राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने असम में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आईईडी लगाने के मामले में प्रतिबंधित संगठन उल्फा (आई) के प्रमुख परेश बरुआ समेत पांच आरोपियों के खिलाफ शुक्रवार को आरोपपत्र दाखिल किया। मामला 15 अगस्त 2024 को गुवाहाटी के पानबाजार इलाके में मोतीलाल नेहरू रोड पर एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) मिलने से जुड़ा है।



एनआईए के आधिकारिक बयान के मुताबिक, गुवाहाटी की विशेष एनआईए अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसमें परेश बरुआ के अलावा कनक सी. गोगोई उर्फ ऐशेंग असम, जाह्नु बोरोआ, भार्गव गोगोई और सुमू गोगोई को आरोपी बनाया गया है। म्यांमार से संचालित यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है। परेश बरुआ इस संगठन का प्रमुख और स्वयंभू कमांडर-इन-चीफ बताया गया है।

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कई जगह आईईडी धमाके करने की साजिश का आरोप


एनआईए के मुताबिक, आरोपी असम में कई स्थानों पर आईईडी धमाके करने की साजिश का हिस्सा थे। इसमें गुवाहाटी की मोतीलाल नेहरू रोड पर आईईडी लगाने का मामला भी शामिल है।

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National Investigation Agency tweets, "5 Charged in recovery of IED planted by ULFA at Panbazar, Guwahati Case" https://t.co/8NJALZc2im

— ANI (@ANI) October 17, 2026

जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस साजिश का मकसद भारतीय सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश करना था। कथित तौर पर धमाकों की योजना लोगों की जान लेने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरे में डालने तथा लोगों में आतंक फैलाने के लिए बनाई गई थी।



किन कानूनों के तहत आरोप?


एनआईए के बयान के अनुसार, पांचों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।



इस मामले में सबसे पहले 16 अगस्त 2024 को गुवाहाटी के पानबाजार पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया था। बाद में एनआईए ने 27 फरवरी 2025 को इसे अपने हाथ में लेकर दोबारा दर्ज किया और जांच शुरू की। एनआईए ने आरोपपत्र में कथित साजिश और आरोपियों की भूमिका का उल्लेख किया है। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया विशेष अदालत में चलेगी।