Breastfeeding Tips : आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम किसी न किसी वजह से स्क्रीन से चिपके रहते हैं। नई मांओं के लिए भी यह आदत आम हो गई है। अक्सर महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग कराते समय सोशल मीडिया स्क्रॉल करती हैं, वीडियो देखती हैं, चैट करती हैं या ऑनलाइन शॉपिंग करने लगती हैं। देखने में यह एक सामान्य आदत लग सकती है, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आदत मां और बच्चे के बीच के इमोशनल बॉन्ड को कमजोर कर सकती है।
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां और बच्चे का जुड़ाव क्यों होता है खास
स्तनपान केवल बच्चे का पेट भरने का जरिया नहीं है, बल्कि यह मां और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध बनाने का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान बच्चा मां के चेहरे के भाव, आंखों का संपर्क, आवाज और स्पर्श से खुद को सुरक्षित महसूस करता है। जब मां बच्चे की तरफ देखकर मुस्कुराती है, उससे बात करती है या प्यार से सहलाती है, तो बच्चे के मस्तिष्क के विकास में मदद मिलती है। यही शुरुआती अनुभव आगे चलकर उसके सामाजिक और भावनात्मक व्यवहार की नींव रखते हैं।
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मोबाइल में व्यस्त रहने से कम हो सकता है आई कॉन्टैक्ट
शिशु जन्म के कुछ ही हफ्तों के भीतर अपने माता-पिता के चेहरे के हाव-भावों को पहचानना और उन पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है। यदि मां का अधिकांश ध्यान मोबाइल स्क्रीन पर रहता है, तो बच्चे के साथ होने वाला आई कॉन्टैक्ट कम हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार आई कॉन्टैक्ट टूटने से मां-बच्चे के बीच का शुरुआती नेचुरल कम्युनिकेशन प्रभावित होता है।
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बच्चे के शुरुआती विकास पर पड़ सकता है असर
बच्चे का दिमाग जीवन के पहले दो वर्षों में सबसे तेजी से विकसित होता है। इस फेज में वह अपने आसपास के लोगों की आवाज, चेहरे के भाव और स्पर्श से लगातार सीखता रहता है। यदि स्तनपान के समय मां लगातार फोन में व्यस्त रहती है, तो बच्चे को मिलने वाली प्रतिक्रियाएं कम हो सकती हैं। कुछ अध्ययनों में इस बात की ओर संकेत मिला है कि माता-पिता की अत्यधिक स्क्रीन व्यस्तता बच्चे के भाषा विकास और सामाजिक संवाद पर प्रभाव डाल सकती है।
कम्युनिकेशन और सोशल स्किल्स पर पड़ सकता है प्रभाव
शिशु सबसे पहले अपनी मां के साथ संवाद करना सीखता है। वह मुस्कान का जवाब मुस्कान से देता है, आवाज पहचानता है और धीरे-धीरे सामाजिक व्यवहार सीखता है। अगर स्तनपान के दौरान यह संवाद कम होता है, तो शुरुआती भाषा और सोशल स्किल्स के विकास की गति प्रभावित हो सकती है। इसलिए विशेषज्ञ इस समय को स्क्रीन-फ्री रखने की सलाह देते हैं।
बच्चे के संकेत समझने में हो सकती है देरी
हर बच्चा अपने तरीके से यह बताता है कि उसे भूख लगी है, वह संतुष्ट हो चुका है या उसे डकार दिलाने की जरूरत है। जब मां फोन में व्यस्त रहती है, तो वह इन बारीक सिग्नल्स को मिस कर देती है। इससे फीडिंग का नेचुरल साइकल प्रभावित हो सकता है और बच्चे की जरूरतों को समय पर समझना मुश्किल हो सकता है।
क्या मोबाइल रेडिएशन वास्तव में खतरनाक है?
अक्सर यह दावा किया जाता है कि स्तनपान के दौरान मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन बच्चे के मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य ग्लोबल हेल्थ संस्थाओं के वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, सामान्य मोबाइल उपयोग से निकलने वाले रेडियोफ्रीक्वेंसी एक्सपोजर से बच्चे के दूध या मस्तिष्क को सीधे नुकसान पहुंचने का कोई ठोस सबूत नहीं है। हालांकि, सबसे बड़ी चिंता रेडिएशन से ज्यादा 'डिजिटल डिस्ट्रैक्शन' (स्क्रीन की वजह से ध्यान भटकना) है। सावधानी के तौर पर यदि फोन की जरूरत न हो तो उसे दूर रखना एक अच्छी आदत मानी जाती है।
स्तनपान के दौरान अपनाएं ये अच्छी आदतें
यदि आप अपने बच्चे का बेहतर विकास चाहती हैं, तो इन आसान टिप्स को अपने रूटीन में जरूर शामिल करें:
फोन को रखें दूर: स्तनपान कराते समय मोबाइल को साइलेंट मोड पर डालकर खुद से दूर रखें ताकि आपका पूरा ध्यान केवल आपके बच्चे पर हो।
आई कॉन्टैक्ट बनाएं रखें: दूध पिलाते समय बच्चे के चेहरे को देखें, उससे धीमी आवाज में बातें करें या लोरी गाएं।
शांत माहौल चुनें: घर का एक ऐसा कोना चुनें जहां टीवी, तेज आवाज या किसी अन्य गैजेट का शोर न हो। शांत वातावरण मां और शिशु दोनों को तनावमुक्त रखता है।
जरूरत पड़ने पर ही छुएं फोन: यदि कोई बेहद जरूरी कॉल या मैसेज हो, तो ही फोन का इस्तेमाल करें और काम खत्म होते ही इसे तुरंत रख दें।
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FAQ
Q.
क्या स्तनपान के दौरान मोबाइल चलाने से दूध में रेडिएशन फैलता है?
A.
नहीं, वर्तमान वैज्ञानिक शोधों और WHO के अनुसार ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि सामान्य मोबाइल उपयोग से स्तनपान के दूध पर कोई बुरा असर पड़ता है।
Q.
ब्रेस्टफीडिंग के समय स्क्रीन टाइम से बच्चे पर क्या असर पड़ता है?
A.
इससे मां और बच्चे का आई कॉन्टैक्ट कम होता है, जिससे बच्चे के शुरुआती सामाजिक और भाषा विकास में देरी हो सकती है।
Q.
न्यू मॉम्स को ब्रेस्टफीडिंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
A.
मां को शांत माहौल में बैठकर, फोन से दूरी बनाकर और बच्चे के साथ पूरा भावनात्मक जुड़ाव रखते हुए स्तनपान कराना चाहिए।
Q.
क्या मोबाइल की लाइट से बच्चे की आंखों को नुकसान होता है?
A.
हां, अंधेरे कमरे में मोबाइल की तेज ब्राइटनेस या ब्लू लाइट बच्चे की नाजुक आंखों और उसकी नींद के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है।
Q.
बच्चे के भूखे होने या पेट भरने के संकेत क्या होते हैं?
A.
बच्चा हाथ-पैर चलाकर, रोकर या स्तन की तरफ मुड़कर भूख का संकेत देता है, वहीं पेट भरने पर वह दूध पीना छोड़ देता है या सो जाता है।