‘जहां खोपड़ी मिली है, वहीं पर रंगोली, किताबें, लकड़ियां और भोजपत्र भी मिले हैं। इसका मतलब समझते हैं आप? मोमिना 22 दिन पहले कमाख्या में अंबूबाची मेले से लौटी,
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इसके बाद उसने अमावस्या की रात श्मशान सिद्धि की है। वह पहले हिंदू थी। बाद में मुस्लिम बनी, उसने डेढ़ साल की बेटी और दूसरे पति की बलि दी है। 2022 में उसने पहले पति को बीमार कर खाट पर ही खत्म कर दिया।
दूसरी बलि के बाद अब वह क्या करेगी, यह सोचकर पूरे गांव के लोग डरे हुए हैं। पुलिस उसे जेल में ही रखे, यही हम सबके लिए बेहतर होगा। अगर वह बाहर आई तो पूरे गांव का नाश कर देगी।’
ये बातें किशनगंज के उदगारा पंचायत के रहने वाले राज खान ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहीं। राज खान मृतक इमाम का पड़ोसी और करीबी मित्र रहा है।
बुधवार दोपहर मोमिना के दूसरे पति का सिर कटा शव बागडोगरा के हंसखुआ चायबगान में जंगल में मिला। पुलिस ने धड़ से करीब 5 किलोमीटर दूर उसका सिर फांसीदेवा से बरामद किया।
इस मामले में पश्चिम बंगाल की बागडोगरा पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके कथित बॉयफ्रेंड को गिरफ्तार कर पूछताछ की है। जिसमें दोनों ने हत्या के आरोप कबूल किए हैं, और उसने कई खुलासे भी किए।
क्या मोमिना ने तंत्र साधना के लिए पति की हत्या की? घटनास्थल पर साधना से जुड़े क्या-क्या सबूत मिले, उसकी डेढ़ साल की बेटी और पति की मौत कैसे हुई? उसने अब तक कितनी शादियां कीं? तंत्र-मंत्र को लेकर पड़ोसी राज खान और ग्रामीण क्या दावा कर रहे हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

पुलिस ने धड़ से 5 किमी दूर युवक का सिर बरामद किया है।
सिलसिलेवार पढ़िए, मोमिना की पूरी कहानी पुलिस पूछताछ में मोमिना ने बताया कि उसका असली नाम तुम्पा घोष है। साल 2004 में वह 17 साल की थी और पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी के खालपाड़ा इलाके में रहती थी।
उसने बताया कि जब वह 8-9 साल की थी, तभी उसकी मां का निधन हो गया था। पिता सिलिगुड़ी में रिक्शा चलाते थे।
आर्थिक तंगी के कारण कुछ समय तक उन्होंने उसे अपने एक दोस्त के घर रखा, लेकिन करीब दो महीने बाद वह वहां से भागकर अपने पैतृक घर खालपाड़ा लौट आई और चाचा के परिवार के साथ रहने लगी।
मोमिना के मुताबिक, साल 2005 में वह काम की तलाश में फिर सिलिगुड़ी पहुंची। अगले तीन साल तक उसने अलग-अलग दुकानों और अन्य जगहों पर काम किया।
इसी दौरान साल 2008 में उसकी मुलाकात किशनगंज निवासी अख्तर हुसैन से हुई, जो वहां मजदूरी करता था। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया।
लिव-इन के बाद शादी, फिर तुम्पा से मोमिना बनी मोमिना ने पुलिस को बताया कि वह और अख्तर करीब दो साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। इसके बाद साल 2011 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद वह किशनगंज आकर अख्तर के घर रहने लगी।
यहीं उसका नाम बदलकर तुम्पा से मोमिना कर दिया गया। शादी के एक साल बाद उसने एक बेटे को जन्म दिया। इसके बाद घर में सास, ससुर और देवर इमाम थे।
इमाम तंत्र-मंत्र और जड़ी-बूटियों से लोगों के इलाज का काम करता था। उसने अपना एक अलग कमरा बना रखा था, जहां अलग-अलग तरह के लोग अपनी समस्याएं लेकर आते थे और इमाम उन्हें जड़ी-बूटियां देता था।
घर में रहने के दौरान वह धीरे-धीरे देवर के काम को समझने लगी। इसी दौरान उसे पता चला कि इस काम में तांत्रिक गुरु सुदीप उसकी मदद करता है।
यहीं से तंत्र-मंत्र की दुनिया में बढ़ा कदम इमाम के पड़ोसी और दोस्त राज खान ने बताया कि सुदीप पश्चिम बंगाल के बागडोगरा का रहने वाला था। वह इमाम को तंत्र-विद्या में मदद करता था और बदले में उससे मोटी रकम वसूलता था।
राज खान ने बताया कि मोमिना घर में चल रही पूरी तंत्र-मंत्र की प्रक्रिया को करीब से देख रही थी। देवर इमाम घर बैठे ही अच्छी कमाई कर रहा था,
जबकि पति अख्तर सिलिगुड़ी में रहता था और सप्ताह में सिर्फ एक बार घर आता था। बेटे के जन्म के बाद मोमिना और उसके पति पर आर्थिक बोझ बढ़ गया।
पति की कमाई से घर का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा था। ऐसे में मोमिना ने देवर के काम में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। वह समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को इमाम के पास लाती थी, जिसके बदले उसे कमीशन मिलता था।
इसी दौरान उसकी देवर इमाम से नजदीकियां बढ़ने लगीं। जब इसकी जानकारी पति अख्तर को हुई तो उसने विरोध किया।
इसके बाद, राज खान के मुताबिक, साल 2014 में मोमिना और इमाम घर छोड़कर चले गए और दोनों ने दूसरी शादी कर ली।
इसके बाद दोनों तंत्र-मंत्र के जरिए लोगों का इलाज करने लगे और इसी काम से कमाई करने लगे। दोनों करीब 15 साल तक साथ रहे और उनके चार बच्चे हुए।

