दो दिन चली 118वीं ऑल इंडिया मेयर कॉन्फ्रेंस मंगलवार को संपन्न हो गई। देशभर से पहुंचे मेयरों ने एक सुर में मेयर का कार्यकाल 5 साल करने और अधिकारियों की एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट (एसीआर) लिखने की पावर देने की मांग उठाई। मेयरों का कहना था कि शहर की जन

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कॉन्फ्रेंस में पारित ‘चंडीगढ़ संकल्प’ की रिपोर्ट अब केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को भेजी जाएगी। राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर उन्हें कॉन्फ्रेंस में हुई चर्चाओं की जानकारी दी जाएगी। इसी दौरान चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने गुवाहाटी, कोल्हापुर और गंगटोक के मेयरों के साथ एमओयू किया। इसके तहत अब चारों शहर सफाई, कचरा प्रबंधन, पर्यावरण और डिजिटल गवर्नेंस समेत दूसरे सफल मॉडलों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे।

मेयर कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें...

गुवाहाटी, कोल्हापुर और गंगटोक से मिलकर होगा काम...

आईसीसीसी, एमआरएफ और सुखना लेक देख गए मेयर

चंडीगढ़ दौरे के दौरान तीनों शहरों के मेयर और उनके प्रतिनिधियों ने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, पिंक मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी, पार्क-गार्डन, सुखना लेक, रोज गार्डन और कैपिटल कॉम्प्लेक्स समेत शहर की प्रमुख सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने चंडीगढ़ की टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस, कचरा प्रबंधन, सफाई और पर्यावरण से जुड़े कामों में विशेष रुचि दिखाई।

चंडीगढ़ मेयर का कार्यकाल 5 नहीं, 2.5 साल करने की तैयारी... कॉन्फ्रेंस में मेयर का कार्यकाल 5 साल करने पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई, लेकिन चंडीगढ़ में ऐसा होने की संभावना काफी कम है। प्रशासक गुलाबचंद कटारिया का मानना है कि 1 साल का कार्यकाल कम है, लेकिन 5 साल का कार्यकाल अधिक हो सकता है।

नगर निगम के एक कार्यक्रम में भी उन्होंने यह बात कही थी। यूटी प्रशासन ने चंडीगढ़ मेयर का कार्यकाल ढाई साल करने का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा है। केंद्र सरकार के साथ अधिकारियों की बैठक हो चुकी है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले महीने तक इस पर फैसला हो जाएगा।

मेयर सौरभ जोशी ने गुवाहाटी के मेयर मृगेन सरनिया, कोल्हापुर की मेयर रूपारानी निकम और गंगटोक के मेयर त्शेरिंग पालदेन भूटिया के साथ एक्सप्रेशन ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य चारों शहरों के बीच नगर निगम की बेहतर व्यवस्थाओं की जानकारी साझा करना और एक-दूसरे के सफल मॉडल को स्थानीय जरूरतों के मुताबिक अपनाना है।

इस समझौते के तहत जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ नगर निगम के अधिकारी और तकनीकी टीमें भी आपस में अनुभव साझा करेंगी। इसमें स्वच्छता, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, पर्यावरण संरक्षण, पब्लिक स्पेस, नागरिक सुविधाएं, डिजिटल गवर्नेंस और शहरी विकास जैसे विषय शामिल रहेंगे।

गंगटोक-गुवाहाटी से पर्यावरण संरक्षण सीखेगा चंडीगढ़, हुआ समझौता

1. मेयरों ने मांग उठाई कि पूरे देश में मेयर का कार्यकाल समान रूप से 5 साल किया जाए।

2. अधिकारियों की एसीआर लिखने की पावर मेयर को मिले, ताकि अधिकारियों से प्रभावी ढंग से काम कराया जा सके।

3. मेयर के लिए सम्मानजनक वेतन और पेंशन का प्रावधान हो इसकी मांग भी उठाई गई।

4. पूर्व मेयरों की सलाह और अनुभव के लिए ‘एक्स-मेयर काउंसिल’ बनाई जाए।

5. बेहतर तकनीक के इस्तेमाल से नागरिक सुविधाओं की डिलीवरी और नगर निगमों के कामकाज को प्रभावी बनाने पर जोर।

6. विभिन्न शहरों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाना, ताकि एक शहर के सफल समाधान को दूसरा शहर भी अपना सके।

7. नियमित वर्चुअल मीटिंग्स, ऑनलाइन नॉलेज शेयरिंग प्रोग्राम और अधिकारियों के परस्पर अध्ययन दौरे किए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को ‘चंडीगढ़ संकल्प’ की रिपोर्ट भेजी जाएगी