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बोकारो के कसमार प्रखंड के गर्री पंचायत के चौबे टोला में सिद्धपीठ दुर्गा मंदिर है, जो आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम है। यहां मिट्टी के एक छोटे से पिंड से शुरू हुई पूजा आज भव्य मंदिर में परिणित हो गई है। खास बात यह है कि पिछले 194 वर्षों से एक ही मंदिर में मां दुर्गा की दो प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मंदिर की स्थापना की कहानी 1833 से जुड़ी है। बताया जाता है कि संवत 1800 में रक्षपाल चौबे अपने पुत्र लक्ष्मण चौबे के साथ बिहार के बक्सर जिले के गरवा बस्ती से होते हुए मधुकरपुर के रास्ते गर्री आए और यहीं बस गए। लक्ष्मण चौबे के तीन पुत्र हुए, मोतीराम चौबे, उचित चौबे और नीलमाधव चौबे। एक बार उचित चौबे के पुत्र छत्रधारी चौबे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। उस दौर में वैद्य, हकीम या चिकित्सक की सुविधा नहीं थी। जब बालक के बचने की कोई उम्मीद नहीं रही, तो मोतीराम चौबे ने आकाश की ओर हाथ फैलाकर जगत जननी मां दुर्गा से मन्नत मांगी कि यदि भतीजा स्वस्थ हो गया, तो हर साल मां की पूजा करेंगे।

पंचायत गर्री

जनसंख्या 12000

मिट्टी के पिंड से भव्य मंदिर तक का सफर है जारी

शुरुआती दौर में पूजा मिट्टी के पिंड पर ही होती थी। बाद में ग्रामीणों और चौबे परिवार के सहयोग से यहां मंदिर का निर्माण कराया गया। करीब दो वर्ष पूर्व पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया, जिससे मंदिर को नया और आकर्षक स्वरूप मिला। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यहां बनी दो वेदी है। एक वार्षिक पूजा वेदी है, जहां 1833 से मां दुर्गा की पूजा की परंपरा चली आ रही है। दूसरी मानसिक पूजा वेदी है। करीब 74 वर्ष पहले स्थानीय शिक्षाविद और उच्च विद्यालय के संस्थापक भगवती शरण चौबे ने मन्नत पूरी होने पर शुरुआत की थी। तब से हर साल एक ही मंदिर में दो प्रतिमाएं स्थापित होती हैं।

इसे मनोकामना पूर्ण करने वाली सर्वशक्ति रूपा मां दुर्गा का सिद्धपीठ माना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। शारदीय नवरात्र में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, विशेषकर महाअष्टमी और महानवमी को आस्था का सैलाब उमड़ता है। यह मंदिर न सिर्फ कसमार-खैराचातर क्षेत्र बल्कि पूरे जिले के लिए आस्था और सांस्कृतिक एकता का केंद्र बना हुआ है।

कसमार चौबे टोला सिद्ध पीठ दुर्गा मंदिर में स्थापित प्रतिमा।

सिद्धपीठ के रूप में मिल रही प्रसि​द्धि

पूर्व में छलछलिया नाला, पश्चिम में कसमार पंचायत, उत्तर में पोंडा पंचायत व दक्षिण में मंजूरा सपाही टांड़।

कनेक्टिविटी

सभी तरह के वाहनों से आना-जाना होता है।

जिला मुख्यालय

से दूरी 32 किमी

पहचान कालौंधी बांध

साक्षरता दर 80 प्रतिशत