‘यह गांव बिकाऊ है, पानी दें और खरीद लें…’ महाराष्ट्र के इस गांव में लोगों ने क्यों दिया ये ऑफर?

सोलापुर के तुलशी गांव में पानी का संकट

Solapur Water Crisis: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में सूखे की भयावह तस्वीर सामने आई है. पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे माढा तालुका के तुलशी गांव के ग्रामीणों ने अब अपना पूरा गांव ही बेचने का ऐलान कर दिया है. गांव में जगह-जगह ‘यह गांव बिकाऊ है, कीमत पानी’ के बैनर लगाए गए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार उन्हें पीने और खेती के लिए पानी उपलब्ध नहीं करा पा रही है, इसलिए वे गांव बेचने को मजबूर हैं.

हैरानी की बात यह है कि गांव के पास से सीना-माढा सिंचाई परियोजना की नहर गुजरती है, लेकिन पिछले 26 साल से अधूरे पड़े काम के कारण ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने ग्रामसभा में गांव बेचने का प्रस्ताव पारित करने का भी दावा किया है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द पानी नहीं मिला तो उनका आंदोलन और तेज होगा.

भीषण जल संकट से जूझ रहा गांव

सोलापुर जिले के माढा तालुका का तुलशी गांव इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है. गांव में पीने के पानी से लेकर खेती और पशुओं के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं है. कुएं और जलस्रोत सूख चुके हैं. ग्रामीणों को पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. बारिश की कमी ने पहले से ही गंभीर जल संकट को और बढ़ा दिया है. खेतों में फसलें प्रभावित हो रही हैं.

किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. ऐसे में प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए ग्रामीणों ने पूरे गांव को ही बिक्री के लिए निकालने का अनोखा विरोध शुरू किया है. गांव के प्रवेश द्वार और ग्राम पंचायत की दीवारों पर ‘गांव बिकाऊ है’ के बोर्ड लगाए गए हैं. ग्रामीणों ने साफ किया है कि यह कोई वास्तविक बिक्री नहीं, बल्कि सरकार के खिलाफ उनका विरोध है.

गांव के सरपंच शरद मोरे ने क्या कहा?

तुलशी गांव की पानी की समस्या का सबसे बड़ा कारण सीना-माढा लिफ्ट सिंचाई परियोजना का अधूरा काम बताया जा रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले करीब 26 वर्षों से इस परियोजना की नहर के कुछ हिस्सों की खुदाई अधूरी है. गांव के सरपंच शरद मोरे के मुताबिक, परियोजना की नहर गांव के नजदीक से गुजरती है, लेकिन अधूरे काम के कारण गांव को इसका पानी नहीं मिल पा रहा है.

ग्रामीणों का दावा है कि नहर के सातवें और आठवें आउटलेट के पास करीब 800 मीटर खुदाई का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह काम पूरा हो जाए तो गांव की पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है. वर्ष 2024 में भी कृष्णा घाटी विकास निगम की ओर से इस योजना के जरिए तुलशी गांव को पानी उपलब्ध कराने की बात कही गई थी.

14 सितंबर को ग्रामीणों ने की थी भूख हड़ताल शुरू

हालांकि, ग्रामीणों के मुताबिक, अब तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिला है. पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन भी लगातार तेज हो रहा है. 14 सितंबर को ग्रामीणों ने पानी की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी. इसके बाद माढा तहसील कार्यालय के बाहर थाली बजाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.

गांव में पानी की किल्लत का असर अब सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है. सरपंच शरद मोरे के अनुसार, गांव के करीब 350 युवक अविवाहित हैं. पानी की गंभीर समस्या के कारण उनके विवाह में भी परेशानी आ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि पानी की कमी के चलते खेती और पशुपालन करना भी मुश्किल हो गया है.

ग्रामीणों का है ये आरोप

सरकार की जल जीवन मिशन योजना के तहत गांव में काम किए जाने के बावजूद ग्रामीणों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. स्थानीय जलस्रोत सूखने के कारण पानी की समस्या लगातार बनी हुई है. ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पानी की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं. यही वजह है कि ग्रामीणों ने अब गांव बेचने का बोर्ड लगाकर अपना आक्रोश जाहिर किया है.

करीब 7 हजार की आबादी वाला तुलशी गांव आज पानी के लिए संघर्ष कर रहा है. ग्रामीणों की मांग है कि सीना-माढा परियोजना का अधूरा काम जल्द पूरा किया जाए और गांव को पीने तथा सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए. एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और जलापूर्ति की योजनाओं पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ सोलापुर का तुलशी गांव पानी के लिए अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहा है. अब देखना होगा कि ग्रामीणों के इस अनोखे विरोध के बाद प्रशासन कब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान निकालता है.

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जयप्रकाश सिंह

जयप्रकाश सिंह

जयप्रकाश सिंह का नाम देश के चुनिंदा क्राइम रिपोर्टर में आता है. लंबे समय से टीवी जर्नलिस्ट के तौर पर सेवाएं जारीं. करीब तीन दशकों से सक्रिय पत्रकारिता का हिस्सा. प्रोड्यूसर, एंकर और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में मुंबई से कार्यरत. इसके पहले 2012 से 2022 तक मुंबई में इंडिया टीवी के ब्यूरो चीफ रहे. 2005 से 2012 तक नेटवर्क18 ग्रुप के आईबीएन7 चैनल में डिप्टी ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी संभाली. 2004 से 2005 तक सहारा समय मुंबई में बतौर सीनियर स्पेशल कॉरस्पॉन्डेंट काम किया. 2002 से 2004 तक मुंबई ब्यूरो में बीएजी फिल्म्स के चीफ रहे. नवभारत टाइम्स मुंबई में 1997 में जॉइन किया और यहां 2 साल काम किया. इससे पहले भी चार संस्थानों में काम किया.

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