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करीब 600 करोड़ रुपए की लागत से तैयार बीआरटीएस प्रोजेक्ट को खत्म करने के लिए नगर निगम की ओर से जारी डिसमेंटलिंग टेंडर पर सवाल उठे हैं। टेंडर महज 45 हजार रुपए में एक फर्म को दिया गया है। आरोप है कि इसके तहत नारायणगढ़ से गोल्डन गेट तक बने बीआरटीएस ट्रैक के दोनों तरफ की लोहे की ग्रिल और 31 स्टेशनों को तोड़ा जाएगा। टूटने के बाद निकलने वाला लोहा, ढांचा और मलबा भी ठेकेदार के पास ही रहेगा।

सामाजिक कार्यकर्ता वरुण सरीन ने दावा किया है कि 31 स्टेशनों और ट्रैक की ग्रिल से निकलने वाले लोहे और मलबे की कीमत करीब 4 से 5 करोड़ रुपए हो सकती है। जिस सामग्री को बेचकर निगम को करोड़ों का राजस्व मिल सकता था, उसे ्र 45 हजार के टेंडर में ठेकेदार को क्यों सौंपा गया।

एक सिंगल स्टोरी स्टेशन से औसतन 15 टन लोहा निकल सकता है। इसकी बाजार कीमत करीब 3.60 लाख रुपए बताई गई है। डबल स्टोरी स्टेशन से करीब 8.50 लाख रुपए का लोहा निकलने का दावा है। इसके अलावा स्टेशन तोड़ने से निकलने वाला मलबा अलग है।

31 स्टेशनों के साथ ट्रैक की ग्रिल को जोड़कर उन्होंने कुल कीमत 4 से 5 करोड़ आंकी है। सरीन ने टेंडर को तुरंत रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है निगम की ओर से सरकारी संपत्ति से होने वाली संभावित आय को नजरअंदाज किया गया।

पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी नगर निगम के टेंडर पर सवाल उठाए। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए आरोप लगाया कि पूरे प्रोजेक्ट को नाममात्र राशि में खत्म किया जा रहा है। उन्होंने इसे विकास के बजाय सरकारी संपत्ति के नुकसान का मामला बताया और इस संबंध में सरकार से जवाब मांगा।

भाजपा जिला महासचिव संजीव कुमार ने कहा कि सरकार ने लोगों के 600 करोड़ रुपए खर्च करके तैयार प्रोजेक्ट को बंद कर दिया। उनके मुताबिक, प्रोजेक्ट को चलाने के बजाय अब उसे तोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। अगर इसमें करोड़ों का लोहा और मलबा निकलना है तो निगम को इससे राजस्व मिलना चाहिए था।

उन्होंने सरकार को पत्र लिखने और केंद्र से सीबीआई जांच की मांग करने की बात कही। बीआरटीएस प्रोजेक्ट को पूरी तरह खत्म करने के फैसले के बाद कई जगह ट्रैक खाली पड़े हैं। अब कुछ स्थानों पर भिखारियों और अन्य बाहर से आने वाले लोगों ने इस पर कब्जा करना शुरू कर दिया है।

नारायणगढ़ के पास बीआरटीएस ट्रैक पर कुछ लोगों ने झोपड़ियां तक बना ली हैं। ऐसे में प्रोजेक्ट को पूरी तरह हटाने के साथ खाली हुई जगह की निगरानी और इस्तेमाल को लेकर भी निगम के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। नारायणगढ़ बीआरटीएस स्टेशन में कब्जा बीआरटीएस कॉरिडोर में लगी ग्रिलें तोड़ी।