'राम जन्मभूमि फैसले से बहुत दुखी थी', स्वरा भास्कर ने क्यों आमिर, शाहरुख, सलमान खान को मैसेज कर मांगी थी माफी?

Time Published: Friday, September 18, 2026, 8:01 [IST]

Swara Bhasker on Ayodhya Verdict: बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में उन्होंने साल 2019 के अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद फैसले को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है।

स्वरा भास्कर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद वे इतनी परेशान थीं कि उन्होंने अपने फोन में सेव तमाम मुस्लिम दोस्तों, जिनमें आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान खान जैसे बड़े सितारे शामिल थे, उन सभी को मैसेज करके माफी मांगी थी।

Swara Bhasker on Ayodhya Verdict

राम मंदिर फैसले के बाद क्यों हुआ पछतावा?

'द मिडनाइट आवर' को दिए एक इंटरव्यू में स्वरा भास्कर और उनके पति फहाद अहमद ने अपनी प्रेम कहानी पर बात की। इसी दौरान स्वरा ने अयोध्या मामले से जुड़ी अपनी भावनाओं का जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद वह काफी परेशान थीं। उनका कहना था कि उन्हें यह फैसला गलत और अन्यायपूर्ण लगा। इसी भावना के चलते उन्होंने अपने फोनबुक में मौजूद मुस्लिम लोगों को व्यक्तिगत मैसेज भेजा।

स्वरा ने कहा,

"राम जन्मभूमि मामले का फैसला आने के बाद मैं बहुत दुखी थी। मैं सोच रही थी कि यह कैसा देश है और ऐसा फैसला कैसे आ सकता है। मुझे यह बहुत गलत और अन्यायपूर्ण लगा।"

स्वरा ने आगे बताया,

"मैंने अपने फोन में मौजूद मुस्लिम लोगों को मैसेज किया। आमिर खान, शाहरुख खान और सलमान सर से लेकर फहाद अहमद तक, मैंने सभी को अपनी बात बताई। मैं एक हिंदू हूं और उन्हें कहना चाहती थी कि मुझे इस बात का सच में अफसोस है। मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही है और मैं इस फैसले से सहमत नहीं हूं। यह मेरी निजी सोच है।"

स्वरा मुताबिक, कुछ लोगों ने उन्हें जवाब देकर कहा कि सब ठीक है और उन्हें इस तरह माफी मांगने की जरूरत नहीं थी।

2019 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया था?

अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को फैसला सुनाया था। पांच जजों की संविधान पीठ ने विवादित 2।77 एकड़ जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए देने का आदेश दिया था। साथ ही, मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का निर्देश दिया गया था।

फैसले में अदालत ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस को कानून का उल्लंघन माना था। हालांकि, जमीन के मालिकाना हक का फैसला अलग कानूनी आधार पर किया गया था। यही पहलू बाद में स्वरा भास्कर की आलोचना का केंद्र बना।

अयोध्या फैसले पर टिप्पणी से विवाद में आई थीं स्वरा भास्कर

फरवरी 2020 में मुंबई कलेक्टिव के एक कार्यक्रम में स्वरा ने अयोध्या फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद का विध्वंस गैरकानूनी माना, लेकिन उसी फैसले में मंदिर निर्माण के लिए जमीन देने का आदेश दिया।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि क्या देश ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां लोगों के मन में अदालतों और संविधान के प्रति भरोसे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बयान के बाद अधिवक्ता अनुज सक्सेना ने स्वरा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल से मंजूरी मांगी थी। उनका आरोप था कि स्वरा की टिप्पणी से सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

अटॉर्नी जनरल ने क्यों नहीं दी थी मंजूरी?

के. के. वेणुगोपाल ने स्वरा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि स्वरा भास्कर का पहला बयान उनकी निजी राय थी और उसमें अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली बात नहीं थी।

उन्होंने स्वरा के दूसरे बयान को भी सामान्य और अस्पष्ट माना। उनके मुताबिक, वह टिप्पणी किसी खास अदालत के खिलाफ नहीं थी। इसलिए उसे आपराधिक अवमानना का आधार नहीं बनाया जा सकता था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी संपर्क किया। उन्होंने भी इस मामले में सहमति देने से इनकार कर दिया था।

प्रोटेस्ट से शुरू हुई स्वरा और फहाद की कहानी

इंटरव्यू में स्वरा और फहाद ने बताया कि उनकी पहली मुलाकात एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर साथ काम करने लगे। स्वरा ने कहा कि फहाद का काम करने का तरीका उन्हें पसंद आया। स्वरा के मुताबिक, देश में जब भी कोई बड़ा मुद्दा सामने आता था, तो दोनों उस पर चर्चा करते थे। इसी तरह उनकी बातचीत आगे बढ़ती गई और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं।