भरतपुर शहर के जनाना हॉस्पिटल में शनिवार को एक नवजात बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों की लापरवाही के कारण बच्ची ने दम तोड़ा।

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हालांकि डॉक्टरों ने सांस नली में दूध जाने के बाद मौत होने की आशंका जताई है। सूचना मिलने पर मथुरा गेट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश से मामला शांत करवाया।

NICU वार्ड में रखा बच्ची का शव।

NICU वार्ड में रखा बच्ची का शव।

अब 3 पॉइंट्स में सिलसिलेवार पढ़िए पूरा मामला

  1. बुखार से पीड़ित बच्ची को वार्ड-दर-वार्ड भटकाने का आरोप: सुभाष नगर निवासी लक्ष्मीकांत ने बताया- उनके छोटे भाई देवकीनंदन की पत्नी रिंकी को 8 अक्टूबर को प्रसव के लिए जनाना हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए रिंकी ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। हालांकि, शुक्रवार शाम को बच्ची को बुखार आ गया, जिसके बाद परिजन उसे NICU (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) में दिखाने ले गए। परिजनों का दावा है कि वहां मौजूद डॉक्टर ने केवल एक सिरप लिखकर दे दिया।
  2. डॉक्टर अंदर बैठे थे, लेकिन OPD ले जाने के लिए कह दिया: परिजनों का कहना है कि शनिवार सुबह करीब 6 बजे जब बच्ची की हालत बिगड़ी और वह कराहने लगी, तब भी उसे डॉक्टर को दिखाया गया। परिजनों के अनुसार, सुबह 10 बजे जब वे बच्ची को दोबारा NICU लेकर पहुंचे, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने यह कहकर टाल दिया कि अंदर डॉक्टर नहीं हैं, जबकि डॉक्टर अंदर ही मौजूद थे। कर्मचारियों ने परिजनों को बच्ची को OPD में ले जाने के लिए कह दिया।
  3. OPD में जाने तक बच्ची ने दम तोड़ दिया: जब परिजन बच्ची को PICU और फिर OPD लेकर पहुंचे, तो वहां मौजूद महिला डॉक्टर ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजन भड़क गए और हॉस्पिटल में हंगामा शुरू कर दिया। मृत बच्ची के ताऊ लक्ष्मीकांत ने कहा कि वे डॉक्टरों और जिम्मेदार कर्मचारियों की लापरवाही के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज करवाएंगे।

डॉक्टर बोले- दूध सांस की नली में फंसने की आशंका मामले में NICU के डॉक्टर शेखर शर्मा ने बताया- नवजात को दो बार उनके पास लाया गया था और दोनों ही बार डॉक्टरों ने उसे पूरी गंभीरता से अटेंड किया और दवाइयां भी लिखीं।

डॉ. शर्मा के अनुसार, कई बार नवजात बच्चों को दूध पिलाते समय दूध उनकी सांस की नली में चला जाता है, जिससे कुछ ही क्षणों में बच्चे की मौत हो जाती है। ऐसे मामलों में बच्चे को तुरंत संभाल पाना बेहद मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल की ओर से बच्ची को बचाने का हर संभव प्रयास किया गया था। हालांकि फिलहाल हॉस्पिटल प्रशासन और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।