सरिया, सीमेंट से लेकर रेत तक महंगा, घर बनाना हुआ जेब पर भारी

देश के 7 बड़े शहरों में 2021 से 2025 के बीच घरों की कीमत 59% बढ़ी, जबकि घर बनाने का खर्च 34% बढ़ा. बढ़ती जमीन और घर बनाने का खर्च खरीदारों के बजट पर दबाव बढ़ रहा है. घर की कीमत और उसे बनाने के खर्च के बीच अंतर लगातार

Written By : उफक साहिल |  Updated at : 03 Sep 2026 06:18 PM (IST)

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Housing inflation pushes home prices up 59 Percent while construction costs rise 34 Percent सरिया, सीमेंट से लेकर रेत तक महंगा, घर बनाना हुआ जेब पर भारी

घर खरीदना हुआ महंगा, बढ़ती कीमतों से खरीदारों के बजट पर दबाव

Source : Abplive

अपना घर बनाना आज के समय में पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है. पिछले 5 साल में घरों की कीमत जिस तेजी से बढ़ी है, उसने आम खरीदारों का बजट बिगाड़ दिया है. अनारॉक रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच देश के सात बड़े शहरों में घरों के औसत दाम 59% बढ़े हैं. वहीं, घर बनाने के खर्च में 34% की बढ़ोतरी हुई. यानी घरों की कीमत बढ़ने की रफ्तार बनाने के खर्च से काफी ज्यादा रही है.

प्रॉपर्टी की कीमत साल का करीब 12% की दर से बढ़ी, जबकि घर बनाने के खर्च में साल का बढ़ोतरी करीब 6.9% रही. यानी घर की कीमत और उसे बनाने के खर्च के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है. इस बढ़ोतरी में बनाने के खर्च की हिस्सेदारी करीब 66% रही, जबकि बाकी 34% में जमीन की कीमत, डेवलपर का मार्जिन और मांग सप्लाई जैसे वजह शामिल हैं.

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जमीन की कीमत ने बढ़ाई परेशानी

2021 से 2026 की पहले 6 महीने तक 7 प्रमुख शहरों में जमीन की कीमत करीब 50% से 120% तक बढ़ी. NCR में जमीन के दाम करीब 70% से 130% और बेंगलुरु में 60% से 120% तक बढ़े. खासकर अच्छी कनेक्टिविटी और नए इंफ्रास्ट्रक्चर वाले इलाकों में जमीन तेजी से महंगी हुई है. 

2021 में 1,000 वर्ग फुट का घर औसतन करीब 58.3 लाख का पड़ता था. 2025 में यही कीमत बढ़कर लगभग 92.6 लाख हो गई. यानी 5 साल में करीब 34 लाख से ज्यादा का फर्क आया. इससे खरीदारों को ज्यादा डाउन पेमेंट और बड़ा होम लोन लेना पड़ सकता है, जिससे EMI भी बढ़ेगी.

आगे और बढ़ सकता है घर बनाने का खर्च 

अनारॉक का अनुमान है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से घर बनाने के खर्च में 8% से 10% तक और बढ़ोतरी हो सकती है.  स्टील की कीमत करीब 20%, फ्यूल और साइट लॉजिस्टिक खर्च 15% से 20% और फिनिशिंग मैटेरियल्स 8% से 12% बढ़े हैं. एसी,वायरिंग,पाइपलाइन यानि MEP खर्च में भी 9% से 13% की बढ़ोतरी हुई है.

पहले से लॉन्च और बिक चुके प्रोजेक्ट्स में डेवलपर्स के लिए बढ़ी खर्च खरीदारों पर डालना आसान नहीं होगा. इससे उनके मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है. नए प्रोजेक्ट्स में कीमत बढ़ाने की गुंजाइश है, लेकिन सस्ते और कम कमाई वाले लोगों के लिए बने घरों की कीमत बढ़ने से उनकी मांग पर असर पड़ सकता है. इसे और आसान भाषा में ऐसे लिख सकते हैं. वहीं, महंगे और लग्जरी घरों के मामले में बढ़ा हुआ खर्च संभालना थोड़ा आसान हो सकता है. 

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About the author उफक साहिल

उफक साहिल ABP न्यूज़ के डिजिटल विंग में बतौर इंटर्न काम कर रही हैं. इन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत एक ऑनलाइन न्यूज़ प्लेटफॉर्म से की थी. वर्तमान में यह हैदराबाद में मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी में MA मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म की छात्रा हैं. इन्होंने बिहार में दरभंगा के कामेश्वरनगर स्थित ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है. अभी उफक एबीपी न्यूज़ वेबसाइट के बिजनेस और यूटिलिटी सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

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Published at : 03 Sep 2026 06:18 PM (IST)

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