क्रेडिट कार्ड स्वाइप से मर्चेंट तक पैसा कितना और कैसे पहुंचता है? ये है पूरा हिसाब

कैसे पहुंचता है दुकानदार के खाते में पैसा?

जब भी आप दुकान पर Visa, Mastercard या RuPay क्रेडिट कार्ड स्वाइप करते हैं, तो जितनी रकम आपके अकाउंट से कटती है. उतनी पूरी रकम दुकानदार यानी मर्चेंट को नहीं मिलती है. इसमें से एक हिस्सा बैंकों और कार्ड नेटवर्क के बीच बंट जाता है. इसे ही मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) कहा जाता है. दूसरी तरफ UPI पेमेंट पर अभी तक यह चार्ज नहीं लगता, लेकिन अब सरकार 2000 रुपये से ऊपर के बिजनेस ट्रांजैक्शन पर MDR लाने पर विचार कर रही है. यानी अगर दुकान पर 2000 से ज्यादा का सामान आप खरीदते हैं और यूपीआई पेमेंट करते हैं तो उस पर MDR कट सकता है. अभी ये सिस्टम डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड पेमेंट में लागू होता है. आइए इस खबर में डिटेल में समझते हैं कि यह पूरा सिस्टम कैसे काम करता है, किसके हिस्से में कितना पैसा जाता है.

कैसे काम करता है सिस्टम

जब कोई ग्राहक Visa, Mastercard या RuPay क्रेडिट कार्ड स्वाइप करता है, तो इस लेनदेन में चार पक्ष शामिल होते हैं. पहला ग्राहक, दूसरा इश्यूइंग बैंक मलतब कि जिसने ग्राहक को कार्ड जारी किया, जैसे HDFC या SBI. इसके बाद तीसरा पक्ष कार्ड नेटवर्क (Visa/Mastercard/RuPay) है और चौथा सिस्टम एक्वायरिंग बैंक का है. यानी दुकानदार का बैंक, जो पेमेंट प्रोसेस कर मर्चेंट के खाते में पैसा जमा करता है.

Upi Payment (2)

उदाहरण से समझिए….

लखनऊ में विवेक अपनी पत्नी और बच्चों के साथ, लुलु मॉल में शॉपिंग करने जाते हैं. वहां बच्चे के लिए खिलौना, पत्नी के लिए कुछ प्रसाधन का सामान लेते हैं और दुकानदार उनको 3000 हजार रुपये का बिल थमा देता है. बिल देने के लिए वह अपना क्रेडिट कार्ड निकालते हैं, स्वाइप करते हैं और पिन डाल देते हैं. इसके बाद मर्चेंट के खाते में पैसा पहुंच जाता है. मगर दुकानदार को 2,940 रुपये ही मिलते हैं. सवाल है कि बाकी पैसा किससे पास गया. यहीं से MDR काम करता है. पैसा कितना मिलेगा यह तय मर्चेंट और बैंक के अपने एग्रीमेंट से तय होता है. अगर मान लीजिए MDR 2 प्रतिशत लागू है तो कितना पैसा कटेगा यह तीन स्टेप से होकर गुजरता है. पहले इश्यूइंग बैंक को पैसा जाता है, फिर कार्ड नेटवर्क जो भी हो उसे पैसा मिलता है और फिर दुकानदार की बैंक पैसा लेती है और लास्ट में टोटल एमडीआर कटकर मर्चेंट की स्क्रीन पर मैसेज फ्लैश होता है. 2,940 रुपये क्रेडिटेड इन योर अकाउंट. इसी तरह यह पूरा सिस्टम काम करता है. किसी एक के पास पैसा नहीं जाता है. बल्कि 3 पार्ट में बंट जाता है.

Kaha Ki Hai Company

कितना पैसा कटता है

भारत में क्रेडिट कार्ड पर MDR आमतौर पर 1% से 3% के बीच रहता है, जबकि डेबिट कार्ड पर यह करीब 0.25% से 1% तक सीमित होता है. इस कुल MDR के भी तीन हिस्से होते हैं. सबसे बड़ा हिस्सा इंटरचेंज फीस का होता है, जो कुल MDR का लगभग 70-80% तक होता है और इश्यूइंग बैंक को जाता है. इसके बाद स्कीम या असेसमेंट फीस आती है, जो कार्ड नेटवर्क (Visa/Mastercard/RuPay) का हिस्सा है और बाकी बचा एक्वायरर मार्कअप, जो एक्वायरिंग बैंक या पेमेंट गेटवे की कमाई होती है और यही एकमात्र हिस्सा है जिस पर मर्चेंट मोलभाव कर सकता है.

UPI मर्चेंट पर अभी का क्या हालिया मसला है?

UPI पर अभी P2M (व्यक्ति से मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर जीरो MDR लागू है. यानी छोटे दुकानदारों को UPI पेमेंट पर कोई कटौती नहीं झेलनी पड़ती. इसके बदले सरकार बैंकों और पेमेंट कंपनियों को हर साल इंसेंटिव देती रही है, लेकिन सरकार अब 2000 रुपये से ज्यादा की मर्चेंट पेमेंट पर MDR लगाने की तैयारी में है.

Upi Payment System

जिसमें भविष्य में 2,000 रुपये से ज्यादा के बिजनेस UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक MDR लगाने की इजाजत मिल सकती है. सरकार का कहना है कि इसका असर सिर्फ बड़े कारोबारी लेनदेन पर पड़ेगा. आम आदमी की रोजमर्रा की व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) पेमेंट या छोटी खरीदारी पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. अभी तक इसे लागू करने की तारीख और अंतिम दरें तय नहीं की गई हैं.

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है.  साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.

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