झारखंड के लाखों स्कूली बच्चों को पोशाक और स्वेटर का इंतजार, दीपावली तक खाते में आएगी राशि
Jharkhand News: झारखंड के लाखों सरकारी स्कूली बच्चों को पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा की राशि का इंतजार है. शिक्षा विभाग ने दीपावली के अंत तक सभी पात्र बच्चों के खातों में राशि भेजने का लक्ष्य रखा है.
Jharkhand News: झारखंड के लाखों सरकारी स्कूली बच्चों को पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा की राशि का इंतजार है. शिक्षा विभाग ने दीपावली के अंत तक सभी पात्र बच्चों के खातों में राशि भेजने का लक्ष्य रखा है.
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Jharkhand News:झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के पांच महीने बाद भी पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा के लिए मिलने वाली राशि का इंतजार है. दुर्गा पूजा बीत चुकी है और अब दीपावली व छठ का त्योहार नजदीक है. ऐसे में बच्चों और उनके अभिभावकों को उम्मीद है कि त्योहारों तक उन्हें नई पोशाक और गर्म कपड़ों के लिए आर्थिक सहायता मिल जाएगी. हालांकि, कुछ जिलों में वितरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन राज्य के सभी पात्र बच्चों तक लाभ पहुंचाना अभी बाकी है.
दीपावली तक राशि भेजने का लक्ष्य
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन ने बताया कि केंद्र सरकार से राशि का आवंटन हो चुका है. इसके बाद बच्चों को पोशाक और गर्म कपड़े उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. कई जिलों के स्कूलों में बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है और कुछ जगहों पर वितरण भी हो चुका है. उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य दीपावली के अंत तक सभी पात्र बच्चों के बैंक खातों में राशि भेजना है.
कक्षा के अनुसार मिलेगी राशि
समग्र शिक्षा योजना के तहत सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा खरीदने के लिए अलग-अलग राशि देने का प्रावधान है. कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को कुल 600 रुपये दिए जाने का प्रावधान है. इसमें दो सेट पोशाक के लिए 350 रुपये, स्वेटर के लिए 150 रुपये और जूता-मोजा के लिए 100 रुपये शामिल हैं. वहीं, कक्षा छह से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए 700 से 760 रुपये तक की व्यवस्था है. कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निर्धारित सामग्री के लिए 1,200 रुपये दिए जाने का प्रावधान है.
कहीं भुगतान पूरा, तो कहीं इंतजार
राज्य के सभी जिलों में राशि वितरण की स्थिति एक जैसी नहीं है. कुछ स्कूलों में बच्चों को सहायता मिल चुकी है, जबकि कई विद्यालयों में अब भी भुगतान और सामग्री मिलने का इंतजार है. कक्षा एक और दो के जिन बच्चों के बैंक खाते नहीं हैं, उनके लिए स्कूल प्रबंधन समितियों या स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा खरीदकर बांटने की व्यवस्था की जाती है. वहीं, अन्य पात्र विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जाती है. बैंक खातों और विद्यार्थियों के विवरण के सत्यापन में देरी होने से भुगतान प्रभावित हो सकता है.
ठंड से पहले स्वेटर और जूता-मोजा देना जरूरी
ठंड का मौसम नजदीक आने के कारण बच्चों को गर्म कपड़े उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है. कुछ जिलों में स्वयं सहायता समूहों और जेम पोर्टल के माध्यम से सामग्री खरीदने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है. ऐसे में समय पर खरीद और वितरण पूरा करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है. ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों की पोशाक और गर्म कपड़े खरीदना अतिरिक्त खर्च है. सरकारी सहायता मिलने से इन परिवारों को राहत मिल सकती है.
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