रबीउल आलम चौधरी कौन? रेजीनगर उपचुनाव में ड्रामा, ममता के उम्मीदवार ने नामांकन वापस लेकर अब लिया यू-टर्न

Time Published: Saturday, September 19, 2026, 14:17 [IST]

West Bengal By Election 2026: पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले नंदीग्राम से लेकर रेजीनगर तक जबरदस्त सियासी उठापटक चल रही है। 9 अक्टूबर को नतीजे आने हैं, लेकिन उससे पहले ही दोनों सीटों पर हर घंटे माहौल बदल रहा है।

सबसे बड़ा ड्रामा रेजीनगर सीट पर देखने को मिला, जहां तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) के कैंडिडेट रबीउल आलम चौधरी ने पहले पर्चा वापस खींचने की बात कहकर अपनी ही पार्टी की धड़कनें बढ़ा दीं। हालांकि, चंद घंटों के अंदर उन्होंने यू-टर्न ले लिया और साफ कर दिया कि वह पीछे नहीं हटने वाले। ऐसे में आइए जानते हैं कि रबीउल आलम चौधरी कौन हैं और रेजीनगर में क्या चल रहा है?

Rabiul Alam Chowdhury News

कौन हैं रबीउल आलम चौधरी?

रबीउल आलम चौधरी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के नेता हैं। 2021 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक के रूप में सेवाएं दीं। इससे पहले, वह 2013 और 2016 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। वह बेलडांगा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे नुरुल चौधरी के भतीजे हैं।

रेजीनगर का ड्रामा और रबीउल का यू-टर्न

शनिवार (19 सितंबर) को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख थी। सुबह-सुबह खबर आई कि रबीउल आलम चौधरी मैदान छोड़ने की तैयारी में हैं। इससे पार्टी में हड़कंप मच गया। जैसे ही यह बात मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक पहुंची, उन्होंने तुरंत रबीउल को फोन मिलाया। दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक सीधी बातचीत हुई। ममता के भरोसे के बाद रबीउल के तेवर पूरी तरह बदल गए और उन्होंने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई।

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा,

"मैंने अपना पर्चा वापस लेने का मन बना लिया था, पर दीदी से बात होने के बाद फैसला बदल दिया। दीदी ने मुझ पर पूरा भरोसा जताया है। मैं उनकी पार्टी का सच्चा सिपाही हूं और वही करूंगा जो वह कहेंगी।"

रबीउल ने आगे कहा, "अगर पार्टी का एक अकेला कार्यकर्ता भी मेरे साथ खड़ा रहेगा, तो भी मैं ममता बनर्जी के प्रतिनिधि के तौर पर यह चुनाव लड़ूंगा।" अब वह शनिवार से ही अपना धुआंधार चुनाव प्रचार शुरू कर रहे हैं।

नंदीग्राम में ममता गुट को क्यों लगा झटका?

रेजीनगर में तो बात संभल गई, लेकिन नंदीग्राम में ममता खेमे को बड़ा झटका लगा है। वहां से उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को अचानक अपना पर्चा वापस ले लिया। पर्चा वापस करने से कुछ ही घंटे पहले उन्होंने राज्य सचिवालय नबन्ना में नंदीग्राम के मौजूदा एमएलए और राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंद्रु अधिकारी से मुलाकात की थी।

शुरुआत में इसे सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात बताया गया, लेकिन इसके सियासी मायने कुछ ही देर में साफ हो गए। नए कैंडिडेट को उतारने का समय निकल चुका था, इसलिए ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में विरोधी गुट को पटखनी देने के लिए INDIA ब्लॉक के तहत कांग्रेस पार्टी का समर्थन करने का ऐलान कर दिया।

कांग्रेस कैंडिडेट की गिरफ्तारी और चुनाव निशान का खेल

ममता बनर्जी के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने के महज एक घंटे बाद ही एक नया मोड़ आ गया। बंगाल पुलिस ने मिलन प्रधान को पुराने मामले में अरेस्ट कर लिया। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, यह मामला साल 2007 के एक तिहरे हत्याकांड से जुड़ा हुआ है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग ने दोनों धड़ों को नए चुनाव निशान भी बांटे हैं। आगामी उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी खेमे को 'फुटबॉल खिलाड़ी' और रितब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले दूसरे खेमे को 'लिफाफा' चुनाव चिन्ह दिया गया है। अपनी उम्मीदवार संचिता डे के अचानक हटने पर ममता बनर्जी ने बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए उसे सीधे तौर पर 'जुमला पार्टी' करार दिया है।

रेजीनगर में क्यों पड़ रहे हैं वोट?

अब यह समझना जरूरी है कि आखिर रेजीनगर में उपचुनाव की नौबत क्यों आई। हालिया चुनाव में आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के मुखिया हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नौदा दोनों विधानसभा सीटों से एक साथ जीत दर्ज की थी। नियम के मुताबिक उन्हें एक सीट छोड़नी थी, इसलिए उन्होंने रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया। इसी खाली हुई सीट को जीतने के लिए अब ममता बनर्जी की साख दांव पर लगी है।