पति इमाम के साथ आरोपी पत्नी मोमिना की पुरानी तस्वीर।
गुरु सुदीप से हुई नई शुरुआत राज खान के मुताबिक, साल 2018 में मोमिना और इमाम के बीच पैसों को लेकर विवाद शुरू हो गया। इसके बाद दोनों के बीच लगातार अनबन होती रही।
इमाम के साथ काम करते-करते मोमिना के संपर्क काफी बढ़ गए थे। वह इमाम के पूरे कामकाज और तंत्र-मंत्र की जानकारी रखने लगी थी।
उसे यह भी पता चल गया था कि इमाम को यह विद्या कहां से मिली और कौन उसकी मदद करता है। राज खान के अनुसार, मोमिना अब खुद इस काम को करना चाहती थी।
इसी वजह से उसने साल 2019 में इमाम के गुरु सुदीप से मुलाकात की। वहां उसने अपना पुराना नाम तुम्पा बताया और अपनी पूरी जीवन यात्रा सुनाई।
इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। राज खान का दावा है कि यहीं तय हुआ कि सुदीप मोमिना को तंत्र-विद्या की सिद्धि कराएगा और इलाज करने की विद्या भी सिखाएगा।
राज खान के मुताबिक, इसके बाद दोनों की मुलाकातें लगातार बढ़ने लगीं। मोमिना पति से छिपकर सुदीप से मिलने लगी और उसके बताए रास्ते पर चलने लगी।
तारापीठ से कमाख्या तक तंत्र साधना के लिए पहुंची राज खान के अनुसार, साल 2020 में मोमिना सुदीप के साथ तारापीठ गई, जहां उसे भीमा नाम के एक तांत्रिक से मिलना था। वहां पहुंचने पर पता चला कि भीमा की दो साल पहले मौत हो चुकी है।
उसके बताए पते पर कोई दूसरा व्यक्ति उसी साधना में लगा था, लेकिन उसने मोमिना को विद्या सिखाने से इनकार कर दिया। हालांकि उसने कमाख्या का एक पता दिया।
इसके बाद दोनों कमाख्या पहुंचे, जहां हरिशंकर नाम के व्यक्ति से मुलाकात हुई। राज खान का दावा है कि हरिशंकर ने मोमिना को विद्या सिखाने का वादा किया, लेकिन सही मुहूर्त का इंतजार करने को कहा।
बाद में तय मुहूर्त पर उसने मोमिना को तंत्र-विद्या सिखाई। हालांकि, राज खान के मुताबिक, यह विद्या पूरी नहीं थी क्योंकि एक बड़ा अनुष्ठान बाकी था। उसका मानना है कि वही अनुष्ठान कथित मानव बलि से जुड़ा था।

