Jagannath Mandir Video on Sharad Purnima: हिंदू धर्म में 'शरद पूर्णिमा' का बहुत ही ख़ास महत्व है। हर साल अश्विन मास की पूर्णिमा को 'शरद पूर्णिमा' मनाई जाती है, जिसे 'कोजागरी पूर्णिमा' और 'रास पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि पूरे साल में केवल इसी दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण 16 कलाओं से सुशोभित होकर पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करता है। वहीं, शरद पूर्णिमा के मौके पर धरती के चारों धाम में से एक श्री जगन्नाथ पुरी धाम में अलग ही नजारा देखने को मिला। शरद पूर्णिमा के मौके पर पूर्ण चंद्रमा की धवल किरणें मंदिर के शिखर पर स्थित पवित्र नीलचक्र पर पड़ती दिखाई दी। कुदरत के इस अद्भुत नजारा का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जगन्नाथ पुरी में कुदरत का अद्भुत नजारा
सामने आए वीडियो में आप देख सकते हैं कि श्री जगन्नाथ मंदिर के पवित्र नीलचक्र के ठीक पीछे से चांद का दीदार हो रहा है। वो भी पूर्णिमा के दिन। प्रकृति के इस अद्भुत दृश्य का वीडियो शेयर करते हुए लोग कह रहे हैं ''शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर का दृश्य अत्यंत अलौकिक और दिव्य हो जाता है। जब पूर्ण चंद्रमा की धवल किरणें मंदिर के शिखर पर स्थित पवित्र नीलचक्र पर पड़ती हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं चंद्र देव महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए आकाश में प्रकट हुए हैं।''
क्यों मनाई जाती है शरद पूर्णिमा?
मां लक्ष्मी का पृथ्वी पर आगमन: मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात धन की देवी माता लक्ष्मी स्वयं धरती पर आती हैं और देखती है कि कौन सा भक्त सच्चे मन से उनकी भक्ति कर रहा है, इसी वजह से इसे 'कोजागरी पूर्णिमा' कहा जाता है। जो भी श्रद्धालु इस रात जागकर भजन-कीर्तन और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करते हैं, उन पर माता लक्ष्मी अपनी विशेष कृपा और धन-धान्य बरसाती हैं।
श्री कृष्ण की महारासलीला: द्वापर युग में इसी शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ 'महारास' रचाया था। माना जाता है कि जब कन्हैया ने अपनी मुरली की मधुर तान छेड़ी, तो गोपियाँ अपनी सुध-बुध खोकर खींची चली आईं और उनके साथ नृत्य करने लगीं। प्रभु की लीला ने उस रात को कई महीनों जितना लंबा कर दिया था। श्रीकृष्ण की इसी रासलीला के कारण इसे 'रास पूर्णिमा' भी कहा जाता है।
शरद पूर्णिमा पर अमृत वर्षा का रहस्य!
पौष्टिक आहार: शरद पूर्णिमा की खीर सिर्फ एक धार्मिक प्रसाद नहीं, बल्कि एक बेहतरीन स्वास्थ्यवर्धक औषधि भी है। दूध और चावल के मिश्रण में प्राकृतिक रूप से लैक्टिक एसिड होता है, जो चंद्रमा की दिव्य किरणों को सोख लेने (absorb) में बेहद मददगार है। जब इस खीर को रात भर खुले आसमान के नीचे चांदनी में रखा जाता है, तो यह चंद्रमा की औषधीय ऊर्जा से भरपूर हो जाती है। इस खीर को खाने से सांस (अस्थमा) और पित्त से जुड़ी बीमारियां दूर होती हैं और मन को अद्भुत शांति मिलती है।
Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।
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