सिंधिया राज परिवार की अरबों की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) एक बार फिर कानूनी अड़चनों में फंस गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में बुधवार (7 अक्टूबर 2026) को इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद में समझौते पर सु
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बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की है। कोर्ट यह तय करेगा कि मामले में साक्ष्य के बाद फैसला दिया जाए या अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई के आधार पर ही निर्णय किया जाए।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना (त्रिपुरा राजघराने से संबंधित) की ओर से दाखिल आपत्ति आवेदन पर बहस हुई। प्रतिमा देवी का कहना है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए हैं।
प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब उनकी तीनों मौसियों राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्यप्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे ने न्यायालय में दिया है। उनका कहना है कि समझौते पर सभी की सहमति से हस्ताक्षर हुए थे। हस्ताक्षर के बाद सभी लोग वहां रुके, डिनर किया और अंत में फोटोग्राफ भी लिए गए।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मामले में साक्ष्य कराने की जरूरत नहीं है। दस्तावेज पर हस्ताक्षर सहमति से ही किए गए हैं।

पहले घोषित हुई थीं 'एक्स पार्टी', अब पूरा समझौता इन पर टिका
वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था। लंबे कानूनी विवाद के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से राजीनामा तैयार कर कोर्ट में पेश किया था।
मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार बनाया गया था। हालांकि, पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।
अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में आवेदन देकर मामले की कार्यवाही में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना हक देने की मांग की है। उन्होंने मौजूदा समझौता प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई है। पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनकी बेटियों को समझौते से बाहर रखे जाने के कारण राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।

सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद
ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ग्वालियर जिला कोर्ट में चल रहा विवाद अब अहम मोड़ पर पहुंच गया है। मामले के निपटारे में 78 साल पुराना विलय पत्र यानी 'द कोवेनेंट' महत्वपूर्ण दस्तावेज बनकर सामने आया है।
दिल्ली के नोटरी द्वारा सर्टिफाइड ट्रू कॉपी के रूप में प्रमाणित यह दस्तावेज कोर्ट के सामने पेश किया जा चुका है। इसमें मध्य भारत की रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और राजाओं को मिलने वाले टैक्स फ्री 'प्रिवी पर्स' (वार्षिक भत्ते) का ब्योरा दर्ज है।

पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी ने दाखिल की कैविएट
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कोर्ट में पारिवारिक समझौते का आवेदन पेश किया था। यह आवेदन आपसी सहमति से हुए समझौते के आधार पर था। प्रस्ताव के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनकी बुआ वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे के बीच संपत्ति का बंटवारा होना था।
इसी बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी ने अदालत में कैविएट दाखिल कर दी। प्रतिमा देवी नेपाल के राणा परिवार में विवाहित हैं। उनकी बहन रमा राजे भी अपनी मां पद्मावती राजे की कानूनी उत्तराधिकारी हैं।
प्रतिमा देवी का कहना है कि प्रस्तावित समझौते में उनका वैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहा है। इसलिए उनका पक्ष सुने बिना कोर्ट कोई अंतिम आदेश पारित न करे। इसके बाद अदालत ने प्रतिमा देवी को अपना पक्ष रखने का अधिकार दिया है।

प्रतिमा राजे, कोर्ट से निकलते हुए (फाइल फोटो)।
जानिए सिंधिया राज परिवार के पास कहां-कहां संपत्ति
निजी संपत्तियां
ग्वालियर और मध्यप्रदेश: जयविलास पैलेस (मुख्य परिसर, बंगला, कार्यालय, निशात कोठी, कमला भवन, गजरा भवन), सख्या विलास, सुसेरा कोठी, कुलेथ कोठी, टेकनपुर रिट्रीट, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस (जॉर्ज कैसल, हैप्पी विला), उज्जैन का कालियादेह पैलेस और गुना कोठी।
अन्य शहरों में संपत्तियां: मुंबई का 'समुद्र महल' (वर्ली), 'उषाकिरण' (कारमाइकल रोड), दादर में दुकान व आवास, दिल्ली की ग्वालियर हाउस कोठी (राजपुर रोड), आगरा कोठी, झांसी की पाडोन कोठी, वाराणसी का सिंधिया घाट, ऊटी में बैलफोर लॉज समेत 5 बंगले और पुणे का पद्माविलास।
छतरियां और मंदिर (निजी ट्रस्टों के प्रबंधन में): ग्वालियर का छतरी परिसर, लश्कर के विट्ठल और कोटेश्वर मंदिर, शिवपुरी की माधवराव और जीजा महाराज छतरी, उज्जैन का द्वारकाधीश संस्थान, काशी (गंगा महल), मथुरा, वृंदावन, अयोध्या और पुष्कर के मंदिर।
सरकार को सौंपी गई संपत्तियां
ग्वालियर: मोती महल पैलेस, गोरखी पैलेस, फूल बाग, जल बिहार और गेंदघर, गद्दी बैरक (किला), सरस्वती महल, कम्फू कोठी और तिगरा कोठी।
अन्य शहर और महानगर: शिवपुरी का भदैया कुंड और भूरा खो, चंदेरी के रामनगर, पंचमनगर और सिंहपुर महल, श्योपुर पैलेस, आगर की जावरा कोठी और शाजापुर का लाल बंगला।