अंबूबाची मेले के दौरान की तस्वीर।
बेटी की मौत और पहले पति की मौत पर भी सवाल राज खान के मुताबिक, साल 2020 में हरिशंकर से मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद मोमिना की डेढ़ साल की बेटी की मौत हो गई।
उनका दावा है कि आज तक किसी को उसकी मौत की असली वजह पता नहीं चल सकी और पुलिस भी इसकी जांच नहीं कर पाई। बच्ची को जल्दबाजी में दफना दिया गया।
राज खान ने बताया कि इसके बाद साल 2022 में मोमिना का पहला पति अख्तर हुसैन बीमार पड़ गया। वह कई महीनों तक बिस्तर पर रहा। राज खान का दावा है कि उसे कोई स्पष्ट बीमारी नहीं थी,
लेकिन उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
इलाज के नाम पर बढ़ता नेटवर्क
राज खान के मुताबिक, इसके बाद मोमिना अपनी सीखी हुई तंत्र-विद्या के जरिए लोगों का इलाज करने लगी और कमाई के मामले में इमाम से भी आगे निकल गई।
हालांकि वह इमाम के साथ ही रहती थी, लेकिन छिपकर सुदीप से मिलती रहती थी और उसी के इशारे पर काम करती थी। राज खान का कहना है कि यह सिलसिला करीब चार साल तक चलता रहा।
मनचाही इच्छा के लिए श्मशान साधना की राज खान के मुताबिक, साल 2026 आते-आते मोमिना अपने रोजमर्रा के काम से ऊब चुकी थी और कुछ बड़ा करना चाहती थी। उसने सुदीप के साथ मिलकर श्मशान साधना करने की योजना बनाई।
राज खान का दावा है कि कमाख्या के तांत्रिकों ने उन्हें बताया था कि इस साधना के पूरा होने पर मनचाही इच्छा पूरी होती है और दुश्मनों का नाश होता है।
राज खान के अनुसार, हत्या से करीब दो सप्ताह पहले मोमिना कमाख्या में आयोजित अंबूबाची मेले में गई थी। वहां वह तीन दिन तक रुकी और कई पुजारियों व तांत्रिकों से श्मशान साधना की जानकारी ली।
इसी दौरान साधना का मुहूर्त तय किया गया, जो 13 जुलाई 2026 की शाम 6:49 बजे से 14 जुलाई 2026 की दोपहर 3:12 बजे तक था। यह समय अमावस्या का था।
राज खान के मुताबिक, इस साधना के लिए एकाक्षी नारियल, सियार सिंगी, हत्था जोड़ी, कमलगट्टे की माला, भोजपत्र, श्मशान की भस्म और मानव खोपड़ी जैसी सामग्री जुटाई गई।

किशनगंज के पुजारी ने सामाग्रियों के बारे में बताया श्मशान सिद्धि और समाग्री को लेकर दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने किशनगंज स्थित एक मंदिर के पुजारी से बातचीत की, जिसमें उन्होंने नाम न लिखने की शर्त पर कहा कि घटनास्थल से जो सामान मिलने का दावा किया गया है वह श्मशान सिद्धि के उपयोग में आते हैं, साथ ही कुछ और भी सामाग्रियां जुटाई जाती है।
ऐसे रची गई हत्या की साजिश हत्या के बारे में मोमिना ने पुलिस को बताया कि सुदीप ने हत्या के दिन जलपाईगुड़ी से अपने बहनोई कौशिक नाथ को बुलाया। कौशिक पेशे से कसाई था, इसलिए वह अपने साथ धारदार हथियार भी लेकर आया। सोमवार दोपहर वह सुदीप के घर पहुंचा, जहां उसे खाना खिलाया गया।
इधर, मैंने इमाम को पेट दर्द का बहाना बनाकर बागडोगरा बुलाया और वहां से उसे हसखुआ चाय बागान ले गई। वहां पहले से सारी तैयारियां और लोग मौजूद थे।
सभी ने पहले पास की नहर में स्नान किया और फिर भोजन किया। खाना खाने के कुछ देर बाद, जब इमाम एक ओर बैठा था, तब मैंने कौशिक नाथ के हथियार से उस पर पहला वार किया।
रात करीब 11 बजे हुए इस हमले में इमाम जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद उसके गले पर लगातार वार किए और सिर धड़ से अलग कर दिया गया। बाद में सिर को करीब पांच किलोमीटर दूर फांसीदेवा इलाके में ले जाया गया।

हंसखुआ के चाय बगान में इमाम का धड़ मिला।
राज खान का दावा- तंत्र सिद्धि के लिए दी गई बलि राज खान का दावा है कि तंत्र-विद्या की सिद्धि के लिए ही इमाम की हत्या की गई। उनका कहना है कि जहां सिर बरामद हुआ, वहां तंत्र-मंत्र से जुड़े कई सामान मिले।
हालांकि बारिश के कारण काफी सामान इधर-उधर हो गया था, लेकिन रंगोली के निशान, मंत्र लिखे कागज, भोजपत्र और अन्य सामग्री मिली,
जिससे उनके अनुसार यह मामला सामान्य हत्या नहीं बल्कि तांत्रिक अनुष्ठान से जुड़ा प्रतीत होता है।
पुलिस का क्या कहना है? पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। हत्या के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। घटनास्थल से बरामद हुए एक-एक सामान को हासिल कर इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, मृतक के कटे हुए सिर और हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।