दतिया उपचुनाव: किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना सिंह ने चुनावी अखाड़े में ठोकी ताल, किया नामांकन दाखिल
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सार
Datia By Election: दतिया उपचुनाव में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना सिंह ने भरा पर्चा, MP की पहली ट्रांसजेंडर सरकारी कर्मचारी से नेता बनने तक का प्रेरक सफर।

संजना सिंह (सोर्स- सोशल मीडिया)
विस्तार
Sanjana Singh Contesting For Datia By Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव इस बार महज एक राजनीतिक सीट का मुकाबला नहीं है। यह चुनाव भारतीय लोकतंत्र की मुख्यधारा में एक ऐसे वर्ग की भागीदारी का गवाह बनने जा रहा है, जिसे अब तक हाशिए पर देखा जाता रहा है। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना सिंह (संजना नंद गिरि) ने नामांकन दाखिल कर चुनावी अखाड़े में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।
संजना सिंह का चुनाव लड़ना केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि उनका उद्देश्य किन्नर समाज को नीति निर्माण की मुख्यधारा तक पहुंचाना है। संजना का मानना है कि एक ऐसे समाज के प्रतिनिधि के तौर पर, जिसका न तो कोई परिवार है और न ही कोई उत्तराधिकारी, वे किसी भी प्रकार के निजी स्वार्थ या भ्रष्टाचार से मुक्त होकर पूरी निष्ठा से जनता की सेवा कर सकती हैं।
एक प्रेरणादायक जीवन यात्रा
संजना सिंह की छवि एक बेहद शिक्षित और अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ता की रही है:
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- प्रशासनिक अनुभव: वे मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने वाली पहली ट्रांसजेंडर रहीं, जिन्होंने ‘सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग’ में कार्य किया।
- सक्रिय भागीदारी: स्वच्छ भारत मिशन और राज्य निर्वाचन आयोग की ‘स्टेट आइकॉन’ के रूप में उन्होंने समाज में जागरूकता का काम किया है।
- अध्यात्म और समाज: लगभग दो साल पहले सरकारी सेवा से इस्तीफा देकर उन्होंने किन्नर अखाड़े का दामन थामा और महामंडलेश्वर के रूप में समाज सेवा का नया रास्ता चुना।
किन्नर समाज की बदलती सोच और भागीदारी
इस चुनावी अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संजना सिंह के समर्थन में देशभर के किन्नर समुदाय और विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि दतिया पहुंच रहे हैं। उनका लक्ष्य केवल जीत हासिल करना नहीं है, बल्कि समाज के भीतर किन्नरों के प्रति बनी संकुचित सोच को बदलना और उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व का हक दिलाना है।
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इससे पहले भी शहनम मौसी ने विधायक बनकर की थी मिसाल कायम
मध्य प्रदेश की राजनीति में यह पहली बार नहीं है जब किन्नर समाज ने मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश किया हो। इससे पहले शबनम मौसी ने सुहागपुर सीट से विधायक बनकर एक मिसाल कायम की थी। अब संजना सिंह की यह दावेदारी दतिया की जनता के लिए एक नया विकल्प और लोकतंत्र के समावेशी स्वरूप को दर्शाने वाली एक बड़ी घटना बन गई है।
