मॉनसून सत्र अब तक औपचारिक रूप से क्यों नहीं हुआ खत्म, कांग्रेस बोली- दाल में कुछ काला
Sep 09, 2026 06:36 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।

सदन में मत विभाजन में भाग लेने वाले 528 सांसदों में से 298 ने इसके समर्थन में वोट दिया, जबकि 230 ने इसका विरोध किया। विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 मतों की जरूरत थी।

संसद के मॉनसून सत्र का समापन नहीं हुआ है।
Prorogation of monsoon session: संसद का मॉनसून सत्र अब तक औपचारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ है। कहें तो सत्रावसान नहीं हुआ है। इसको लेकर सियासत तेज हो गई है। हाल ही में खबर आई थी कि सरकार एक स्पेशल सत्र ला सकती है, जिसमें परिसीमन विधेयक को पास कराने की कोशिश की जा सकती है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। लोकसभा और राज्यसभा में मुख्य विपक्ष दल होने के नाते कांग्रेस ने कहा है कि 'दाल में कुछ काला' है।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है, लेकिन वह परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक बहुमत हासिल करने में सफल नहीं हो पाएगी। आपको बता दें कि लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही 13 अगस्त को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई।
टूट जाएगा रिकॉर्ड?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि आम तौर पर संसद के दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के तीन-चार दिन बाद ही सत्रावसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि 2015 में यह अंतर 28 दिन का था और वह रिकॉर्ड जल्द ही टूट जाएगा, क्योंकि इस साल के मॉनसून सत्र का सत्रावसान हुए बिना ही 27 दिन बीत चुके हैं।
रची जा रही है साजिश: जयराम रमेश
सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए रमेश ने पूछा कि क्या कोई साजिश रची जा रही है। रमेश ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, ''दाल में कुछ काला है। सरकार दो-तिहाई बहुमत पाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उनके पास अभी भी जरूरी संख्या नहीं है और वे इस लक्ष्य को पाने से बहुत दूर हैं। वे पार्टियों को तोड़ रहे हैं, लेकिन परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए बहुकलंकित दो तिहाई बहुमत हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाएंगे।''
बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को मोदी सरकार को एक झटका लगा, क्योंकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक निचले सदन में पारित नहीं हो सका था।
सदन में मत विभाजन में भाग लेने वाले 528 सांसदों में से 298 ने इसके समर्थन में वोट दिया, जबकि 230 ने इसका विरोध किया। विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 मतों की जरूरत थी।