जम्मू-कश्मीर में आतंकी अफजल गुरु के परिवार पर एक्शन… अवैध डेयरी फार्म पर चला बुलडोजर

आतंकी अफजल गुरु Image Credit source: TV9

जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु के परिवार के बाढ़-क्षेत्र की कब्जे वाली जमीन पर बने अवैध डेयरी शेड पर बुलडोजर चलाया गया. यह कार्रवाई सोपोर इलाके में राजस्व विभाग की टीम ने की. अफजल गुरु 2001 के संसद हमले के मामले में दोषी ठहराया गया था और 2013 में उसे फांसी दी गई थी.

प्रशासन के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मजिस्ट्रेट की अगुवाई में राजस्व विभाग की एक टीम ने यह तोड़-फोड़ अभियान चलाया. मंगलवार को तहसीलदार की अगुवाई में जिला प्रशासन, पुलिस, CRPF और SOG के साथ मिलकर गुलनार पार्क, आजाद गंज, बारामूला में अवैध कब्जा हटाने और तोड़-फोड़ का अभियान चलाया. इस अभियान के दौरान, गुलनार पार्क, आजाद गंज, बारामूला की रहने वाली तबस्सुम भुरू पत्नी अफजल गुरु के डेयरी फार्म के अवैध टिन शेड को गिरा दिया गया.

बाढ़-क्षेत्र की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा

इसके अलावा, अब्दुल रशीद भुरू के बेटे तारिक अहमद भुरू के रिहायशी घर के पास बना एक टिन शेड और टिन की बाड़ भी गिरा दी गई. प्रशासन का दावा है कि ये बाढ़-क्षेत्र की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाए गए थे.

आतंकवादी अफजल गुरु के परिवार का था डेयरी फार्म

सूत्रों के मुताबिक, यह डेयरी फार्म आतंकवादी अफजल गुरु के परिवार का था. यह फार्म सरकारी जमीन पर बना हुआ था. हालांकि प्रशासन ने इस कार्रवाई पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह ऑपरेशन मुख्य रिहायशी घर के आस-पास बने शेड और अन्य ढांचों तक ही सीमित था, क्योंकि इन्हें नियमों का उल्लंघन करके बनाया गया था.

2001 में संसद पर हमला

आतंकवादी मोहम्मद अफजल गुरु, आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा हुआ था। उसने दिसंबर 2001 में संसद पर हमले की साजिश रची थी और वह इस आतंकी हमले का मास्टरमाइंड था. अफजल समेत पांच आतंकवादियों ने संसद पर हमला किया था. सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में उसे मौत की सजा सुनाई थी और 2013 में इसी दिन उसे फांसी दी गई.

13 दिसंबर को संसद पर हमला

13 दिसंबर 2001 को संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा था. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच महिला आरक्षण बिल पर बहस हो रही थी. हालांकि बिल पर चर्चा होनी थी, लेकिन कार्यवाही सुबह 11:02 बजे स्थगित कर दी गई. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी संसद परिसर से जा चुके थे.

(इनपुट आदिल अब्दुल्ला)

मोहम्मद जुनेद अख्तर

मोहम्मद जुनेद अख्तर

मोहम्मद जुनेद अख्तर करीब 12 साल से मीडिया में काम कर रहे हैं. करियर की शुरुआत साल 2013 में 'अमर उजाला' गाजियाबाद से की थी. यहां इन्होंने करीब एक साल तक रेलवे, कलेक्ट्रेट और आरडब्ल्यूए जैसी बीट पर काम किया. फरवरी 2014 में नवोदय टाइम्स अखबार से जुड़ गए और गाजियाबाद में ही रेलवे, स्पोर्ट्स और एजुकेशन की बीट कवर की. करीब एक साल बाद 2015 में गाजियाबाद से दिल्ली ट्रांसफर हो गया. दिल्ली में अल्पसंख्यकों के मुद्दों के साथ जंतर-मंतर पर कई बड़े धरने-प्रदर्शन कवर किए. अगस्त 2016 में दिल्ली से नोएडा ट्रांसफर हो गया. नोएडा में क्राइम बीट पर लगातार करीब तीन साल काम किया. इसके बाद 2020 में लॉकडाउन के दौरान क्राइम के अलावा गौतमबुद्ध नगर के तीनों प्राधिकरण और दूसरी बीट भी कवर करने का मौका मिला. 2024 में ‘उत्तर प्रदेश टाइम्स’ की डिजिटल टीम को जॉइन कर लिया. इस दौरान 'उत्तर प्रदेश टाइम्स' की नोएडा डिजिटल साइट ट्राइसिटी टुडे में भी काम किया. जनवरी 2025 में न्यूज 24 डिजिटल टीम को जॉइन कर लिया. यहां जुनेद अख्तर ने बतौर सब एडिटर काम किया और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर काम किया. सितम्बर 2025 से TV9 भारतवर्ष की वेबसाइट में सीनियर सब एडिटर के तौर पर जुड़े.

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