Cyclone Arnab School Closed in Chattisgarh: चक्रवाती तूफ़ान 'अर्णव' को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार पहले से ही अलर्ट मोड पर है। सरकार के दिशानिर्देश के अनुसार दंतेवाड़ा, बीजापुर, बालोद, कांकेर और राजनांदगाँव जिलों में जिला कलेक्टर के आदेश पर जिला शिक्षाधिकारियों ने बुधवार को स्कूलों में छुट्टी का आदेश जारी कर दिया है।

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वही अब प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के जिलाधीशों को पत्र लिखा है। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने कलेक्टरों को पत्र लिखकर कहा है कि, कलेक्टर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार स्कूलों में अवकाश पर फैसला लें। विभाग ने कहा है कि, राज्य के विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि है लिहाजा कलेक्टर जिलों की परिस्थितियों का आकलन करें और आवश्यकतानुसार स्कूलों में छुट्टियों के आदेश जारी करें।

बता दें कि, छत्तीसगढ़ में चक्रवात 'अर्नब' के प्रभाव से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में अगले दो दिनों तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही तेज हवाएं चलने, आंधी-तूफान आने और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम की इस स्थिति को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें।

रायपुर में गर्मी, अंबिकापुर में बढ़ी ठंड

राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तापमान में अंतर देखने को मिल रहा है। सोमवार को राजधानी रायपुर में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान गिरकर 12.9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जिससे सुबह और रात के समय ठंड का असर बढ़ गया है। चक्रवात के प्रभाव से आने वाले समय में बादल छाने और बारिश होने की संभावना है। मौसम में अचानक बदलाव के कारण लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खासकर बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर इमारतों से दूर रहने की बात कही है।

27 अक्टूबर को 21 जिलों में येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने 27 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के 21 जिलों में बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इनमें बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, जांजगीर-चांपा, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर और सरगुजा शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बारिश के साथ तेज हवाएं और गरज-चमक होने की संभावना है। राजधानी रायपुर में भी आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। यहां अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

28 अक्टूबर को बस्तर संभाग के तीन जिलों में रेड अलर्ट

28 अक्टूबर को दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में भारी से अति भारी बारिश और खराब मौसम का खतरा बना रह सकता है। इसके अलावा दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, बस्तर, कोंडागांव, कांकेर और नारायणपुर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और कबीरधाम समेत कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

29 अक्टूबर को चार जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

29 अक्टूबर को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली और कबीरधाम जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, कोरबा, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और राजनांदगांव में ऑरेंज अलर्ट रहेगा। मौसम विभाग ने बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने, सड़कों पर आवागमन प्रभावित होने और बिजली गिरने का खतरा बढ़ने की संभावना जताई है है।

आंधी-तूफान और बिजली गिरने के दौरान कैसे रहें सुरक्षित?

खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। तेज हवा चलने पर पेड़ों, होर्डिंग और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। आकाशीय बिजली चमकने के समय खुले मैदान, खेत और पानी वाली जगहों से दूर रहें। यदि आप बाहर हैं, तो जल्द से जल्द किसी मजबूत इमारत के अंदर सुरक्षित स्थान पर पहुंचें। बारिश के दौरान जलभराव वाली सड़कों और उफनते नालों को पार करने की कोशिश न करें। वाहन चलाते समय भी विशेष सतर्कता रखें। प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों को गंभीरता से लें और आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों की मदद लें।

अगले 48 घंटे क्यों हैं अहम?

मौसम विभाग के अनुसार, 28 और 29 अक्टूबर को कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा भी है। लोगों को बिना जरूरी काम के बाहर निकलने और खराब मौसम में यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है।

अर्नब चक्रवात का नाम किसने रखा?

चक्रवात अर्नब का नाम बांग्लादेश ने सुझाया है। यह उत्तर हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों के लिए तैयार आधिकारिक नामों की सूची में शामिल है। इस क्षेत्र में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर आते हैं। चक्रवातों के नाम तय करने के लिए 13 देशों ने मिलकर सूची तैयार की है। इनमें भारत, बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं। हर देश ने 13 नाम सुझाए हैं. इस तरह सूची में कुल 169 नाम हैं। संशोधित सूची को अप्रैल 2020 में अपनाया गया था. इन नामों का इस्तेमाल तय क्रम के अनुसार किया जाता है यानी हर नए तूफान के लिए अलग से नाम सोचने की जरूरत नहीं पड़ती. बल्कि सूची का अगला नाम इस्तेमाल किया जाता है। इसी आधार पर इस तूफान का नाम 'अर्नब' तय किया गया।

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अर्नब नाम का क्या अर्थ है?

अर्नब शब्द का संबंध आम तौर पर बंगाली भाषा में समुद्र या महासागर के अर्थ से जोड़ा जाता है. हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक सूची में इस नाम का उच्चारण ओरनब दिया गया है, लेकिन इसका औपचारिक अर्थ नहीं बताया गया है। चक्रवातों के नाम पहले से तय किए जाते हैं। इसलिए तूफान बनने के बाद किसी देश की सरकार या मौसम विभाग अपनी मर्जी से उसका नाम नहीं रखता। संबंधित क्षेत्र के लिए बनी सूची में जिस नाम की बारी होती है, उसे इस्तेमाल किया जाता है।

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