गणेश चतुर्थी को क्यों कहते हैं 'कलंक चतुर्थी'? चंद्रमा का दर्शन क्यों है मना? जानें श्रीकृष्ण से जुड़ी कथा

Time Published: Sunday, September 13, 2026, 13:00 [IST]

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश के जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन देशभर में घरों और पंडालों में गणपति की स्थापना कर पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को आती है। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।

इस पर्व से कई धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं। इनमें एक खास मान्यता चंद्रमा के दर्शन से जुड़ी है। कहा जाता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चांद देखने से व्यक्ति पर झूठा आरोप लग सकता है। इसी वजह से इसे कलंक चतुर्थी भी कहा जाता है। आखिर इसके पीछे की कहानी क्या है? आइए जानते हैं।

Ganesh Chaturthi Kalank Chaturthi

गणेश जी ने चंद्रमा को क्यों दिया श्राप?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश हाथ में लड्डू लेकर अपने वाहन मूषक पर सवार होकर जा रहे थे। रास्ते में अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गिर पड़े। चंद्रदेव ने जब गणेश जी को गिरते देखा तो वह हंसने लगे। गणेश जी को चंद्रमा का यह व्यवहार अच्छा नहीं लगा। उन्हें लगा कि चंद्रदेव उनका मजाक उड़ा रहे हैं। इससे गणेश जी क्रोधित हो गए और उन्होंने चंद्रमा को श्राप दे दिया। कहा जाता है कि श्राप के कारण चंद्रमा का तेज धीरे-धीरे कम होने लगा।

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चंद्रमा ने शिवजी से मांगी मदद

श्राप मिलने के बाद चंद्रदेव परेशान हो गए। उन्होंने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी। मान्यता के अनुसार, चंद्रमा ने शिवलिंग स्थापित करके लंबे समय तक तपस्या की। चंद्रदेव की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें मृत्यु से बचाया। इसके बाद चंद्रदेव भगवान गणेश के पास पहुंचे और अपने व्यवहार के लिए उनसे माफी मांगी।

गणेश जी ने अपना श्राप पूरी तरह वापस नहीं लिया, लेकिन उसमें बदलाव कर दिया। उन्होंने कहा कि चंद्रमा का आकार 15 दिनों तक कम होगा और इसके बाद अगले 15 दिनों में वह फिर बढ़ने लगेगा।

गणेश चतुर्थी पर चांद देखने की मनाही क्यों?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश जी ने चंद्रमा से कहा था कि सामान्य दिनों में लोग उनके दर्शन कर सकेंगे, लेकिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से बचना होगा। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा देखने वाले व्यक्ति पर मिथ्या दोष लग सकता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति पर ऐसा आरोप लग सकता है, जो उसने किया ही नहीं है। इसी मान्यता के कारण गणेश चतुर्थी को कई जगह कलंक चतुर्थी भी कहा जाता है। श्रद्धालु इस दिन रात में चंद्र दर्शन करने से बचते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण से भी जुड़ी है कथा

चंद्र दर्शन से जुड़े मिथ्या दोष की एक कथा भगवान श्रीकृष्ण से भी जोड़ी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, श्रीकृष्ण ने एक बार चतुर्थी का चंद्रमा देख लिया था। इसके बाद उन पर स्यमंतक मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा। बाद में श्रीकृष्ण ने अपनी निर्दोषता साबित की। इस कथा को चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने के बाद लगने वाले मिथ्या दोष के उदाहरण के तौर पर बताया जाता है।

इस दिन चंद्र दर्शन से बचते हैं श्रद्धालु

गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा नहीं देखने की परंपरा इसी पौराणिक कथा से जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति को बिना वजह किसी आरोप, विवाद या बदनामी का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से गणेश भक्त इस दिन चंद्रमा के दर्शन से बचने की कोशिश करते हैं और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता में इसे गणेश जी के श्राप से जुड़ा विशेष नियम माना गया है।

Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसमें बताई गई बातें आस्था और परंपराओं से जुड़ी हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य या प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों और धार्मिक ग्रंथों में इन कथाओं के विवरण में अंतर मिल सकता है।

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