पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी खींचतान को खत्म करने के लिए पार्टी हाईकमान ने अब संगठन के जिला स्तर तक सीधे निगरानी शुरू कर दी है। पंजाब कांग्रेस प्रभारी और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव सचिन पायलट जिला कांग्रेस प्रधानों
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिला प्रधानों को प्रदेश के किसी गुट के बजाय सीधे प्रभारी को संगठन की जमीनी स्थिति की रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
पायलट ने जिला प्रधानों को एक साथ बड़ी संख्या में बुलाने के बजाय 4-4 के ग्रुप में दिल्ली बुलाकर बैठकें शुरू की हैं। इन बैठकों में संबंधित जिलों के संगठन की स्थिति, हलका इंचार्जों की सक्रियता, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियों का फीडबैक लिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार पायलट ने जिला प्रधानों को साफ संदेश दिया है कि संगठन में किसी भी नेता को व्यक्तिगत खेमेबाजी के बजाय पार्टी के फैसलों के अनुसार काम करना होगा।
सूत्रों का यह भी दावा है कि जो नेता खुले तौर पर गुटबाजी को बढ़ावा देगा या संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, ऐसे नेताओं को तत्काल पार्टी से बाहर करने की कोई चेतावनी नहीं दी गई।

22 सितंबर को सचिन पायलट ने पंजाब यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्षों और कार्यकारिणी के सदस्यों से मुलाकात की।
जानिए, पायलट की सीधी निगरानी क्यों जरूरी हुई?
- पार्टी में पद को लेकर खींचतान हुई: पंजाब कांग्रेस में प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री व जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के बीच नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद कई महीनों से चर्चा में रहे हैं। जुलाई में हाईकमान ने वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा था। जबकि, चन्नी को पार्टी की कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया। इसके बाद दोनों खेमों के बीच अधिकार क्षेत्र और पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं।
- कार्यक्रमों में हुई नारेबाजी: चन्नी खेमे से जुड़े नेताओं ने वड़िंग को प्रदेश प्रधान पद से हटाने की मांग उठाई थी। इस खेमे में सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए। दूसरी तरफ वड़िंग समर्थक खेमा संगठन में उनके नेतृत्व को बनाए रखने के पक्ष में रहा। इस विवाद के दौरान बैठकों और पार्टी कार्यक्रमों में अलग-अलग खेमों की सक्रियता, नारेबाजी और बहिष्कार तक की खबरें सामने आई थीं।
- पायलट की एंट्री के बाद बदला माहौल: 5 सितंबर 2026 को कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया। इसके बाद पायलट ने दोनों खेमों के नेताओं के साथ संवाद शुरू किया। चन्नी ने पायलट की नियुक्ति का स्वागत करते हुए इसे पंजाब कांग्रेस के लिए नई उम्मीद बताया था। वड़िंग ने भी पायलट के साथ काम करने की बात कही। 15 सितंबर को चंडीगढ़ में पायलट की मौजूदगी में वड़िंग, चन्नी और पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता एक मंच पर नजर आए। इस दौरान पायलट ने 2027 का विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ने और मुख्यमंत्री पद का चेहरा पहले से घोषित नहीं करने की लाइन रखी। इससे पार्टी ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की।

15 सितंबर को चंडीगढ़ में पायलट की मौजूदगी में वड़िंग और चन्नी ने हाथ मिलाया।
- पार्टी के कार्यक्रमों में दोबारा मतभेद दिखा: पायलट की मौजूदगी में कांग्रेस नेताओं की एकजुट तस्वीर भले ही सामने आई, लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी के कार्यक्रमों में पुराने मतभेद फिर दिखाई देने की खबरें भी सामने आई हैं। 25 सितंबर के एक प्रदर्शन में चन्नी और प्रताप सिंह बाजवा समेत कुछ वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर फिर पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर सवाल उठे। इस पर संबंधित नेताओं ने स्वास्थ्य और पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला दिया।
- अब जिला संगठन से फीडबैक ले रहे पायलट: यही वजह है कि पायलट अब केवल प्रदेश स्तर के नेताओं के साथ बैठक तक सीमित नहीं रहना चाहते। जिला प्रधानों से सीधे फीडबैक लेकर हाईकमान तक रिपोर्ट पहुंचाने की कवायद को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में यह देखा जा रहा है कि कौन सा जिला संगठन जमीन पर सक्रिय है, हलका इंचार्ज किस तरह काम कर रहे हैं और स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल की स्थिति क्या है।

शुक्रवार, 25 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चंडीगढ़ में हुए कांग्रेस के प्रदर्शन में राजा वड़िंग के साथ चन्नी और बाजवा नहीं दिखाई दिए।
कांग्रेस का संदेश- व्यक्ति नहीं, संगठन पहले
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस अब जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि पार्टी के भीतर मतभेदों को पीछे छोड़कर संगठन एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेगा। पायलट की रणनीति का एक अहम हिस्सा जिला और विधानसभा स्तर तक संगठन को सीधे हाईकमान की निगरानी में सक्रिय करना बताया जा रहा है।
फिलहाल वड़िंग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने हुए हैं और चन्नी कैंपेन कमेटी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच जिम्मेदारियों और राजनीतिक प्रभाव को लेकर पुरानी प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।