जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा जंगल में छिपे रहने के दौरान अपने गोली के घावों के इलाज के लिए शहद का इस्तेमाल कर रहा था. ताकि उसके घाव जल्द भर सकें. इसका खुलासा उसके फोन से हुआ है. अधिकारियों के मुताबिक मूसा पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति का सहारा ले रहा था. अधिकारियों ने बताया कि वो पाकिस्तानी सेना के विशेष बल स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) का पूर्व कमांडो था.

दरअसल इस हफ्ते की शुरुआत में कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग में सेना के साथ मुठभेड़ में मूसा मारा गया था. बताया जा रहा है कि मूसा प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का क्षेत्र में मुख्य ऑपरेशनल कमांडर था. मूसा करीब एक दर्जन आतंकी हमलों में शामिल था. वो 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल था. पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस हमले में पर्यटकों समेत 26 लोगों की मौत हुई थी.

मुठभेड़ में लगी थी मूसा को गोली

अधिकारियों के मुताबिक जम्मू क्षेत्र के राजौरी इलाके में ऑपरेशन शेरुवाली के दौरान डोरीमल-गंभीर मुगला क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में मूसा को गोली लगी थी. दो आतंकवादियों की तलाश में यह अभियान 45 दिनों से अधिक समय तक चला था. बाद में पता चला कि फंसे हुए दोनों आतंकी मूसा और उसका साथी यासिर थे.

घाव भरने के लिए शहद का सहारा

बताया जा रहा है कि पुंछ और राजौरी के जंगलों में छिपे रहने के दौरान मूसा अपने घावों को जल्द से जल्द भरने के लिए उस पर शहद लगाता था. इलाके में सुरक्षा बलों ने चारों तरफ घेराबंदी की थी. जिसकी वजह से मूसा को इलाज नहीं मिल पा रहा था, इसलिए उसने घाव भरने और संक्रमण से बचाव के लिए शहद का सहारा लिया.

फोन में मिलीं तस्वीरें

सितंबर के पहले सप्ताह में यूसमर्ग के ऊंचाई वाले इलाके में यासिर के मारे जाने के बाद मूसा के पास से एक फोन बरामद हुआ. फोन में मूसा के शहद से उपचार किए गए घावों की तस्वीरें मिलीं. इन तस्वीरों को सीमा पार पाकिस्तान में मौजूद उनके आकाओं को भेजा गया था, ताकि उन्हें इस आतंकी की स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी जा सके. अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान में बैठे उसके आका यह सुनिश्चित करने के निर्देश दे रहे थे कि शहद शुद्ध हो, क्योंकि इससे मूसा के घाव जल्दी भरने में मदद मिल सकती थी.

विशेषज्ञों ने क्या कहा

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, घावों पर शहद के इस्तेमाल की परंपरा आयुर्वेद में लंबे समय से रही है. आल इंडिया डाक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडियन सिस्टम आफ मेडिसिन के अध्यक्ष डा. आरपी पाराशर ने बताया कि आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ सुश्रुत संहिता में शहद का इस्तेमाल व्रण चिकित्सा यानी घावों के उपचार में किया जाता रहा है. उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में शहद को शोधन यानी शुद्धिकरण और रोपण यानी घाव भरने वाले गुणों से युक्त माना गया है. आधुनिक शोध में भी शहद की उच्च आस्मोटिक गतिविधि, अम्लीय पीएच और कुछ प्रकार के शहद में हाइड्रोजन पेरोक्साइड बनने जैसी विशेषताओं को रोगाणुओं की वृद्धि रोकने और घाव के लिए अनुकूल वातावरण बनाने से जोड़ा गया है.

हालांकि डॉ. पाराशर ने ये भी कहा कि गोली से हुए घाव के इलाज में घाव को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है, क्योंकि उसमें बचे गोली के कण घाव भरने की प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि चिकित्सकीय उपचार में संक्रमण से बचाव के लिए रोगाणुमुक्त, चिकित्सा-उपयोग योग्य शहद का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

पांच साल से थी मूसा की तलाश

मूसा के मारे जाने के साथ ही जम्मू-कश्मीर में सक्रिय कुख्यात आतंकवादी कमांडर में से एक की पांच साल से जारी तलाश खत्म हो गई. अधिकारियों ने बताया कि मूसा सुरक्षा बल के जवानों और आम नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए एक दर्जन से अधिक बड़े आतंकी हमलों में सीधे तौर पर शामिल था.

कई आतंकी हमलों में शामिल था मूसा

उसने अप्रैल 2023 में पुंछ के भाटा धुरियां में हुए हमले की साजिश रची थी, जिसमें पांच जवान मारे गए थे। इसके बाद मई 2023 में राजौरी के कांडी जंगल में हुए विस्फोट में पांच कमांडो मारे गए थे. वहीं दिसंबर 2023 में उसने पुंछ के डेरा की गली में हुए हमले का नेतृत्व किया, जिसमें चार सैन्यकर्मी मारे गए थे. इसके बाद मई 2024 में शासितार के पास भारतीय वायु सेना के एक काफिले को निशाना बनाया गया, जिसमें एक वायुसैनिक की मौत हो गई थी.

साल 2024 के आखिर में मूसा ने आम लोगों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर दिया. उसने 20 अक्टूबर को गांदरबल में गगनगीर सुरंग परियोजना के निर्माण शिविर पर हमला कराया, जिसमें एक स्थानीय चिकित्सक समेत सात लोगों की मौत हो गई. इसके महज चार दिन बाद, उसके मॉड्यूल ने बुटापथरी में सेना के एक वाहन पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें दो जवानों और सेना के लिए काम करने वाले दो नागरिक पोर्टर की मौत हो गई.

जूही उरूषा खान

जूही उरूषा खान

जूही उरूषा खान पिछले 12 साल से पत्रकारिता से जुड़ी हुई हैं. भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से फिल्म जर्नलिज्म की पढ़ाई की. इसके बाद दिल्ली आकर BAG में एंटरटेनमेंट बीट पर इंटर्नशिप की. बाद में CNEB न्यूज चैनल में एंटरटेनमेंट बीट में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया, साथ ही प्रोग्रामिंग को भी देखा.<p></p>CNEB के बाद VOICE OF INDIA में  एंटरटेनमेंट बीट पर बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर काम करना शुरू किया. यहां से फिर जनसंदेश न्यूज चैनल के साथ जुड़ीं और प्रोग्रामिंग में काम किया. इसके बाद 4 REAL NEWS चैनल में करीब चार साल न्यूज के साथ ही प्रोग्रामिंग और धार्मिक शोज पर काम किया.<p></p>यहां से राज्यसभा टीवी का रुख किया और प्रोग्रामिंग में काम किया. इसके साथ ही एंकरिंग करना भी शुरू की. इसके बाद सूर्या समाचार में प्रोग्रामिंग में एंटरटेनमेंट बीट पर बतौर प्रोड्यूसर काम किया.<p></p>जी बिहार झारखंड में भी काम करने का अनुभव है. फिलहाल टीवी9 भारतवर्ष से जुड़ी हुई हैं.

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