'दूध का दूध,पानी का पानी हो जाएगा', नीशु आजाद का पत्थरबाजी पर नया दावा, पुलिस रिकॉर्डिंग का डाल दिया वीडियो
Published: Tuesday, September 8, 2026, 15:58 [IST]
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित शालीमार गार्डन इलाके में यूट्यूबर और कॉकरोच जनता पार्टी की कार्यकर्ता नीशु आजाद के घर हुए पथराव का मामला अब काफी उलझ गया है। नीशु का दावा है कि शनिवार (5 सितंबर) की रात करीब 11 बजे कुछ उपद्रवियों ने उनके मकान पर पत्थर बरसाए। पत्थर बालकनी को पार करते हुए सीधे किचन तक आ गिरे, जिससे उनका पूरा परिवार दहशत में आ गया।
नीशु ने सीधा शक स्वतंत्र भारद्वाज और उनके साथियों पर जताया है। उन्होंने दिल्ली और गाजियाबाद पुलिस से अपने माता-पिता की सुरक्षा की गुहार लगाई। लेकिन अब इस कहानी में पड़ोसियों के बयानों और एक पुलिस ऑडियो क्लिप ने नई बहस छेड़ दी है।
नीशु के आरोपों के बाद उनकी ही सोसायटी के लोग उनके खिलाफ खड़े हो गए हैं। ठीक बगल वाले फ्लैट में रहने वाले एक पड़ोसी ने इस घटना को पूरी तरह से मनगढ़ंत बता दिया। पड़ोसी का कहना है कि उनकी और नीशु के किचन की दीवार एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। अगर रात में इतनी तेज पत्थरबाजी होती तो सबसे पहले आवाज उनके घर में आती।
पड़ोसी के मुताबिक वहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और यह सिर्फ पब्लिसिटी पाने के लिए फैलाई गई फर्जी खबर है। हालांकि पुलिस जांच के बाद ही सच सामने आएगा। पड़ोसियों की बातें सामने आने के बाद नीशु आजाद ने पलटवार किया है।
नीशु ने पुलिस रिकॉर्डिंग शेयर कर पड़ोसियों को दिया ये जवाब?
पड़ोसियों के सवालों के बाद नीशु आजाद ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर साझा की। उनका दावा है कि यह पुलिस से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग है। नीशु के मुताबिक, इसमें पुलिसकर्मी दो युवकों के पकड़े जाने की बात कर रहे हैं।
रिकॉर्डिंग में एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर कहता सुनाई देता है कि दो लड़के मिले हैं और उन्होंने एक दुकान पर भी पत्थर फेंके हैं। नीशु उनसे पूछती हैं कि वे लोग क्या कर रहे थे। जवाब में कथित पुलिसकर्मी कहता है कि दोनों ने शराब पी रखी थी और पुलिस चौकी के लोगों को बुलाया गया है।
नीशु ने इसी रिकॉर्डिंग को आधार बनाकर पड़ोसियों के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा,
"अगर हमें झूठा कहा जा रहा है तो क्या पुलिस की बात को भी झूठ माना जाएगा? फिर भी अगर किसी को भरोसा नहीं है तो सीसीटीवी फुटेज निकलवाकर सबके सामने रख दीजिए। उसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।"
नीशु ने अपने वीडियो में सोसायटी के लोगों के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा जा रहा था कि उनके घर पर कोई पथराव नहीं हुआ और उन्होंने खुद यह सब किया। नीशु ने कहा,
"कुछ लोग कह रहे हैं कि हमारे घर पर कोई पत्थर नहीं फेंके गए और हमने खुद ही यह सब किया। अगर ऐसा है तो पुलिस से पूरे मामले की जानकारी ले लीजिए। पुलिस की रिकॉर्डिंग में आपको पता चल जाएगा कि मौके पर क्या कार्रवाई हुई थी।" अब नीशु का पूरा जोर दो चीजों पर है। पहला, सीसीटीवी फुटेज की जांच और दूसरा, मौके पर पहुंची पुलिस की कार्रवाई का रिकॉर्ड।
पुलिस और नीशु के बीच क्या बातचीत हुई?
