ममता बनर्जी के गुट को मिला 'फुटबॉल खिलाड़ी' सिंबल, जानें अब किस नाम से जानी जाएगी पार्टी

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग ने पार्टी के मूल नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न "फूल और घास" के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है.

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग ने पार्टी के मूल नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न "फूल और घास" के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है.

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EC Bars Both TMC Factions from Using Party Name and Symbol Ahead of Bypolls

भारत निर्वाचन आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे आंतरिक विवाद पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग ने पार्टी के मूल नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न "फूल और घास" के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. 

दोनों गुटों को मिले नए नाम और चुनाव चिह्न  

 विवाद को ध्यान में रखते हुए आयोग ने दोनों पक्षों द्वारा दिए गए विकल्पों के आधार पर नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं.  अरूप रॉय की अगुवाई वाले गुट को "डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस" नाम दिया गया है और उनका चुनाव चिह्न "लिफाफा" तय किया गया है. दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को "ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस" के रूप में मान्यता दी गई है और उन्हें "फुटबॉल खिलाड़ी" चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है. ये दोनों दल पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के रूप में कार्य करेंगे.

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रिटर्निंग अधिकारियों को सख्त निर्देश

चुनाव आयोग के सचिव अश्वनी कुमार मोहाल द्वारा जारी इस आदेश में चुनावी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं.  आयोग ने पश्चिम बंगाल की 70-रेजीनगर व 210-नंदीग्राम विधानसभा सीटों और असम की 9-नगांव लोकसभा सीट के रिटर्निंग अफसरों को इस फैसले का पालन करने के लिए कहा है. इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) पूरी तरह से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 36 के नियमों के तहत ही संपन्न की जाएगी.

उपचुनाव के उम्मीदवारों के लिए राहत

पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों के साथ-साथ असम की नौगांव संसदीय सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है. नामांकन दाखिल करने के दौरान दोनों ही गुटों के उम्मीदवारों ने पुराने पार्टी नाम से पर्चे भरे थे, जिससे उनके नामांकन रद्द होने का खतरा पैदा हो गया था. मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए चुनाव आयोग ने विशेष निर्देश जारी कर सभी वैध उम्मीदवारों के नामांकन को उनके नए आवंटित दलों और चुनाव चिह्नों के तहत स्वीकार करने का आदेश दिया है.  

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