Brics Summit 2026: ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत में दिग्गजों का पहुंचना शुरू हो गया है. रूसी राष्ट्रपति के बाद दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति, युगांडा के उपराष्ट्रपति समेत 2 देशों के विदेश मंत्री भी नई दिल्ली पहुंच गए हैं. राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने दिग्गजों का गर्मजोशी से स्वागत किया.
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 होना है. इसमें शामिल होने के लिए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे. दोनों का स्वागत कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने किया. दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स का सदस्य देश है, जबकि युगांडा 10 भागीदार देशों में से एक है. इससे पहले, उरुग्वे के विदेश मामलों के मंत्री मारियो लुबेटकिन नई दिल्ली पहुंचे. नाइजीरिया की विदेश मामलों की मंत्री बियांका ओडुमेग्वु-ओजुक्कु और फिलीपींस की विदेश मामलों की सचिव मारिया थेरेसा पी लाजारो भी शिखर सम्मेलन से पहले पहुंच गईं.
#WATCH | Vice President of Uganda Jessica Alupo arrives in India to take part in the BRICS Summit 2026. She is received by Union MoS Jayant Singh Chaudhary
Uganda holds BRICS Partner Country status along with Belarus, Bolivia, Cuba, Kazakhstan, Malaysia, Thailand, Nigeria,… pic.twitter.com/KD8765Vyzy
— ANI (@ANI) September 11, 2026
राष्ट्रपति पुतिन भी पहुंचे नई दिल्ली
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली पहुंच गए हैं. उनके आगमन पर विदेश मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया. रूस के अन्य प्रमुख प्रतिनिधि जो सुबह-सुबह पहुंचे, उनमें रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव शामिल थे. एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (एआईआईबी) के अध्यक्ष ज़ू जियायी भी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचे.
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12-13 सितंबर को होगा आयोजन
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा। भारत ने इस बार ब्रिक्स के लिए “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” को मुख्य विषय बनाया है. सम्मेलन में विकास, स्थिरता और नई तकनीक जैसे मुद्दों पर खास तौर पर चर्चा होगी. ब्रिक्स दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है. इसका उद्देश्य विकास, वित्त, तकनीक, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है. साथ ही, यह मंच वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ के हितों को मजबूत करने पर भी जोर देता है.
11 देशों का समूह है ब्रिक्स
ब्रिक्स में फिलहाल 11 देश शामिल हैं. इनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. भारत की 2026 की अध्यक्षता से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, इन 11 देशों की आबादी मिलकर दुनिया की कुल आबादी का करीब 49.5 प्रतिशत है. वहीं, वैश्विक जीडीपी में इनकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत और दुनिया के कुल व्यापार में करीब 26 प्रतिशत है. भारत को ऐसे समय में ब्रिक्स की अध्यक्षता मिली है, जब दुनिया आर्थिक बदलाव, नई तकनीक, भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की कमी जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है. ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन में इन मुद्दों पर मिलकर काम करने और सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा.
विस्तारित ब्रिक्स समूह विकास, जलवायु परिवर्तन, नई तकनीक, ऊर्जा और आर्थिक मजबूती जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करने का मंच देता है. इसके अलावा, वैश्विक संस्थाओं में जरूरी सुधारों को लेकर भी सदस्य देश चर्चा करते हैं. भारत की 2026 की अध्यक्षता का मुख्य लक्ष्य ब्रिक्स में शामिल नए और ज्यादा देशों को प्रभावी सहयोग में बदलना है. भारत अलग-अलग विचारों वाले सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने और ब्रिक्स के मौजूदा कामकाज को ज्यादा प्रभावी बनाने पर भी जोर दे रहा है.
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