मामलों को भी वापस लेगी। इस पर विधानसभा अध्यक्ष जेसी प्रभाकर ने हस्तक्षेप किया और वेलु की आपत्ति को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा के नियमों के तहत ही यह घोषणा की है।

उदयनिधि ने 5 हजार से ज्यादा मामलों का जिक्र किया

विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने इस दावे पर सवाल उठाया कि किसानों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने का यह तमिलनाडु सरकार का पहला फैसला है। उन्होंने कहा कि पिछली DMK सरकार ने हाइड्रोकार्बन और मीथेन परियोजनाओं, कुडनकुलम परमाणु संयंत्र, CAA और कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले किसानों और कार्यकर्ताओं पर दर्ज 5,000 से अधिक मामले वापस लिए थे।

उदयनिधि ने मौजूदा मंत्री वन्नियारासु का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वन्नियारासु खुद कुडनकुलम प्रदर्शन के दौरान मामले में दर्ज किए गए थे और यह पिछली सरकार द्वारा प्रदर्शन से जुड़े मामलों को वापस लेने का उदाहरण है।