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- Leaving Behind Mud, Rotten Rations And A Burden Of Debt, 272 Families From Chandnidih, Diprapara And Bhatagaon Khudmuda Left Their Homes.
बाढ़ का पानी उतरा:पीछे छोड़ गया कीचड़, सड़ा राशन और कर्ज का बोझ
रायपुर33 मिनट पहले
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डिपरापारा और भाठागांव-खुड़मुड़ा के 272 परिवारों ने छोड़ा घर
तेज बारिश के चलते खारुन नदी में शनिवार को आई बाढ़ का पानी रविवार की शाम तक तेजी से उतरने लगा। हालांकि अभी भी खारुन में जलस्तर ऊंचा है, लेकिन डूबे हुए घरों से पानी निकल गया है। घरों से बाढ़ का पानी जरूर उतर गया है, लेकिन प्रभावितों पर नुकसान और कर्ज का बोझ जरूर चढ़ गया है।
राजधानी के चंदनीडीह, भाठागांव और डिपरापारा जैसे इलाके बाढ़ से गंभीर रूप से प्रभावित हुए। चंदनीडीह से 152 परिवारों को घर छोड़कर स्कूल और आंगनबाड़ी में शरण लेना पड़ा। इसी तरह 20 परिवारों को डिपरापारा के प्राथमिक स्कूल में शरण लेना पड़ा। भाठागांव केसरी बगीचा और खुड़मुड़ा इलाके के भी करीब 100 परिवारों को जान बचाने के लिए अपने घर और सामान छोड़कर निकलना पड़ा। अब जब पानी उतर चुका है, तो घर में हुए नुकसान और गंदगी देखकर लोग परेशान हो गए हैं।
घर अभी रहने लायक नहीं, करंट का भी खतरा: पानी उतरने के बावजूद प्रभावित मकान अभी रहने लायक नहीं हैं। घरों में कीचड़ जमा है और गीले इलेक्ट्रॉनिक सामान के कारण करंट का खतरा भी बना हुआ है। इसलिए चंदनीडीह, डिपरापारा और भाठागांव के प्रभावित लोग अब भी शरणस्थलों में रह रहे हैं। नगर निगम की ओर से उन्हें भोजन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं।
घर बर्बाद... अब सामान संभालने में जुटे लोग
कर्ज लेकर घर संवारने की मजबूरी
भाठागांव केसरी बगीचा निवासी नासिर अली अपने परिवार के साथ सभी सामान बाढ़ के पानी में छोड़कर निकले थे। सोमवार को जब वह वापस गए तो घर में रखा राशन, फर्नीचर, कार और बाइक पूरी तरह से खराब हो गई। घर के हर कोने पर कीचड़ और बाढ़ के निशान हैं। नासिर अली कहते हैं कि कर्ज लेकर ट्रैक्टर का कारोबार शुरू किया था। अब मेरी बाइक, ट्रैक्टर, कार के साथ घर की हर सामान खराब पड़ा हुआ है। इन्हें बनवाने और घर को ठीक करने में ही कर्ज लेना होगा।
घर के साथ फसल भी बर्बाद केसरी बगीचा के सुनील सोनकर का भी बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। सुनील सोनकर अपने पांच भाइयों के परिवार के साथ संयुक्त रूप से रहते हैं। संयुक्त परिवार अपनी 9 एकड़ की खेती और मजदूरी का काम करता हैं। मुख्य फसल के समय में आई बाढ़ से खेत में लगी पूरी फसल बर्बाद हो गई। जब भास्कर मौके का जायजा लेने पहुंचा तो वे अपने घर के भीतर से कीचड़ और बचा पानी निकालने में जुटे थे। सिर नीचे कर अपना काम करते हुए उन्होंने कहा कि खेत का फसल बर्बाद हो गई और घर में रखा सारा सामान। अब आगे क्या होगा, कैसे करेंगे यही चिंता सता रही है।
तैनात है हेल्थ की टीम प्रभावित क्षेत्रों के जलस्रोतों की जांच कर साफ पानी की सप्लाई सुनिश्चित करेंगे। सफाई, जल निकासी और एंटी लार्वा छिड़काव लगातार होगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावितों की जांच कर रही है। - संबित मिश्रा, आयुक्त, निगम
मुआवजा देने की तैयारी आरबीसी 6-4 के तहत बाढ़ से फसल, सामान सहित सभी तरह के नुकसान का सर्वे किया जा रहा है। जहां पानी उतर रहा है, वहां टीमें पहुंच रही हैं। कुछ गांवों में पानी बाकी है। सप्ताहभर में मुआवजा दिलाने की तैयारी है।- नंदकुमार चौबे, SDM, रायपुर
संक्रमण का खतरा, ठहरा पानी तुरंत निकालें बाढ़ का पानी कम होने के बाद ठहरे पानी में मलेरिया-डेंगू के लार्वा पनपने का खतरा बढ़ जाता है। प्रभावित क्षेत्रों से पानी की जल्द निकासी कर ब्लॉक नालियां खोलें और पेयजल पाइपलाइन के लीकेज जांचें। लोग साफ पानी और भोजन का सेवन करें। हाथों की नियमित सफाई के साथ फेस मास्क का उपयोग करें। बाढ़ के बाद संक्रमण का खतरा अधिक रहता है, इसलिए सेहत में थोड़ा भी बदलाव दिखे तो डॉक्टर से संपर्क करें।- डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा, विशेषज्ञ, जेएनएम
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