छतरपुर में जिला अस्पताल के बाहर एक निजी सोनोग्राफी सेंटर पर जांच के लिए पहुंची एक महिला ने प्रसव पीड़ा के दौरान मेडिकल दुकान के सामने मृत शिशु को जन्म दे दिया। यह महिला शुक्रवार को राजनगर क्षेत्र के खजवा गांव से छतरपुर अल्ट्रासाउंड कराने आई थी।

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परिजनों ने बताया कि सोनोग्राफी सेंटर पर 1000 रुपए जमा कर नंबर लगाया गया था। करीब आधे घंटे के इंतजार के दौरान महिला को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। वह सेंटर के बगल में स्थित राजेंद्र मेडिकल दुकान के सामने जाकर बैठ गई, जहां कुछ ही देर में उसका प्रसव हो गया।

घटना की जानकारी मिलते ही जिला अस्पताल के प्रसूता वार्ड के स्टाफ ने तत्काल व्हीलचेयर और प्रशिक्षित नर्स को मौके पर भेजा। ,

मेडिकल दुकान के बाहर ही जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद महिला को व्हीलचेयर से जिला अस्पताल लाकर प्रसूता वार्ड में भर्ती कराया गया। यहां उसका इलाज चल रहा है।

प्रसव कराने वाले अस्पताल स्टाफ के अनुसार, नवजात मृत पैदा हुआ था। स्टाफ ने बताया कि बच्चे के शरीर का रंग काला और नीला पड़ा हुआ था। इससे आशंका है कि उसकी गर्भ में ही कई दिन पहले मौत हो चुकी थी।

हालांकि, बच्चे की मौत कब और किस कारण हुई, यह डॉक्टरी जांच के बाद ही साफ होगा।

महिला के पति दिव्यांग खजवा निवासी आरती पटेल (40) के परिजनों ने बताया कि करीब दो महीने पहले डॉक्टर ने सोनोग्राफी कराने की सलाह दी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उस समय जांच नहीं हो सकी थी। आरती के पति दिव्यांग हैं।

शुक्रवार को परिवार के कहने पर आरती का दामाद वीरेंद्र पटेल उसे छतरपुर लेकर आया था। उसके साथ करीब 12-13 साल की साली अंजलि भी थी। परिजनों के मुताबिक, राजनगर में डॉक्टरों ने गर्भ में बच्चे की हलचल न होने की बात सामने आने पर सोनोग्राफी कराने को कहा था। इसके बाद वे सीधे छतरपुर के सृष्टि सोनोग्राफी सेंटर पहुंचे और जांच के लिए 1000 रुपए जमा कर नंबर लगवाया।

प्रसव के बाद सोनोग्राफी सेंटर ने लौटाए ₹1000 प्रसव होने के बाद निजी सोनोग्राफी सेंटर की ओर से परिजनों को जमा किए गए ₹1000 वापस कर दिए गए। परिजनों ने इलाज और जांच में हुई देरी को लेकर सवाल उठाए हैं।

उनका आरोप है कि महिला को समय पर जांच और उपचार मिल जाता तो स्थिति स्पष्ट हो सकती थी। हालांकि बच्चे की मौत वास्तव में कब हुई और इसका कारण क्या था, यह चिकित्सकीय जांच का विषय है।

परिजन बोले हम जिला अस्पताल गये ही नहीं वहीं महिला के दामाद वीरेंद्र पटेल का कहना है कि मैं राजनगर से सीधा सोनोग्राफ़ी सेंटर लेकर आया जिला अस्पताल गया ही नहीं और न ही मुझे जाना था मुझसे मेरे ससुर ने सोनोग्राफ़ी करने भिजवाया था इसके बाद मैं वापिस चला जाता। पर सेंटकर के बाहर प्रसव पीड़ा हुई और प्रसव हो गया।

प्रसव होने के बाद मैं परेशान हो गया और सामने जिला अस्पताल पहुंचा और मेडिकल दुकान के बाहर प्रसव की जानकारी दी जहां अस्पताल स्टाफ तत्काल बाहर मौके पर पहुंचा और प्रसव के बाद की जरूरी प्रक्रिया पूरी कर महिला को जिला अस्पताल लेकर आए जहां उसका इलाज चल रहा है।

सिविल सर्जन बोले- प्रसूता अस्पताल आई ही नहीं थी जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि आरती पटेल प्रसव पीड़ा के दौरान जिला अस्पताल आई ही नहीं थी। उनके अनुसार, महिला का दामाद वीरेंद्र पटेल उसे सीधे अपीने गांव से जिला अस्पताल के बाहर स्थित सोनोग्राफी सेंटर लेकर पहुंचा था।

उन्होंने कहा कि यदि प्रसूता को सीधे जिला अस्पताल लाया जाता तो उसका परीक्षण और उपचार अस्पताल में ही किया जाता। उन्होंने बताया कि सेंटर के बाहर प्रसव होने की जानकारी प्रसूता वार्ड की इंचार्ज वर्षा चतुर्वेदी को लगी जहां उनके द्वारा अस्पताल के प्रशिक्षित स्टाफ को तत्काल मौके पर भेजा गया और प्रसव के बाद की आवश्यक प्रक्रिया कर महिला को सुरक्षित किया गया।

यहां नवजात मृत पैदा हुआ था और प्रथम दृष्टया उसकी गर्भ में कई दिन पहले ही मौत होने की बात सामने आई है। फिलहाल महिला जिला अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

मृत गर्भ से गर्भावती को था खतरा डॉक्टर का कहना है कि गनीमत रही की महिला छतरपुर आई थी और उसका पास में ही प्रसव हो गया। उसका बच्चा पहले ही मृत हो चुका था जिससे गर्भवती को भी खतरा हो सकता था।

मामले की जानकारी लगते ही तत्काल अस्पताल लाकर उसका प्रॉपर इलाज कराया अगर समय रहते वह उसे चिकित्सीय लाभ नहीं मिलता तो उसे भी खतरा जो सकता था।