बात है 90 के दशक की, जब मालवा रूरल एजुकेशन ट्रस्ट के तहत सरदार स्वर्ण सिंह भंगू की सोच के साथ इसे शुरू किया गया ताकि ज़रूरतमंद युवाओं को शिक्षा मिल सके आैर पंजाब के बच्चे शिक्षा से वंचित न रहें। इसके तहत बस्सी गुजरां में इंस्टिट्यूट चलाया गया।

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यहां न केवल पढ़ाई बल्कि महिलाओं के लिए इस पहल को देखते हुए मेरा पिंड 360 फाउंडेशन के फाउंडर भूपिंदर सिंह हुंदल ने ट्रस्ट के साथ राब्ता बढ़ाया। 2022 से बनी इस फाउंडेशन ने पंजाब दी रूह सेवा ग्रांट प्रोजेक्ट को स्व. स्वर्ण सिंह भंगू की सोच और काम को देखते हुए उन्हें समर्पित किया।

शुक्रवार को सेक्टर-27 के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रोजेक्ट की जानकारी दी गई। इसमें पहल से जुड़े एक्ट्रेस गुरप्रीत भंगू और उनके बेटे अमरवीर बागी, एक्टर मलकीत सिंह राउनी, पंजाब स्टेट फूड कमिशन चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा, एक्टर शविंदर महल, एक्टर पुखराज भल्ला, दविंदर एस गरचा मौजूद रहे।

इस दौरान बाल मुकंद शर्मा ने बताया - पंजाब के गांव-गांव में सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इनमें एनआरआई और कुछ पंजाबियों के पैतृक घरों को ग्रामीण विकास केंद्रों में बदला गया है। यहां लाइब्रेरी, टूल्स लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, आईटी प्रशिक्षण, किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को हैंडीक्राफ्ट सिखाने और ई-हेल्थ सुविधाओं जैसी सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

60 से ज्यादा गांव को जोड़ा गया है। दविंदर एस गरचा ने बताया - सेवा ग्रांट का उद्देश्य युवाओं में दूसरों की सेवा का भाव जगाने के साथ उन्हें प्रोजेक्ट प्लानिंग का व्यावहारिक अनुभव देना है। मलकीत सिंह रौनी ने बताया - इस प्रोजेक्ट के तहत पंजाब में रह रहे आैर एनआरआई पंजाबियों से अपील की जा रही है कि वह अपने गांव में इस प्रोजेक्ट को लागू करने में मदद करें।

किसी बच्चे की एजुकेशन को पूरा करने में मदद करें। इस प्रोजेक्ट के तहत अगर कोई किसी गांव में प्रोजेक्ट शुरू करना चाहेगा तो उसे शुरुआत में 10,000 रूपए दिए जाएंगे। जो प्रोजेक्ट को सही तरीके से रचनात्मक तौर पर चलाएगा, जिनका अच्छा आइडिया होगा, उस मुताबिक बेस्ट सेंटर्स को चुना जाएगा।

सबसे बेस्ट को 50,000 रूपए की ग्रांट, दूसरे बेस्ट को 40,000 रूपए की ग्रांट आैर तीसरे बेस्ट को 30,000 रूपए की ग्रांट दी जाएगी। जो सेंटर इस प्रोजेक्ट के साथ चल रहे हैं, वहां स्किल डेवलपमेंट के साथ लाइब्रेरी, साइबर सेफ्टी प्रोग्राम, डॉक्यूमेंटेशन सेंटर्स, कंप्यूटर एजुकेशन, कम्युनिकेशन आदि को जोड़ा है।

स्व. सरदार स्वर्ण सिंह भंगू का बेटा लौटा 22 साल बाद...

गुरप्रीत भंगू ने बताया- मैं और मेरे पति सरदार स्वर्ण सिंह भंगू शुरू से ही सोशल एक्टिविस्ट रहे हैं। वह एजुकेशन में नए आयाम गढ़ते गए और मैं थिएटर एजुकेशन को युवाओं तक पहुंचाती रही। हमने हमारे गांव का घर भी सोशल सर्विस के लिए किराए पर दिया और उससे जो पैसे आते हैं वह ज़रूरतमंद बच्चों की पढ़ाई पर लगाते हैं।

मेरे पति ने मेरे सपने को परवाज़ दी और आज जब वह शारीरिक तौर पर मेरे साथ नहीं, तब मैं उनके ख्वाब को बस्सी गुजरां में जारी प्रोजेक्ट के जरिए पूरा करने में मदद कर रही हूं। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए हमारा बेटा अमरवीर बागी ऑस्ट्रेलिया से वापिस आ गया है जो पिछले 22 साल से वहां रह रहा था।

वहीं अमरवीर बागी ने बताया- यह पंजाब दी रूह सेवा ग्रांट प्रोजेक्ट है, इससे कई पंजाबियों को जोड़ना है ताकि वह ज़रूरतमंदों की मदद के लिए आगे आ सकें। इससे जुड़ने के लिए www.merapind360.org पर विजिट कर सकते हैं।