ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को बेवकूफ बनाने वाले राफेल फाइटर जेट के समुद्री वर्जन का टेस्ट शुरू हो चुका है. भारतीय नौसेना ने हाल ही में गोवा में राफेल मरीन फाइटर जेट के उड़ान परीक्षण शुरू किए हैं. इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य विमान में किए गए उन बदलावों को जांचना है जो आईएनएस विक्रांत जैसे स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनाती के लिए जरूरी हैं. ये परीक्षण विमान की वाहक-आधारित क्षमताओं को साबित करने और भारतीय नौसेना में शामिल करने से पहले उसकी उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे हैं. 

यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत ने 2025 में फ्रांस के साथ 26 राफेल मरीन विमानों का डील किया था. इनमें 22 सिंगल-सीट वाले फाइटर जेट और 4 डबल-सीट वाले ट्रेनिंग जेट शामिल हैं. इस सौदे की कुल लागत लगभग 63,000 से 64,000 करोड़ रुपये आंकी गई है. 

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Rafale Marine Undergoes Trials

इसमें सिर्फ विमान ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, सिमुलेटर, हथियार, संबंधित उपकरण और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल हैं. रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, विमानों की डिलीवरी 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है. यह समयसीमा भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अनुरूप है. ऑपरेशन सिंदूर में राफेल फाइटर जेट में लगे डिकॉय सिस्टम से पाकिस्तानी सेना बेवकूफ बन गई थी. उसने कहा कि राफेल मार गिराया है, लेकिन फ्रांस से मंगाया गया डिकॉय सिस्टम था. 

परीक्षणों का महत्व और तकनीकी पहलू

राफेल मरीन फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा विकसित किया गया समुद्री वर्जन है. यह जमीन पर चलने वाले राफेल से अलग है क्योंकि इसमें कैरियर पर उतरने और उड़ान भरने के लिए बदलाव किए गए हैं. जैसे मजबूत लैंडिंग गियर, फोल्डिंग विंग्स और कोरोजन-रोधी कोटिंग. 

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गोवा के परीक्षण इन बदलावों को भारतीय परिस्थितियों में जांच रहे हैं. INS विक्रांत पर संचालन के लिए विमान को भारतीय नौसेना की जरूरतों के मुताबिक ढाला जा रहा है. ये परीक्षण सफल रहने पर विमान को जल्द ही बेड़े में शामिल किया जा सकेगा, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की हवाई और समुद्री शक्ति बढ़ेगी.

Rafale Marine Undergoes Trials

यह सौदा सिर्फ खरीद नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है. फ्रांस के साथ रक्षा सहयोग पहले से मजबूत है. राफेल मरीन भारतीय वायुसेना में पहले से इस्तेमाल हो रहे राफेल विमानों से मिलता-जुलता होने के कारण रखरखाव और प्रशिक्षण में आसानी होगी. यह विमान उन्नत सेंसर, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं से लैस है जो आधुनिक युद्ध की मांगों को पूरा करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन विमानों से नौसेना की पहुंच और स्ट्राइक क्षमता काफी बढ़ जाएगी.

डिलीवरी शुरू होने तक भारतीय नौसेना को प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा. गोवा परीक्षण इसी तैयारी का हिस्सा हैं. समय पर डिलीवरी और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहेंगे. कुल मिलाकर, राफेल मरीन का आगमन भारतीय नौसेना को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करेगा और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भारत की भूमिका को मजबूत बनाएगा.

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