वायरल ऑडियो में नीशु और पुलिस अधिकारी के बीच बातचीत में क्या हुआ।
नीशु: "हाँ जी सर, आपने क्या किया?"
पुलिस अफसर: "मैम दो लड़के मिले हैं, उन्होंने दुकान पर भी पत्थर फेंके हैं। हमने चौकी वालों को बुला लिया है"।
नीशु: "सर, वो लोग आखिर कर क्या रहे थे?"
पुलिस अफसर: "कुछ नहीं, दोनों ने बहुत ज्यादा दारू पी रखी है"।
नीशु (अपने पिता से): "पापा बात कीजिए, पुलिस अफसर बता रहे हैं कि दो लोगों ने बहुत ज्यादा नशा कर रखा है और उन्हें चौकी भिजवाया जा रहा है"।
नीशु आदाज के घर में आखिर हुआ क्या था?
नीशु आजाद के मुताबिक शनिवार यानी 5 सितंबर की रात करीब 11 बजे उनके घर की तरफ पत्थर फेंके गए। उनका दावा है कि पत्थर बालकनी से होते हुए किचन तक पहुंचे। घटना के वक्त परिवार घर में मौजूद था और अचानक हुई इस घटना से सभी घबरा गए।
नीशु ने सोशल मीडिया पर घर के अंदर और बालकनी में पड़े पत्थरों का जिक्र करते हुए वीडियो भी साझा किया। उन्होंने इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और उनके समर्थकों पर शक जताया है। साथ ही दिल्ली और गाजियाबाद पुलिस से अपने माता-पिता समेत परिवार की सुरक्षा की मांग की है।
पुलिस ने अभी किसी व्यक्ति को इस पथराव का जिम्मेदार नहीं बताया है। शालीमार गार्डन के एसीपी अतुल कुमार सिंह ने कहा है कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े आरोपों और तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
सोसायटी में क्यों बढ़ रही नाराजगी?
विवाद सिर्फ पथराव के आरोप तक सीमित नहीं है। सोसायटी के कुछ लोगों ने नीशु के वहां रहने को लेकर भी नाराजगी जताई है। एक महिला ने कहा कि लगातार विवादों के कारण सोसायटी के लोग असहज महसूस कर रहे हैं। उसने कहा,
"हम चाहते हैं कि ऐसे लोगों को यहां से हटाया जाए, ताकि सोसायटी का माहौल फिर सामान्य हो सके। जो भगवान को लेकर भी विवाद खड़ा कर सकता है, उससे आम लोगों को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।"
एक अन्य पड़ोसी ने दावा किया कि सोसायटी में रहने वाले ज्यादातर लोग चाहते हैं कि नीशु वहां से चली जाएं। उसने कहा,
"हमारे बच्चे यहां पढ़ने आए हैं। हम नहीं चाहते कि इस तरह के विवादों का असर उन पर पड़े। इसलिए हमें लगता है कि यहां माहौल शांत और सुरक्षित रहना चाहिए।"
इन बयानों से साफ है कि मामला अब सिर्फ नीशु और उनके कथित विरोधियों के बीच नहीं रह गया है। सोसायटी के भीतर भी इसे लेकर मतभेद सामने आ चुके हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल- CCTV से खुलेगा राज?
इस पूरे मामले में सबसे अहम चीज अब घटनास्थल का सीसीटीवी फुटेज हो सकता है। अगर कैमरों में पथराव या संदिग्ध लोगों की मौजूदगी रिकॉर्ड हुई है तो उससे घटना की तस्वीर साफ हो सकती है। वहीं पुलिस की कार्रवाई, मौके पर पकड़े गए लोगों और उनकी भूमिका से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
फिलहाल नीशु आजाद का दावा अपनी जगह है और पड़ोसियों के आरोप अपनी जगह। किसने पत्थर फेंके, क्या वास्तव में पथराव हुआ था और पुलिस ने मौके पर किन लोगों को पकड़ा था-इन सवालों का अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा।